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यूनिकोड फॉन्ट


एटमी करार पर अमेरिकी चिंताओं का ध्यानरू मथाइर्

प्रभासाक्षी
07 फरवरी 2012    वाशिंगटन

असैन्य परमाणु करार पर अमेरिकी कंपनियों को बराबर का मौका देने का वादा करते हुए भारतीय विदेश सचिव रंजन मथाई ने कहा है कि भारत उनकी चिंताओं पर अपनी संसद में इस संबंध में पारित कानून की रूपरेखा के दायरे में ध्यान देना चाहता है। अमेरिका यात्रा पर आये मथाई ने सीएसआईएस संस्थान में अपने उद्बोधन में कहाए श्श्हम अमेरिकी कंपनियों को समान अवसर देंगे और अमेरिकी कंपनियों की विशेष चिंताओं पर कानून के दायरे में ध्यान देंगे।श्श् उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका इस सहयोग को लेकर काम करते रहे हैं और उन्हें इसे आगे बढ़ाने के लिए व्यावहारिक कदम उठाने चाहिए जैसा कि उन्होंने पिछले साल किया। विदेश सचिव के तौर पर पहली बार अमेरिका की सरकारी यात्रा पर आये मथाई ने कहाए श्श्हमारे कानूनी विशेषज्ञों के बीच बातचीत का दौर हाल ही में हुआ है। त्वरित कार्य सहमति के संबंध में भारतीय संस्थान एनपीसीआईएल और अमेरिकी कंपनियों के बीच बातचीत की शुरुआत उत्साहवर्धक है।श्श् प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान का उल्लेख करते हुए मथाई ने कहा कि भारतए अमेरिका असैन्य परमाणु करार दोनों देशों के बदलते रिश्तों का प्रतीक और मंच है। उन्होंने कहाए श्श्हम बदलती वैश्विक परमाणु व्यवस्था में हमारी राजनयिक साझेदारी की सफलता को असैन्य परमाणु ऊर्जा में समान उत्पादक व्यावसायिक सहयोग में तब्दील करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।श्श् वाशिंगटन यात्रा के पहले दिन मथाई ने सीएसआईएस में व्याख्यान देने के अलावा वाणिज्य और विदेश विभाग में अधिकारियों से मुलाकात की। आज वह विदेश विभाग में और व्हाइट हाउस में अधिकारियों से बातचीत करेंगे। मथाई ने कहा कि भारत में रक्षा प्राप्ति इस संबंध में दिशानिर्देशों के अनुरूप सर्वश्रेष्ठ तकनीकीए आथ्िरक चयन पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने कहाए श्श्यह बात भी दोहराई जानी चाहिए कि कुछ साल पहले बहुत कम स्तर से हमारा रक्षा व्यापार पिछले चारए पांच साल में 9 अरब डॉलर के मूल्य तक पहुंच गया है और इसमें इजाफा होगा।श्श् मथाई ने कहाए श्श्दोनों तरफ एक दूसरे की प्राप्ति और मंजूरी प्रक्रिया को समझने में सतत प्रगति हो रही है। सामान्य व्यापार से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में एवं संयुक्त अनुसंधानए विकास व उत्पादन में हमारी साझेदारी बढ़ रही है।श्श् विदेश सचिव ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा के समय से दोनों देशों ने द्विपक्षीय भागीदारी को अभूतपूर्व स्तर पर बनाये रखा है। तब से दोनों देशों ने नये रणनीतिक विमर्श की शुरुआत की है जिसके दायरे में दुनिया के प्रमुख क्षेत्र आते हैं। दोनों देशों ने जापान के साथ अपनी पहली त्रिपक्षीय बातचीत शुरू कीए परमाणु अप्रसार और परमाणु सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाया तथा आतंकवाद के मुकाबले में और खुफिया सहयोग को गहरा किया। मथाई ने कहा कि दोनों देशों ने तीसरे देश मेंए खासतौर पर अफ्रीका में विकास के लिए शुरुआती सहयोग को आगे बढ़ाया हैए वाशिंगटन में बहुत सफल उच्च शिक्षा शिखरवार्ता आयोजित की तथा स्वच्छ ऊर्जाए खाद्य सुरक्षा व स्वास्थ्य देखभाल जैसे क्षेत्रों में अभिनव प्रयोगों के साथ प्रगति की। उन्होंने कहाए श्श्हमने द्विपक्षीय निवेश संधि पर बातचीत फिर से शुरू की और आथ्िरक सहयोग के लिए अवसरों में वृद्धि की।श्श्


10:11

कृति फॉन्ट


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