1. सिद्धू के आने से पंजाब कांग्रेस में बढ़ सकती है कलह

    सिद्धू के आने से पंजाब कांग्रेस में बढ़ सकती है कलह

    अमरिन्दर को कांग्रेस हाईकमान का दबाव या हस्तक्षेप मंजूर नहीं है। वहीं सिद्धू को राहुल गांधी ने कांग्रेस में शामिल किया है। इसलिए पंजाब कांग्रेस में इन्हें हाईकमान का प्रतिनिधि माना जायेगा।

  2. छोटे दल: देखन में छोटे लगें, चोट करें गम्भीर

    छोटे दल: देखन में छोटे लगें, चोट करें गम्भीर

    चुनावी मौसम आते ही छोटी पार्टियां और ऐसे दलों के गठबंधन वजूद में आ जाते हैं। विशेष जाति या उपजातियों में पैठ रखने वाले ये दल विभिन्न सीटों पर पांच से 10 हजार वोट घसीटकर कई बार प्रमुख दलों को नुकसान पहुंचाते हैं।

  3. मुलायम की हार में भी जीत, सब कुछ लुटा बैठे शिवपाल

    मुलायम की हार में भी जीत, सब कुछ लुटा बैठे शिवपाल

    सपा में मुलायम युग समाप्त हो चुका है। कल तक पार्टी को अपनी जागीर समझने वाले बुजुर्ग समाजवादी नेता या तो आज अखिलेश के पीछे खड़े हैं, या फिर हाशिये पर पहुंच गये हैं।

  4. गठबंधन से कांग्रेस आलाकमान खुश, कार्यकर्ता निराश

    गठबंधन से कांग्रेस आलाकमान खुश, कार्यकर्ता निराश

    गठबंधन से कांग्रेस के बड़े नेता तो खुश हैं लेकिन जमीन पर काम करने वाले कांग्रेसी जो चुनाव लड़ने का मन बनाये हुए थे, उनमें हताशा घर कर गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर खुद भी स्वीकारते हैं कि गठबंधन से कार्यकर्ता निराश होते हैं।

  5. चुनाव आते ही मुस्लिमों को दिखाया जाने लगा भाजपा ''भय''

    चुनाव आते ही मुस्लिमों को दिखाया जाने लगा भाजपा ''भय''

    भाजपा से भयभीत मुसलमानों का आज तक न तो कांग्रेस कोई भला कर पाई है और न ही सपा−बसपा जैसे क्षेत्रीय दलों ने कुछ ऐसा किया है जिससे हिन्दुस्तान के मुसलमानों का उद्धार हुआ हो। फिर भी मुसलमान इन दलों के पीछे हाथ बांधे खड़ा रहता है।

  6. सपाई दंगल में कौन जीता, कौन हारा का फैसला करना मुश्किल

    सपाई दंगल में कौन जीता, कौन हारा का फैसला करना मुश्किल

    किसी की छवि में उतार−चढ़ाव हुआ करता है लेकिन रिश्ते नहीं बदला करते। अखिलेश के पिता मुलायम सिंह हैं, तो सगे चाचा शिवपाल ने भी उन्हें गोद में खिलाया है। कैसे कहा जाए कौन जीता कौन हारा।

  7. 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में नोटबंदी ही है अहम मुद्दा

    5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में नोटबंदी ही है अहम मुद्दा

    चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम घोषित करने के साथ ही पांच राज्यों में चुनावी बिगुल बज गया है। वैसे देखा जाए तो इसे 2019 के लोकसभा चुनाव का पूर्वाभ्यास भी कहा जा सकता है हालांकि इसे लोकसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा है।