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कल तक जिस दिल्ली पर इतराते थे आज वहाँ दम घुटने लगा है

By मनोज झा | Publish Date: Nov 9 2017 12:58PM
कल तक जिस दिल्ली पर इतराते थे आज वहाँ दम घुटने लगा है
Image Source: Google

ना कोई समंदर तट, ना कोई ऊंचे पहाड़ लेकिन फिर भी देश की राजधानी दिल्ली हमें आकर्षित करती थी। लेकिन आज हम सभी को इस दिल्ली में रहने की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार दिल्ली में आज सांस लेना मुश्किल हो रहा है। पिछले दो-तीन दिनों से दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इस कदर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है कि लोग डर के मारे घरों से बाहर निकलना नहीं चाहते। दिल्ली-एनसीआर में जानलेवा स्मॉग के चलते लोगों की जिंदगी खतरे में है।

 
स्मॉग की वजह से राजधानी के कई इलाकों में हवा जहरीली हो चुकी है...मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो यहां तक कह डाला कि दिल्ली गैस चैंबर बन चुकी है। दिल्ली में प्रदूषण से लोगों की जिंदगी को खतरा है ये तो सरकार मान रही है लेकिन इसका इलाज किसी के पास नहीं है। बताया जा रहा है कि पंजाब और हरियाणा में खेतों में जलाई जा रही पराली के चलते दिल्ली का ये हाल हुआ है। दिल्ली के आसमान में इस तरह की धुंध पहली बार देखने को नहीं मिल रही...पिछले कई सालों से दिल्ली का यही हाल है।
 
पहले कुछ लोग दिल्ली में प्रदूषण के लिए दिवाली पर आतिशबाजी को भी जिम्मेदार ठहराते थे, लेकिन इस बार पटाखों की बिक्री पर रोक के बावजूद दिल्ली की हवा जहरीली हो चुकी है। स्मॉग का सबसे ज्यादा प्रभाव दिल्ली के लोगों की स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। अस्थमा के मरीजों के लिए ऐसे समय में बाहर निकलना किसी खतरे से कम नहीं। दिल्ली की स्थिति किस कदर खराब हो चुकी है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजधानी में कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार पहुंच गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मानें तो इसकी बड़ी वजह पंजाब और हरियाणा से आने वाली हवाएं हैं। 
 
दिल्ली को प्रदूषण के प्रकोप से बचाने के लिए केजरीवाल सरकार ने ऑड-ईवन नंबर का फॉर्मूला निकाला था, ऑड-ईवन के दौरान दिल्ली की सड़कों पर गाड़ियां तो कम हुईं लेकिन इससे प्रदूषण में कोई कमी नहीं आई। तो क्या हम दिल्लीवासियों को अब मास्क लगाकर बाहर निकलना होगा, हमारे बच्चों का क्या होगा? डॉक्टरों के मुताबिक जब प्रदूषण फेफड़ों पर असर डालना शुरू करता है तो ये काफी घातक साबित हो सकता है खासकर छोटे बच्चों के लिए। क्या इस बारे में किसी ने सोचा है। केंद्र की सरकार हो या फिर दिल्ली सरकार दोनों को आपसी लड़ाई से ही फुर्सत नहीं ...ऐसे में हम दिल्लीवालों की रक्षा कौन करेगा?
 
हम दिल्लीवाले ईमानदारी से अपना टैक्स भरते हैं...अगर सिर्फ इनकम टैक्स की बात करें तो 2014-15 में सरकारी खजाने में दिल्ली के लोगों ने 91 हजार 247 करोड़ रुपए भरे थे। सवाल उठता है कि जब ईमानदारी से कर चुकाते हैं तो फिर हमारा ध्यान क्यों नहीं रखा जाता? दिल्ली में प्रदूषण को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत भी अपनी चिंता जाहिर कर चुकी है लेकिन अफसोस दिल्ली की हवा को स्वच्छ बनाने के लिए कभी किसी सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। कल तक हम जिस दिल्ली पर इतराते थे .....आज उसी दिल्ली में हमारा दम घुटने लगा है...लेकिन हमारी सुनने वाला कोई नहीं।
 
मनोज झा
(लेखक एक टीवी चैनल में वरिष्ठ पत्रकार हैं।)