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  गिलानी ने समन के खिलाफ अपील दायर की
स्रोतः प्रभासाक्षी
स्थानः
इस्लामाबाद
तिथिः
08 Qjojh 2012
 

   

भारत जैसे देशों में शीर्ष न्यायालयों की ओर से सुनाये गये फैसलों का हवाला देते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने उच्चतम न्यायालय में आज अपील दायर करके उनके खिलाफ अवमानना के आरोप तय करने के लिए उन्हें समन करने वाले आदेश को निलंबित करने की मांग की। शीर्ष अदालत ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले फिर से खोलने में नाकाम रहने पर गिलानी को समन भेजकर 13 फरवरी को पेश होने के लिए कहा था। गिलानी के वकील एतजाज अहसान की ओर से दायर 200 पेज की अपील में उच्चतम न्यायालय से प्रधानमंत्री के 13 फरवरी को उनके सामने पेश होने संबंधी आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई। अहसान ने अदालत के बाहर संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने भारतए आस्ट्रेलियाए ब्रिटेनए फ्रांस और अमेरिका में शीर्ष न्यायालयों की ओर से सुनाये गये पूर्व फैसलों के आधार पर यह अपील तैयार की है। भारत में उच्चतम न्यायालय के आदेश के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर करने का प्रावधान है। अहसान ने कहाए श्श्मैंने आज एक अपील दायर की है। मैंने 50 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों का हवाला दिया है और उच्चतम न्यायालय के आदेश के खिलाफ खास कारण बताए हैं।श्श् अहसान ने इस मामले में अपील पर जल्द सुनवाई की मांग की। उन्होंने कहाए श्श्प्रधानमंत्री को भेजे गये समन के खिलाफ फैसला देना और कार्यवाही पर रोक लगाना अदालत पर निभ्रर करता है।श्श् इस अपील में अदालत से गिलानी पर आरोप तय करने को स्थगित करने की मांग की गई है। अपील में कहा गया कि गिलानी को अपने बचाव में बात कहने का अवसर दिये बगैर आदेश दिया गया। दो फरवरी को उच्चतम न्यायालय के सात न्यायाधीशों की पीठ ने गिलानी को समन भेजकर 13 फरवरी को हाजिर होने के लिए कहा था ताकि राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर आदेश पर कदम नहीं उठाने को लेकर अवमानना के मामले में गिलानी पर आरोप तय किये जा सकें। इसके बाद सरकार और न्यायपालिका के बीच तनाव बढ़ गया था। अगर गिलानी अवमानना के मामले में दोषी ठहराये जाते हैं तो उनहें छह महीने तक के कारावास की सजा झेलनी पड़ सकती है और पांच साल तक उनके किसी सार्वजनिक पद पर काबिज होने पर रोक लग सकती है। अपील में 50 से अधिक कानूनी और संवैधानिक बिन्दुओं को उठाया गया जो इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं कि जरदारी के खिलाफ मामले फिर से नहीं खोलने पर प्रधानमंत्री संविधान के खिलाफ नहीं गये। अहसान ने कहा कि प्रधानमंत्री के लिए अदालत के सामने पेश होने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि अदालत की अवमानना कानून के मुताबिकए अपील दायर होने के बाद नई पीठ गठित करने की जरूरत होती है। अहसान ने कहा कि प्रतिवादी को 30 दिन के भीतर अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर करनी होती है। उन्होंने कहाए श्श्मैंने 30 दिन मांगे लेकिन पीठ ने मुझे केवल 11 दिन दिये. हमने जल्द से जल्द अपील दायर करने की कोशिश की ताकि वर्तमान पीठ से बड़ी पीठ गठित हो सके।श्श् अहसान ने कहा कि इस मामले की वर्तमान सुनवाई में शामिल न्यायाधीशों को छोड़कर नौ न्यायाधीश हैं जो मामले की सुनवाई के लिए नई पीठ गठित कर सकते हैं. नई पीठ में मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी निश्चित रूप से शामिल होंगे। उच्चतम न्यायालय सरकार पर स्विट्जरलैंड में जरदारी के खिलाफ कथित धनशोधन के मामले फिर से खोलने का दबाव बना रहा है क्योंकि न्यायालय ने दिसंबर 2009 में पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ की ओर से भ्रष्टाचार के मामलों में दी गई आममाफी को खारिज कर दिया।


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