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  अनिवार्य मृत्युदंड असंवैधानिकरू उच्चतम न्यायालय
स्रोतः प्रभासाक्षी
स्थानः
नई दिल्ली
तिथिः
05 Qjojh 2012
 

   

उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि किसी अपराधी के लिए शस्त्र अधिनियम के तहत अनिवार्य मौत की सजा असंवैधानिक है क्योंकि यह किसी नागरिक के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन करती है। न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली यअब सेवानिवृत्तद्ध और न्यायमूर्ति जेएस खेहर की पीठ ने कहा कि शस्त्र अधिनियम की धारा 27 रू3रूए जिसमें अनिवार्य मृत्युदंड का प्रावधान हैए ऐसे मामलों में किसी आरोपी को सजा सुनाने में अदालतों के अधिकारों को सीमित करने की बात भी करती है। पीठ ने कहाए श्श्जो कानून निष्पक्षता के मत के अनुकूल नहीं हैं और मृत्युदंड जैसी अपरिवर्तनीय सजा लगाता हैए वह अधिकार और न्याय के असंगत है।श्श् न्यायमूर्ति गांगुली ने फैसला लिखते हुए कहाए श्श्जरूरी प्रक्रिया की इन सभी अवधारणाओं और न्यायसंगतए निष्पक्ष एवं तर्कसंगत कानून की धारणा संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत सुनिश्चित गारंटी में इस अदालत ने पढ़ी है।श्श् उन्होंने कहाए श्श्इसलिए कानून की धारा 27 रू3रू का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघनकारी है।श्श् शीर्ष अदालत ने पंजाब सरकार की एक अपील खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। पंजाब सरकार ने सीआरपीएफ के कांस्टेबल दलवीर सिंह को बरी किये जाने के फैसले को चुनौती दी थी जिस पर 1993 में एक सेवा विवाद को लेकर राइफल से अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर अंधाधुंध गोली चलाने का आरोप था। उस पर शस्त्र कानून के तहत हत्या यआईपीसी की धारा 302द्ध और अन्य अपराधों का मामला दर्ज किया गया।


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