1. असहयोग आंदोलन से काफी विचलित हुए थे विट्ठल भाई

    असहयोग आंदोलन से काफी विचलित हुए थे विट्ठल भाई

    देश की स्वाधीनता की हसरत लिए वह गांधी जी के विचारों से असहमत होने के बावजूद कांग्रेस में शामिल हो गए। उनका अपने छोटे भाई वल्लभ भाई पटेल की तरह जनाधार नहीं था।

  2. सर्वप्रथम लोहिया ने कल्पना की थी गैर-कांग्रेस वाद की

    सर्वप्रथम लोहिया ने कल्पना की थी गैर-कांग्रेस वाद की

    देश में गैर कांग्रेसवाद की अलख जगाने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया चाहते थे कि दुनिया भर के सोशलिस्ट एकजुट होकर मजबूत मंच बनाएं।

  3. जननायक और मानवतावादी चिंतक थे जयप्रकाश नारायण

    जननायक और मानवतावादी चिंतक थे जयप्रकाश नारायण

    लोकनायक शब्द को चरितार्थ करने वाले जयप्रकाश नारायण अत्यंत समर्पित जननायक और मानवतावादी चिंतक तो थे ही साथ साथ उनकी छवि अत्यंत शालीन और मर्यादित सार्वजनिक जीवन जीने वाले व्यक्ति की भी है।

  4. अहिंसा के बल पर अंग्रेज हुकूमत हिला दी थी गाँधीजी ने

    अहिंसा के बल पर अंग्रेज हुकूमत हिला दी थी गाँधीजी ने

    गाँधी जी ने अहिंसा के बल पर ही अत्यन्त अत्याचारी एवं क्रूर अंग्रेजी सरकार को हिलाकर रख दिया था और अहिंसा के मार्ग पर अडिग रहते हुए ही उन्होंने पूरे विश्व को शांति और सौहार्द का अविस्मरणीय पाठ पढ़ाया था।

  5. गाँधीजी, शास्त्रीजी के मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि

    गाँधीजी, शास्त्रीजी के मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि

    सच तो यह है कि गाँधी और शास्त्री दोनों को ही हम उनकी जयंती पर रस्मी तौर पर याद करते हैं। कसमें खाते हैं उनके पदचिन्हों पर चलने की मगर हमारा आचरण एकदम विपरीत होता है।

  6. ‘भागों वाला भगत’ यूं बना ‘शहीदे-आज़म’

    ‘भागों वाला भगत’ यूं बना ‘शहीदे-आज़म’

    भगत सिंह ने खेल-खेल में खेत में छोटी-छोटी डोलियों पर लकड़ियों के छोटे छोटे तिनके गाड़ दिए। जब पूछा गया कि यह क्या बो दिया है, भगत? बालक भगत ने तपाक से उत्तर दिया कि ‘मैंने बन्दूकें बोई हैं। इनसे अपने देश को आजाद कराऊंगा’।

  7. महान राष्ट्रवादी विचारक दीनदयाल उपाध्याय

    महान राष्ट्रवादी विचारक दीनदयाल उपाध्याय

    पंडित जी भारत की राष्ट्रवादी पार्टी भारतीय जनसंघ के शिखर पुरुष थे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद के सर्वांगीण विकास और अभ्युदय के लक्ष्य भी भारतीय दर्शन से ही निरूपित किये थे।

  8. भारत रत्न डॉ. विश्वेश्वरैया के चार लाभकारी नियम

    भारत रत्न डॉ. विश्वेश्वरैया के चार लाभकारी नियम

    भारत रत्न से सम्मानित डॉ. विश्वेश्वरैया कठोर अनुशासन, श्रम की प्रतिमूर्ति के साथ ही प्रतिभावान भी थे। उन्होंने भारतवासियों के आचरण के लिये चार नियम भी बनाये थे।

  9. संत विनोबा भावे ने शुरू किया था भूदान आन्दोलन

    संत विनोबा भावे ने शुरू किया था भूदान आन्दोलन

    भूदान आन्दोलन संत विनोबा भावे द्वारा सन् 1951 में आरम्भ किया गया स्वैच्छिक भूमि सुधार आन्दोलन था। उनकी कोशिश थी कि भूमि का पुनर्वितरण सिर्फ सरकारी कानूनों के जरिए नहीं हो, बल्कि जन-भागीदारी से इसकी सफल कोशिश की जाए।

  10. देश में सफेद क्रांति के जनक थे वर्गीज कुरियन

    देश में सफेद क्रांति के जनक थे वर्गीज कुरियन

    दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अमूल मॉडल की सफलता की कहानी बहुत हद तक आत्मनिर्भरता की कहानी है। वह ऐसी सरकारी सहायता और ऐसे हस्तक्षेपों का खुला विरोध करते थे जिससे उत्पादकता में कमी आती हो।

  11. भारतीय शिक्षा जगत को नयी दिशा दी डॉ. राधाकृष्णन ने

    भारतीय शिक्षा जगत को नयी दिशा दी डॉ. राधाकृष्णन ने

    डॉ. राधाकृष्णन का आादर्श जीवन भारतीयों के लिये स्रोत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्हीं को आदर्श मानकर आज पूरे भारत में शिक्षक दिवस पूरे धूमधाम से मनाया जाता है।

  12. इंसान को बेहतर बनाने में जीवन भर लगी रहीं मदर टेरेसा

    इंसान को बेहतर बनाने में जीवन भर लगी रहीं मदर टेरेसा

    धर्मांतरण संबंधी प्रश्नों पर मदर टेरेसा कहा करती थीं, ''हां, मैंने धर्मांतरण करवाया है, लेकिन मेरा धर्मांतरण हिंदुओं को बेहतर हिंदू, मुसलमानों को बेहतर मुसलमान और ईसाइयों को बेहतर ईसाई बनाने का ही रहा है।''

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