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  ईरान पर भारतीय नीति का पॉवेल ने किया बचाव
स्रोतः प्रभासाक्षी
स्थानः
वाशिंगटन
तिथिः
08 Qjojh 2012
 

   

अमेरिकि पाबंदी को दरकिनार करते हुए ईरान से तेल आयात करने के भारत के निण्रय पर सांसदों की ओर से सवाल उठाये जाने के बीच भारत में कार्यवाहक अमेरिकी राजदूत नैंसी पॉवेल ने हिन्दुस्तान की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए उसकी मजबूरियों को माना है। पॉवेल ने आश्वस्त किया कि जब वह नयी दिल्ली में अमेरिकी राजदूत के तौर पर सेवाएं देंगी तो ईरान पर पाबंदियों को प्रभाव में लाना उनकी शीर्ष प्राथमिकताओं में से एक रहेगा। सीनेटर रॉर्बट मेनेनडेज ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि भारत प्रतिबंध को तोड़ रहा है। उस पर प्रतिक्रिया देते हुए पॉवेल ने बयान दिया कि अगर राजदूत के तौर पर मुझे मंजूरी मिलती है मैं समझ सकती हूं और इस मुद्दे की अहमियत मानती हूं। मेरे कार्यकाल के दौरान इससे बहुत गंभीरता तथा त्वरित तरीके से निपटा जाएगा। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि कभी कभी आपके साथ कुछ मत भिन्नता होती है लेकिन भारत हमारे साथ ईरान को एक गैर परमाणु राष्ट्र के तौर पर देखना चाहता है। भारत ने चार बार हमें आईएईए में समर्थन दिया है। हम लोग लगातार अमेरिकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बहुत महत्वपूण्र वार्ता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह इस बातचीत में शामिल होना चाहती हैं। पॉवेल ने कहाए श्श्लेकिन समाज को आगे बढ़ाने वाला एक कारक लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता है। मतदान बॉक्स के जरिये जनता अपने नेताओं के लिए और बदलाव के लिए मतदान करती है।श्श् उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में व्यापक प्रगति की है लेकिन यह अब भी लालफीता शाही से मुक्त समाज नहीं है। उन्होंने कहाए श्श्मुझे लगता है कि हमने 20 साल में आथ्िरक सुधार देखे हैं जिसमें अनेक लोग गरीबी से उबरे हैं।श्श् पॉवेल ने कहाए श्श्अब वे भारत के मध्यम वर्ग में आते हैं। वे अपने बच्चों को पढ़ाने का खर्च उठा सकते हैं।श्श्


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