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नोटबंदी सफल रही, मुद्रा परिचालन सामान्य हुआः जेटली

नोटबंदी सफल रही, मुद्रा परिचालन सामान्य हुआः जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि 86 प्रतिशत मुद्रा को चलन से बाहर करने को वापस लेने के अभूतपूर्व निर्णय के कुछ हफ्तों बाद ही मुद्रा की स्थिति को बहाल कर लिया गया था और बाजार में मुद्रा की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के नोट छपाई कारखाने और भारतीय प्रतिभूति मुद्रण एवं मुद्रा निर्माण निगम लिमिटेड (एसपीएमसीआईएल) ने नए बैंक नोट जारी करने के लिए लगातार बिना विराम के काम किया है।

 
एसपीएमसीआईएल के 11वें स्थापना दिवस पर यहां जेटली ने कहा कि नोटबंदी को लेकर आरोप लगाना या व्यंग्यात्मक टिप्पणियां करना आसान काम है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इसे लागू करना सबसे मुश्किल काम है। यह शायद दुनिया का सबसे बड़ा नोटबंदी अभियान है जिसका लक्ष्य भ्रष्टाचार, काला धन और जाली मुद्रा की जड़ों पर प्रहार करना था।’’ जेटली ने कहा कि अक्सर लोग यह कहते रहे हैं कि मुद्रा की स्थिति को सामान्य बनाने में कम से कम सात महीने या एक वर्ष तक लग सकता है लेकिन हकीकत में इसे कुछ हफ्तों में ही पूरा कर लिया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘सामान्य स्थिति को कुछ ही हफ्तों में बहाल कर लिया गया था और बाजार में बैंक नोटों की एक दिन के लिए भी कोई कमी नहीं रही।’’
 
वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि चलन से बाहर किए गए नोटों को वापस लेकर बाजार में नए नोट जारी करने की इस प्रक्रिया में देश में कहीं भी उपद्रव की एक भी घटना नहीं हुई। यह इस कारण संभव हुआ क्यों कि रिजर्व बैंक के नोट छपाई कारखानों और एसपीएमसीआईएल ने नोट आपूर्ति प्रक्रिया को जारी रखने का अनुकरणीय कार्य किया। एसपीएमसीआईएल के कर्मचारियों को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा, ‘‘आपने बिना किसी विराम के चौबीसों घंटे काम किया और इसे पूरी दक्षता के साथ पूरा किया।’’
 
आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने कहा कि मुद्रा नोट, गैर-न्यायिक पत्र और स्टांप पेपर छापकर एवं सिक्के ढालकर एसपीएमसीआईएल सरकार का काम कर रही है। दास ने कहा, ‘‘पिछले एक साल और विशेषकर नोटबंदी के दौरान एसपीएमसीआईएल के हर कर्मचारी ने नए नोट छापने की जरूरत को पूरा करने की चुनौती को पूरा किया है।’’ उन्होंने कहा कि एसपीएमसीआईएल ने प्रारंभ में दो पालियों में काम किया और ये पारियां अपेक्षाकृत अधिक समय की थीं। लेकिन जब हमने नए नोटों की चलन में डालने की प्रक्रिया शुरू की तो नवंबर-दिसंबर के दौरान एसपीएमसीआईएल ने हफ्ते के सातों दिन चौबीसों घंटे काम किया यानी एक दिन में तीन-तीन पालियों में काम किया। दास ने कहा, ‘‘उन दिनों में छापे गए नए नोटों की मात्रा कई गुना बढ़ गयी थी जिससे जिसने सरकार को नयी करेंसी प्रतिस्थापित करने में मदद मिली।’’
 
उन्होंने कहा कि लोगों तक नए नोट पहुंचाने की गति को तेज करने के लिए एसपीएमसीआईएल ने नासिक और देवास में अपने मुद्रण केंद्रों से कोलाकाता, गुवाहाटी, चंडीगढ़, दिल्ली और लखनऊ जैसे स्थानों पर वायुमार्ग से नोट पहुंचाए। उन्होंने कहा कि एसपीएमसीआईएल अब ऋण-मुक्त हो चुका है। यह कंपनी के लिए एक अवसर है कि वह अपनी पुरानी मशीनरी का आधुनिकीकरण करे और अपनी उत्पादकता बढ़ाए। उल्लेखनीय है कि सरकार ने आठ नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद कर दिए थे और इनके स्थान पर 500 और 2000 रुपये के नए नोट बाजार में उतारे थे।
 
 

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