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  भारत एक फलता फूलता लोकतंत्ररू नैंसी पॉवेल
स्रोतः प्रभासाक्षी
स्थानः
वाशिंगटन
तिथिः
08 Qjojh 2012
 

   

भारत में कार्यवाहक अमेरिकी राजदूत नैंसी पॉवेल ने कहा कि भारत में जारी विधानसभा चुनाव वहां के फलते फूलते लोकतंत्र को झलकाते हैं लेकिन वहां अब भी आथ्िरक भिन्नताओं वाली ऐतिहासिक जातीय व्यवस्था पर आधारित काफी सामाजिक असमानताएं हैं। पॉवेल ने मंगलवार को सीनेट की विदेश संबंध समिति में कहाए श्श्मेरा मानना है कि भारत का लोकतंत्र उन्नत होता लोकतंत्र है। फिलहाल वहां पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं जिनमें से एक प्रदेश में तो 20 करोड़ से अधिक मतदाता हैं।श्श् उन्होंने भारत में चल रहे विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहाए श्श्इसलिए इसके प्रारूप और मानकों के तौर पर यह भलीभांति स्थापित लोकतंत्र है। वे नीतियों पर व्यापक चर्चा के बाद मतदान कर रहे हैं और खासतौर पर इन पांच राज्यों में आथ्िरक सुधारों की मांग हो रही है।श्श् भारत में जातीय व्यवस्था पर आधारित सामाजिक असमानताओं का उल्लेख करते हुए पॉवेल ने कहाए श्श्मैं अमेरिकी सरकार और अमेरिकी इतिहास की शिक्षक के रूप में सेवा देने के अपने समय से सबक लेते हुए याद करती हूं कि हमारा संविधान शुरुआत में और भी अधिक परिपूण्र संघ के निर्माण का उल्लेख करता है।श्श् उन्होंने कहाए श्श्मुझे लगता है कि भारत भी इस प्रक्रिया में लगा हुआ है। वहां आथ्िरक भिन्नताओं वाली ऐतिहासिक जातीय व्यवस्था पर आधारित काफी सामाजिक असमानताएं हैं।श्श् अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि भारतीय विदेश सचिव रंजन मथाई ने सोमवार को सार्वजनिक तौर पर कहा था कि ईरान से मंगाये जा रहे कुल तेल आयात में पहले ही कुछ प्रतिशत की कमी देखी गयी है। पॉवेल के बयान का जिक्र करते हुए सीनेटर मेनेनडेज ने कहा कि अगर भारत जैसे राष्ट्र सोना देकर या अन्य तरीके से प्रतिबंध को दरकिनार कर रहे हैं तब मैं समझता हूं कि कि आप हमारे लक्ष्यों को किस तरह से साझा कर रहे हैं।


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