1. बहुमुखी प्रतिभा के धनी उद्यमी थे जेआरडी टाटा

    बहुमुखी प्रतिभा के धनी उद्यमी थे जेआरडी टाटा

    जेआरडी एक उद्यमी के रूप में भी प्रतिभा संपन्न व्यक्ति थे जिनकी सोच अपने समय से बहुत आगे की थी। उनके इस नजरिए से न केवल टाटा समूह बल्कि भारतीय उद्योग जगत को भी काफी लाभ मिला।

  2. नारी शिक्षा और उत्थान के लिए कार्य किया विद्यासागर ने

    नारी शिक्षा और उत्थान के लिए कार्य किया विद्यासागर ने

    जिन दिनों महर्षि दयानंद सरस्वती बंगाल के प्रवास पर थे तब ईश्वरचंद्र जी ने उनके विचारों को सुना। वे उनसे प्रभावित हो गये। उन दिनों बंगाल में विधवा नारियों की हालत बहुत दयनीय थी।

  3. मिसाइलों को बनाया सख्त पर खुद नरमदिल थे डॉ. कलाम

    मिसाइलों को बनाया सख्त पर खुद नरमदिल थे डॉ. कलाम

    डॉ. कलाम जी का सिध्दांत था कि जो लोग जिम्मेदार, सरल, ईमानदार एवं मेहनती होते हैं, उन्हें ईश्वर द्वारा विशेष सम्मान मिलता है क्योंकि वे इस धरती पर उसकी श्रेष्ठ रचना हैं। उनका यह सिध्दांत उन्हीं पर लागू होता था।

  4. सदैव ‘आजाद’ ही रहे भारत माँ के महान सपूत चंद्रशेखर आजाद

    सदैव ‘आजाद’ ही रहे भारत माँ के महान सपूत चंद्रशेखर आजाद

    25 साल का बांका नौजवान चंद्रशेखर आजाद भारत माँ की आजादी की बलिवेदी पर शहीद हो गया। यह देश हमेशा उनका ऋणी रहेगा। भारत माँ के इस वीर सपूत को कोटि-कोटि नमन है।

  5. स्वराज के महानायक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक

    स्वराज के महानायक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक

    "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है मैं इसे लेकर रहूंगा" के उद्घोषक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का स्थान स्वराज के पथगामियों में अग्रणीय है। उनका महामंत्र देश में ही नहीं अपितु विदेशों में भी तीव्रता के साथ गूंजा और एक अमर संदेश बन गया।

  6. कई बाधाओं को पार कर लक्ष्य तक पहुँचीं थीं गंगूबाई हंगल

    कई बाधाओं को पार कर लक्ष्य तक पहुँचीं थीं गंगूबाई हंगल

    गंगूबाई हंगल ने कई बाधाओं को पार कर अपनी गायिकी को एक मुकाम तक पहुंचाया और उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण, तानसेन पुरस्कार, कर्नाटक संगीत नृत्य अकादमी पुरस्कार और संगीत नाटक अकादमी जैसे पुरस्कारों से नवाजा गया।

  7. साहसिक कार्य करने रहने का जज्बा रखते थे सर हिलेरी

    साहसिक कार्य करने रहने का जज्बा रखते थे सर हिलेरी

    सर एडमंड हिलेरी ने 29 मई 1953 को केवल 33 साल की आयु में नेपाल के पर्वतारोही शेरपा तेनजिंग नोर्गे के साथ माउंट एवरेस्ट पर पहली बार कदम रखा था।

  8. नस्लवाद के खिलाफ अहिंसक लड़ाई लड़ी थी नेल्सन मंडेला ने

    नस्लवाद के खिलाफ अहिंसक लड़ाई लड़ी थी नेल्सन मंडेला ने

    ऐसा माना जा रहा था कि नस्लवाद के खात्मे के बाद श्वेतों के खिलाफ अश्वेत लोगों का गुस्सा फूट पड़ेगा एवं व्यापक हिंसा होगी लेकिन मंडेला ऐसे करिश्माई व्यक्ति थे कि हिंसा की एक भी घटना नहीं होने दी।

  9. जब पीरूसिंह की बहादुरी से थर्रा गया था पाकिस्तान

    जब पीरूसिंह की बहादुरी से थर्रा गया था पाकिस्तान

    परमवीर चक्र से सम्मानित होने वाले हवलदार मेजर पीरूसिंह राजस्थान के पहले व भारत के दूसरे बहादुर सैनिक थे। उन्होंने जो कुछ किया उसको विश्व के अब तक के सबसे साहसिक कारनामों में से एक माना जाता है।

  10. तिरंगा झंडा फहरा कर अंग्रेजों को चुनौती दी थी अरुणा ने

    तिरंगा झंडा फहरा कर अंग्रेजों को चुनौती दी थी अरुणा ने

    अरूणा आसफ अली ने अद्भुत कौशल का परिचय दिया और 9 अगस्त के दिन मुम्बई के गवालिया टैंक मैदान में तिरंगा झंडा फहराकर अंग्रेजों को देश छोड़ने की खुली चुनौती दे डाली।

  11. हरियाणवी लोककला की अमर विभूति हैं पं. लखमी चन्द

    हरियाणवी लोककला की अमर विभूति हैं पं. लखमी चन्द

    कुदरतन बालक लखमी चन्द को गाने का शौक था। इसी के शौक के कारण वह हमेशा कुछ न कुछ गुनगुनाता रहता था। सात-आठ वर्ष की आयु में ही उन्होंने अपनी मधुर व सुरीली आवाज से लोगों का मन मोह लिया।

  12. विवेकानंद ने अपने विचारों से विश्व पर गहरी छाप छोड़ी

    विवेकानंद ने अपने विचारों से विश्व पर गहरी छाप छोड़ी

    विवेकानन्द ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका को बहुत महत्वपूर्ण माना। वह चाहते थे कि नौजवान पीढ़ी रूढि़वाद से अछूती रहकर अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल देश की तरक्की के लिए करे।

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