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  सीरिया में विपक्षी बलों को हथियार देना जल्दबाजी होगीरू अमेरिका
स्रोतः प्रभासाक्षी
स्थानः
वाशिंगटन
तिथिः
20 Qjojh 2012
 

   

अमेरिका ने कहा है कि फिलहाल सीरिया में हस्तक्षेप करना बहुत मुश्किल है और वहां तब तक विपक्षी बलों को वह हथियार मुहैया नहीं कराना चाहता जब तक उन बलों की पहचान स्पष्ट न हो जाए। अमेरिका के ज्वाइंट चीफ्स अॉफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल मार्टिन डेम्प्से ने सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में कहा श्श्मेरे विचार से फिलहाल सीरिया में हस्तक्षेप करना बहुत मुश्किल है।श्श् उन्होंने कहा श्श्मेरी राय में सीरिया में विपक्षी आंदोलनकारियों को हथियार देने का फैसला जल्दबाजी भरा होगा क्योंकि अभी तक उनकी पहचान पूरी तरह साफ नहीं हुई है।श्श् पिछले सप्ताह 50 से अधिक जानेमाने कंजर्वेटिव सदस्यों ने ओबामा प्रशासन को अपने हस्ताक्षर वाला एक पत्र भेजा गया था जिसमें सीरियाई प्रशासन के खिलाफ तत्काल कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई थी। इसमें विपक्षी आंदोलनकारियों को श्आत्मरक्षा में मददश् की खातिर हथियार देने की भी बात शामिल थी। डेम्प्से ने कहा कि सीरिया से तुर्कीए रूसए ईरान सहित कई देशों के हित जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समूहों की कमी भी नहीं है जो इस मुद्दे को क्षेत्रीय नियंत्रण के लिए शियाए सुन्नी के बीच स्पर्धा मानते होंगे। अमेरिका के ज्वाइंट चीफ्स अॉफ स्टाफ के अध्यक्ष ने कहा कि सीरिया लीबिया जैसे देशों की तुलना में बिल्कुल अलग चुनौती पेश कर रहा है। लीबिया में तो मुअम्मर गद्दाफी के शासन को खत्म करने के लिए पश्चिमी देशों ने विपक्षी बलों को सैन्य मदद दी थी। श्श्लेकिन सीरिया के मामले में स्थिति बिल्कुल अलग है।श्श् डेम्प्से ने कहा श्श्सीरियाई सेना पूरी तरह सक्षम है। उनके पास अत्याधुनिकए एकीकृत हवाई रक्षा प्रणाली है। उनके पास रसायनिक और जैविक हथियार हैं। अभी तक उन्होंने इनके उपयोग में न तो कोई दिलचस्पी दिखाई है और न ही इनके इस्तेमाल के इरादे के संकेत दिए हैं। लेकिन वहां की सैन्य समस्या बिल्कुल अलग है।श्श् उन्होंने कहा श्श्हम बेहतरीन खुफिया जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि वहां से मदद मांगे जाने की स्थिति में उन्हें मदद कर सकें। लेकिन अभी तक हमसे ऐसा करने को नहीं कहा गया है।श्श् पेंटागन के कमांडर ने कहा कि अमेरिका सीरिया पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा श्श्कोई भी एकतरफा फैसला करने के बजाय अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने का रास्ता बेहतर है।श्श्


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