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  सीरियाई संकट के शांतिपूण्र हल के पक्ष में भारत
स्रोतः प्रभासाक्षी
स्थानः
संयुक्त राष्ट्र
तिथिः
05 Qjojh 2012
 

   

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया पर अरब लीग समथ्िरत प्रस्ताव को भारत ने वहां के संकट के शांतिपूण्र निपटारे के अपने रुख के तहत समर्थन दिया। भारत ने रेखांकित किया कि प्रस्ताव सीरियाई सरकार और समूचे विपक्ष के बीच गंभीर राजनीतिक वार्ता पर जोर देता है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी सदस्य हरदीप सिंह पुरी ने 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद को भारत की स्थिति का ब्यौरा देते हुए बतायाए श्श्सीरिया में सभी विपक्षी बलों का सरकार के साथ सकरात्मक बातचीत में शामिल होना अनिवार्य होगा। हमें उम्मीद है कि यह शांति का नया माहौल और राजनीतिक प्रक्रिया बहाल करेगा।श्श् उन्होंने कहाए श्श्राजनीतिक वार्ता राजनीतिक सुधारों पर आधारित होनी चाहिए जिसकी सीरियाई नेतृत्व ने घोषणा की थी ताकि उन्हें वहां के समाज के हर वर्ग का समर्थन मिले।'श् रूस और चीन ने प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया है जिसमें सीरिया के सभी पक्षों. सरकारी बलों और सशस्त्र विपक्षी समूहों को हिंसा और बदले की कार्रवाई रोकने को कहा गया है। प्रस्ताव पर मतदान के बाद पुरी ने कहा कि मामले पर भारत ने तर्कों पर आधारित और स्वतंत्र तौर पर फैसला लिया। चीन और रूस से उलट प्रस्ताव के पक्ष में मतदान कर अमेरिका के पक्ष में खड़े होने की आलोचना पर पुरी ने कहाए श्श्मेरा मानना है कि यह कहना सही होगा कि भारत ने अपने रुख और सीरिया में स्थिति के हिसाब से फैसला किया।श्श् पुरी ने कहाए श्श्हम विदेश नीति के फैसले तर्कों पर लेते हैं और हम उन्हें स्वतंत्र तौर पर लेते हैं।श्श् उन्होंने कहा कि अरब लीग समथ्िरत प्रस्ताव में भारत के रुख और उसकी ज्यादातर चिंताओं को शामिल किया गया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने प्रस्ताव पर सुरक्षा परिषद के दो सदस्यों चीन और रूस के वीटो करने को श्दुभ्राग्यपूण्रश् करार दिया। प्रस्ताव को दुनिया के सबसे ताकतवर संगठन के बाकी 13 सदस्यों का समर्थन मिला। बातचीत की शुरुआती प्रक्रिया में सक्रिय तौर पर शामिल रहे पुरी ने कहा कि 2 फरवरी को ऐसा लगा कि रूस प्रस्ताव के आलेख पर रजामंद हो गया है। उन्होंने कहाए श्श्गुरुवार शाम यदो फरवरीद्ध को ऐसा लगा कि हमारे प्रस्ताव के आलेख से सभी सहमत हैं।श्श् संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहाए श्श्जब यह मान लिया गया कि प्रस्ताव के मसौदे पर सभी तैयार हो गए हैंए रूसी कुछ अतिरिक्त अनुशंसाओं के साथ आए और वे इस पर मतदान में देरी चाहते थे।श्श् उन्होंने कहाए श्श्इससे कोई बात नहीं बनी। मेरा मानना है कि परिषद इस पर मतदान को तैयार था। इस वजह से इसके पक्ष में दो के मुकाबले 13 मत पड़े।श्श् पुरी ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो परिषद इस मुद्दे पर फिर से विचार करेगा। उन्होंने कहाए श्श्यह दुभ्राग्यपूण्र है कि दो स्थायी सदस्यों के नकारात्मक मतदान के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो सका और मुझे उम्मीद है कि सीरियाई सरकार और विपक्ष इस संदेश को ग्रहण करेंगे और सभी यही उम्मीद कर रहे हैं कि हिंसा बढ़े नहीं क्योंकि स्थिति वाकई में बहुत गंभीर है।श्श्


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