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  बन्नूरमठ ने राज्यपाल हंसराज पर साधा निशाना
स्रोतः प्रभासाक्षी
स्थानः
बेंगलूर
तिथिः
07 Qjojh 2012
 

   

कर्नाटक के लोकायुक्त पद से दूरी बनाते हुए केरल उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसआर बन्नूरमठ ने आज राज्यपाल एचआर भारद्वाज पर निशाना साधा और कहा कि राजभवन से उनके खिलाफ अप्रामाणिक एवं झूठी बातें कही जा रही हैं जिससे वह काफी आहत हुए हैं। भारद्वाज ने न्यायमूर्ति बन्नूरमठ को लोकायुक्त बनाने की सरकार की सिफारिश को सोमवार को औपचारिक तौर पर खारिज कर दिया और फाइल लौटा दीए जिसके बाद बन्नूरमठ ने यहां संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री डीवी सदानंद गौड़ा से अनुरोध किया है कि इस पद के लिए उनके नाम पर विचार नहीं किया जाए ताकि पद को तेजी से भरा जा सके। मुख्यमंत्री गौड़ा को सोमवार को लिखे अपने पत्र को पढ़ते हुए न्यायमूर्ति बन्नूरमठ ने कहाए श्श्मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि मुझे आपसे तत्काल अनुरोध करना चाहिए कि मेरे नाम पर विचार नहीं करें।श्श् उन्होंने कहा कि मीडिया के जरिये उनकी निष्ठा और चरित्र पर किये जा रहे लगातार हमले पूरी तरह झूठेए बेबुनियाद और आहत करने वाले आरोपों पर आधारित हैं। न्यायमूर्ति बन्नूरमठ ने कहाए श्श्मेरी मानसिक शांति प्रभावित हुई है और झूठे व बेबुनियाद आरोपों से मेरी सेहत खराब हो रही है। जनता की नजर में मेरी छवि और साख पर असर पड़ रहा है। मैं इस प्रताड़ना और अपमान को और बर्दाश्त नहीं कर सकता।श्श् राज्यपाल भारद्वाज ने भाजपा सरकार से तीन महीने तक गतिरोध के बाद औपचारिक रूप से बन्नूरमठ की नियुक्ति की सिफारिश को खारिज कर दिया। एक भूमि आवंटन विवाद के चलते उनकी नियुक्ति रुकी हुई थी। प्रदेश में 19 सितंबर से लोकायुक्त का पद खाली है। संतोष हेगड़े के सेवानिवृत्त होने के बाद इस पद पर काबिज हुए उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश शिवराज पाटिल को नियमों का उल्लंघन करते हुए जमीन आवंटित करने के आरोपों के मद्देनजर पद छोड़ना पड़ा था। बन्नूरमठ ने भारद्वाज के ताजा बयान पर कहाए श्श्इस तरह के अस्पष्ट और झूठे बयान पर मैं जवाब नहीं दे सकता।श्श् भारद्वाज ने अपने बयान में कहा था कि उन्होंने लोकायुक्त के तौर पर बन्नूरमठ की नियुक्ति भूमि घोटाले के अलावा अन्य कारणों से रद्द कर दी है। भारद्वाज पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहाए श्श्क्या उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से ऐसे लोगों के खिलाफ सार्वजनिक आरोप लगाते समय कोई उपयुक्त आचार संहिता की उम्मीद नहीं की जा सकतीए जिनके नाम पर लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर विचार हो रहा है।श्श् उन्होंने सवाल कियाए श्श्मेरे जैसे निर्दोष लोगों की छवि बचाये रखने के लिए उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ क्या कोई पाबंदी नहीं है।श्श् उन्होंने कहा कि उनकी नियुक्ति पर संप्रदाय के आधार पर नहीं बल्कि क्षमता व बेदाग छवि के आधार पर विचार किया गया। बन्नूरमठ ने कहा कि 1990 में उनकी नियुक्ति राज्य के सरकारी अभियोजक के तौर पर की गयी थी जब दिवंगत एस॰ बंगारप्पा मुख्यमंत्री थे। वह वीरप्पा मोइलीए देवगौड़ा और दिवंगत जेएच पटेल के शासन में भी इस पद पर रहेए जो अलग अलग समुदायों से जुड़े हैं। उन्होंने कहाए श्श्मेरी नियुक्ति मेरी योग्यता पर आधारित है।श्श् उन्होंने कहा कि यदि उन पर सांप्रदायिक होने का संदेह होता तो कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और केरल के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त नहीं किया जाता। बन्नूरमठ ने कहाए श्श्मैं इन वैधानिक और संवैधानिक पदों पर इसलिए नहीं था कि मैं लिंगायत समुदाय से हूं या किसी विशेष दल अथवा नेता से जुड़ा हुआ हूं।श्श् उन्होंने कहा कि राज्यपाल की ओर से लगाये गये व्यक्गित आरोप संदेह एवं कई सवाल पैदा करते हैं जिनके प्रभावी जवाब मिलने चाहिए। बन्नूरमठ ने कहा कि 38 साल के बेदागए स्वच्छ कानूनी कॅरियर के बाद वह शहर के ज्यूडिशियल लेआउट में वैध तरीके से खरीदी गयी जगह पर निर्मित मकान में रहने लगे।


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