1. विविदिषानन्द को राजा अजीतसिंह ने बनाया था स्वामी विवेकानन्द

    विविदिषानन्द को राजा अजीतसिंह ने बनाया था स्वामी विवेकानन्द

    राजा अजीतसिंह ने उनके सिर पर साफा बांधा व भगवा चोगा पहना कर नया वेश व नया नाम स्वामी विवेकानन्द प्रदान किया जिसे स्वामीजी ने जीवन पर्यन्त धारण किया। आज भी लोक उन्हें राजा अजीतसिंह द्वारा प्रदत्त स्वामी विवेकानन्द नाम से ही जानते हैं।

  2. बाल्यकाल से ही 'बचपन' बचाने में जुट गये थे कैलाश सत्यार्थी

    बाल्यकाल से ही 'बचपन' बचाने में जुट गये थे कैलाश सत्यार्थी

    कैलाश बचपन से ही दूसरों खासकर बच्चों की मदद करते थे। उनके बारे में कहा जाता है कि महज 11 वर्ष की छोटी सी उम्र में उनका ध्यान उन गरीब बच्चों पर गया जो किताबें न होने की वजह से शिक्षा से दूर रहते थे।

  3. भारतीय राजनीति के युगपुरुष हैं अटल बिहारी वाजपेयी

    भारतीय राजनीति के युगपुरुष हैं अटल बिहारी वाजपेयी

    भारतीय राजनीति के युगपुरुष, श्रेष्ठ राजनीतिज्ञ, कोमल हृदय, संवेदनशील मनुष्य, भारत माता के सच्चे सपूत, अजातशत्रु पूर्व प्रधानमन्त्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का आज (25 दिसम्बर 2016) को 92वां जन्मदिवस है।

  4. किसानों के सच्चे हिमायती थे चौधरी चरण सिंह

    किसानों के सच्चे हिमायती थे चौधरी चरण सिंह

    चौधरी चरण सिंह की नीति किसानों व गरीबों को ऊपर उठाने की थी। उन्होंने हमेशा यह साबित करने की कोशिश की कि बगैर किसानों को खुशहाल किए देश व प्रदेश का विकास नहीं हो सकता।

  5. महान गणितज्ञ रामानुजम से प्रभावित रही पूरी दुनिया

    महान गणितज्ञ रामानुजम से प्रभावित रही पूरी दुनिया

    रामानुजनम को गणित से इतना लगाव था कि कक्षा में सिखाए गये गणित का अभ्यास करने से उसका समाधान नहीं होता था। वे आगामी कक्षा की गणित हल करने लगते थे।

  6. अशफाक उल्ला खां का गरम दल में शामिल होने का कारण

    अशफाक उल्ला खां का गरम दल में शामिल होने का कारण

    महात्मा गांधी ने जब चौरी चौरा की घटना के बाद असहयोग आंदोलन वापस ले लिया तो इससे अशफाक को बेहद पीड़ा पहुंची और वह गरम दल की विचारधारा में शामिल हो गए।

  7. विश्व स्तर के विधिवेत्ता थे डॉ. भीमराव अंबेडकर

    विश्व स्तर के विधिवेत्ता थे डॉ. भीमराव अंबेडकर

    भारतीय संविधान के निर्माता व सामाजिक समरसता के प्रेरक भारतरत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्व स्तर के विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, समाजशास्त्री, मानवविज्ञानी, संविधानविद, लेखक, दार्शनिक, इतिहासकार और आंदोलनकारी थे।

  8. महान वैज्ञानिक ही नहीं साहित्यकार भी थे जगदीश चंद्र बसु

    महान वैज्ञानिक ही नहीं साहित्यकार भी थे जगदीश चंद्र बसु

    प्रोफेसर जगदीश चंद्र बोस एक महान वैज्ञानिक थे। भौतिकी जीव एवं वनस्पति विज्ञान पुरातत्व विज्ञान और बंगला साहित्य में उनका योगदान अद्वितीय है।

  9. खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी

    रानी के कौशल को देखकर अंग्रेजी सेना भी चकित रह गयी। अंग्रेज कई दिनों तक झाँसी के किले पर गोले बरसाते रहे परन्तु किला न जीत सके। रानी एवं उनकी प्रजा ने प्रतिज्ञा कर ली थी कि अन्तिम सांस तक किले की रक्षा करेंगे।

  10. आखिरी सांस हिन्दुस्तान में ही लेना चाहते थे बहादुर शाह

    आखिरी सांस हिन्दुस्तान में ही लेना चाहते थे बहादुर शाह

    बहादुर शाह जफर की इच्छा थी कि वह आखिरी सांस अपने देश में ही लें और उन्हें हिन्दुस्तान में ही दफनाया जाए लेकिन वक्त ने उन्हें दूसरे मुल्क में मरने को मजबूर कर दिया।

  11. हिन्दुस्तान की आजादी का भरोसा था अशफाक उल्ला खान को

    हिन्दुस्तान की आजादी का भरोसा था अशफाक उल्ला खान को

    अशफाक ने ब्रितानिया हुकूमत के कारिन्दों से कहा था कि फूट डालकर शासन करने की अंग्रेजों की चाल का उन पर कोई असर नहीं होगा और हिन्दुस्तान आजाद होकर रहेगा।

  12. असहयोग आंदोलन से काफी विचलित हुए थे विट्ठल भाई

    असहयोग आंदोलन से काफी विचलित हुए थे विट्ठल भाई

    देश की स्वाधीनता की हसरत लिए वह गांधी जी के विचारों से असहमत होने के बावजूद कांग्रेस में शामिल हो गए। उनका अपने छोटे भाई वल्लभ भाई पटेल की तरह जनाधार नहीं था।