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स्तंभ

उमर फैयाज के ''आखिरी खत'' का जवाब है किसी के पास?

By तरुण विजय | Publish Date: May 15 2017 1:26PM
उमर फैयाज के ''आखिरी खत'' का जवाब है किसी के पास?

अब कुछ अच्छा नहीं लगता। आपकी प्रशंसा, प्रगति के बड़े-बड़े कार्य, एक व्यक्ति, एक पार्टी के विरुद्ध थके हारे हुओं का मरियल गठबंधन। आपकी राजनीति, आपकी कूटनीति, आपकी दम्भोक्तियां। जबसे श्रीनगर से लौटा हूं हर जगह, हर पल, वह जवान मेरा पीछा करता आ रहा है जिसकी आंखों में कुछ सवाल हैं। वे सवाल मुझे दिखते हैं, पर मैं देखना नहीं चाहता। वे सवाल मेरे मन को मथते हैं, पर मैं जवाब दे नहीं सकता। वे सवाल मुझे समझ में नहीं आते हैं पर मैं कहना चाहता हूं कि मुझे कुछ नहीं पता, मुझसे वे सवाल मत पूछो।

मैं सवालों से दूर संसद से जंतर-मंतर पहुंचता हूं। वह जवान मेरे साथ, धैर्य और शांति से पग बढ़ाते हुए आता रहता है। जंतर-मंतर पर भिन्न-भिन्न लोगों का हुजूम है। शांति, अशांति, आक्रामक, तीखे तेवर वाले, किसानों मजूदरों की समस्याएं, अध्यापकों, गृह विहीनों के दुख, हिंसा की शिकार महिलाएं, बच्चे और दलित, शांत निर्विकार भाव से धरने पर बैठे रंगकर्मी, पूरा भारत अपनी शिकायतों के समाधान के लिए यहां बैठा है। उनके बीच से गुजरते हुए मैं आगे बढ़ता हूं तो वह जवान फिर मेरे सामने आ जाता है। वह कहता कुछ नहीं।
 
पर उसकी आंखों में सवाल हैं।
 
नदियों को सूखने से बचाने और किसानों की आत्महत्याएं रोकने की मांग वाले बड़े-बड़े बैनरों से बचते हुए मैं इंडिया इंटरनेशनल विमर्श के स्थल पहुंच भुने हुए पारसी शैली के सैण्डविच, ठंडी कॉफी मंगवा कर कुछ राहत लेना चाहता हूं। उस जवान के सवाल मुझे परेशान न करें, इसलिए बेतरतीब बिखरे कुछ अखबार उठा लेता हूं। लेकिन वह इतने शांत, निर्विकार भाव से प्रश्न पूछ रहा था कि मैं साहस न बटोर पाया। वह उन खबरों को देख रहा था जहां मेरा ध्यान था- प्रियंका चोपड़ा की नई ग्लैमरस ड्रेस, रोहित वेमुला युवा संगठन का रास्ता रोको अभियान, एक व्यक्ति या एक पार्टी के विरुद्ध देश के तमाम राजनीतिक दलों की एकजुटता और गठबंधन किसी वीवीआईपी सास को मिली अतिरिक्त सुरक्षा, गौरक्षकों द्वारा कानून हाथ में लेने पर सेकुलर दलों का आक्रोश, पहलू खान की निर्मम पिटाई और मृत्यु पर 23 पूर्व आईएएस अफसरों द्वारा पहली बार एकजुटता दिखाते हुए राजस्थान की मुख्यमंत्री को कड़ा पत्र।
 
इनमें कहीं भी उस जवान का जिक्र नहीं था, जिसकी हत्या के बाद उसका सर काट दिया गया। इसमें लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की मां या बहन का भी कोई विवरण नहीं था, जो भारतीय सेना में अभी-अभी भर्ती हुआ था, अधिकारी बना था, 23 साल का सुंदर सजीला रणबांकुरा था, और अपने दोस्त की शादी में शरीक होने गया था कि जिहादी इस्लामी आतंकवादियों ने उसका अपहरण कर हत्या कर दी।
 
इन बातों के लिए गुस्सा, आक्रोश व्यक्त करने के लिए उन पत्रकारों तथा मानवाधिकारवादियों के पास समय नहीं जो इंडिया गेट या राजघाट पर गो-भरण के पक्ष में आंदोलन प्रदर्शन करते हैं।
 
ये सैनिक किसके लिए जीते हैं और किसके लिए शहादत देते हैं? दादरी में एक गो-रक्षा गो-भक्षण जैसे किसी मामले में एक कांड हुआ था तो दिल्ली और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री वहां दौड़े गए थे।
 
उमर फैयाज किसका बेटा था? किसे उस पर कायराना हमले से वेदना हुई? इतनी भयानक गर्मी में वह जवान मेरे पीछे आता गया। हो सकता है अब बैरक में वापस चला गया हो। क्या उनकी बैरकों में एसी होता है? हुंह, मुझे क्या! वे तो बिना एसी की बैरकों और बंकरों में रहने की ही तो तनखा पाते हैं। गोलियां खाना तो उनकी सेवा शर्तों में शामिल होता है। वह मेरी समस्या नहीं।
 
झुलसती गर्मी से बचने के लिए शावर तले नहाया, एसी चलाया और उमर का खत पढ़ने लगा। लिखा था-- मेरे दोस्त और मैंने घर छोड़ा था अठारह की उम्र में, तुमने जीईई की परीक्षा पास की, मैंने एनडीए की परीक्षा दी। मुझे सैनिक अफसर बनना था, तुम डिग्रियां लेते गए। तुम्हें खिताब मिले, मेरे कंधों पर रैंक जुड़ते गए। तुम्हें सर्वश्रेष्ठ कमाई की कम्पनी मिली, मुझे सर्वश्रेष्ठ पराक्रम वाली पल्टन मिली। तुम्हारे परिवार का हर सदस्य तुमझे मिलने आता था, मैं तरसता था शायद जल्दी ही मैं अपने बूढ़े माता-पिता से मिल पाऊं। तुम दीवाली, होली पटाकों और पिचकारियों से मनाते थे, हम गोलियों के बीच खून की धाराओं से नहाते थे। तुम्हारी शादी हो गयी, तुम्हारी पत्नी तुम्हारे साथ दुनिया घूम आयी, मैं अपनी बहन से राखी बंधवाने भी शायद कभी जा पाया। हम दोनों घर लौटे, हम दोनों का हमारे घरवालों ने स्वागत किया- तुम अपनी गाड़ी से दमदमाते उतरे तो मेरे लिए बैंड बाजे बजे। मेरा शव तिरंगे में लिपटा आया तो हवा में लहराती बंदूकों ने सलामी दी।''
 
मेरे दोस्त।
 
हम दोनों ने अठारह साल की उम्र में घर छोड़ा था।
 
उमर का यह खत हम सबसे सवाल पूछ रहा है। आपके पास जवाब है?
 
- तरुण विजय