1. महान वैज्ञानिक ही नहीं साहित्यकार भी थे जगदीश चंद्र बसु

    महान वैज्ञानिक ही नहीं साहित्यकार भी थे जगदीश चंद्र बसु

    प्रोफेसर जगदीश चंद्र बोस एक महान वैज्ञानिक थे। भौतिकी जीव एवं वनस्पति विज्ञान पुरातत्व विज्ञान और बंगला साहित्य में उनका योगदान अद्वितीय है।

  2. खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी

    खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी

    रानी के कौशल को देखकर अंग्रेजी सेना भी चकित रह गयी। अंग्रेज कई दिनों तक झाँसी के किले पर गोले बरसाते रहे परन्तु किला न जीत सके। रानी एवं उनकी प्रजा ने प्रतिज्ञा कर ली थी कि अन्तिम सांस तक किले की रक्षा करेंगे।

  3. आखिरी सांस हिन्दुस्तान में ही लेना चाहते थे बहादुर शाह

    आखिरी सांस हिन्दुस्तान में ही लेना चाहते थे बहादुर शाह

    बहादुर शाह जफर की इच्छा थी कि वह आखिरी सांस अपने देश में ही लें और उन्हें हिन्दुस्तान में ही दफनाया जाए लेकिन वक्त ने उन्हें दूसरे मुल्क में मरने को मजबूर कर दिया।

  4. हिन्दुस्तान की आजादी का भरोसा था अशफाक उल्ला खान को

    हिन्दुस्तान की आजादी का भरोसा था अशफाक उल्ला खान को

    अशफाक ने ब्रितानिया हुकूमत के कारिन्दों से कहा था कि फूट डालकर शासन करने की अंग्रेजों की चाल का उन पर कोई असर नहीं होगा और हिन्दुस्तान आजाद होकर रहेगा।

  5. असहयोग आंदोलन से काफी विचलित हुए थे विट्ठल भाई

    असहयोग आंदोलन से काफी विचलित हुए थे विट्ठल भाई

    देश की स्वाधीनता की हसरत लिए वह गांधी जी के विचारों से असहमत होने के बावजूद कांग्रेस में शामिल हो गए। उनका अपने छोटे भाई वल्लभ भाई पटेल की तरह जनाधार नहीं था।

  6. सर्वप्रथम लोहिया ने कल्पना की थी गैर-कांग्रेस वाद की

    सर्वप्रथम लोहिया ने कल्पना की थी गैर-कांग्रेस वाद की

    देश में गैर कांग्रेसवाद की अलख जगाने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया चाहते थे कि दुनिया भर के सोशलिस्ट एकजुट होकर मजबूत मंच बनाएं।

  7. जननायक और मानवतावादी चिंतक थे जयप्रकाश नारायण

    जननायक और मानवतावादी चिंतक थे जयप्रकाश नारायण

    लोकनायक शब्द को चरितार्थ करने वाले जयप्रकाश नारायण अत्यंत समर्पित जननायक और मानवतावादी चिंतक तो थे ही साथ साथ उनकी छवि अत्यंत शालीन और मर्यादित सार्वजनिक जीवन जीने वाले व्यक्ति की भी है।

  8. अहिंसा के बल पर अंग्रेज हुकूमत हिला दी थी गाँधीजी ने

    अहिंसा के बल पर अंग्रेज हुकूमत हिला दी थी गाँधीजी ने

    गाँधी जी ने अहिंसा के बल पर ही अत्यन्त अत्याचारी एवं क्रूर अंग्रेजी सरकार को हिलाकर रख दिया था और अहिंसा के मार्ग पर अडिग रहते हुए ही उन्होंने पूरे विश्व को शांति और सौहार्द का अविस्मरणीय पाठ पढ़ाया था।

  9. गाँधीजी, शास्त्रीजी के मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि

    गाँधीजी, शास्त्रीजी के मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि

    सच तो यह है कि गाँधी और शास्त्री दोनों को ही हम उनकी जयंती पर रस्मी तौर पर याद करते हैं। कसमें खाते हैं उनके पदचिन्हों पर चलने की मगर हमारा आचरण एकदम विपरीत होता है।

  10. ‘भागों वाला भगत’ यूं बना ‘शहीदे-आज़म’

    ‘भागों वाला भगत’ यूं बना ‘शहीदे-आज़म’

    भगत सिंह ने खेल-खेल में खेत में छोटी-छोटी डोलियों पर लकड़ियों के छोटे छोटे तिनके गाड़ दिए। जब पूछा गया कि यह क्या बो दिया है, भगत? बालक भगत ने तपाक से उत्तर दिया कि ‘मैंने बन्दूकें बोई हैं। इनसे अपने देश को आजाद कराऊंगा’।

  11. महान राष्ट्रवादी विचारक दीनदयाल उपाध्याय

    महान राष्ट्रवादी विचारक दीनदयाल उपाध्याय

    पंडित जी भारत की राष्ट्रवादी पार्टी भारतीय जनसंघ के शिखर पुरुष थे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद के सर्वांगीण विकास और अभ्युदय के लक्ष्य भी भारतीय दर्शन से ही निरूपित किये थे।

  12. भारत रत्न डॉ. विश्वेश्वरैया के चार लाभकारी नियम

    भारत रत्न डॉ. विश्वेश्वरैया के चार लाभकारी नियम

    भारत रत्न से सम्मानित डॉ. विश्वेश्वरैया कठोर अनुशासन, श्रम की प्रतिमूर्ति के साथ ही प्रतिभावान भी थे। उन्होंने भारतवासियों के आचरण के लिये चार नियम भी बनाये थे।

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