Prabhasakshi
गुरुवार, जनवरी 18 2018 | समय 05:34 Hrs(IST)

स्तंभ

'मेरे पास माँ है' संवाद अभिनेता शशि कपूर को अमर बना गया

By विजय शर्मा | Publish Date: Dec 5 2017 1:42PM
'मेरे पास माँ है' संवाद अभिनेता शशि कपूर को अमर बना गया

फ़िल्म अभिनेता शशि कपूर के निधन से फिल्म जगत का मजबूत स्तम्भ टूट गया है। शशि कपूर फिल्म जगत के मजबूत स्तम्भ ही नहीं बल्कि कला का चलता-फिरता संग्रहालय थे। जिसने भी उनके निधन की खबर सुनी स्तब्ध रह गया। हालांकि फिल्म जगत से वह अपनी पत्नी के निधन के बाद से ही दूरी बनाये हुए थे और अपने पारिवारिक सदस्यों, रिश्तेदारों और बहुत करीबी दोस्तों से ही बात करते थे लेकिन फिल्म हिन्दी फिल्म जगत का ऐसा कोई सितारा नहीं है जो उनकी अदाओं और कलाकारी का दीवाना न हो। शशि कपूर की रोमांटिक अंदाज और पुलिस इंस्पेक्टर के रूप में उनकी भूमिकाएं इतनी संजीदा होती थीं कि लगता ही नहीं था कि वह अभिनय कर रहे हैं। शशि कपूर का जन्म 18 मार्च 1938 को हुआ था। वह हिन्दी फ़िल्मों में लोकप्रिय कपूर परिवार के सदस्य हैं। वर्ष 2011 में उनको भारत सरकार ने पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया था। वर्ष 2014 में उनको दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया था। इस तरह से वह अपने पिता पृथ्वीराज कपूर और बड़े भाई राजकपूर के बाद यह सम्मान पाने वाले कपूर परिवार के तीसरे सदस्य थे। 60 और 70 के दशक में शशि कपूर ने जब-जब फूल खिले, कन्यादान, शर्मीली, आ गले लग जा, रोटी कपड़ा और मकान, चोर मचाए शोर, दीवार कभी-कभी और फकीरा जैसी कई फिल्में में काम किया है। उन्हें कपूर खानदान में हैंडसम कपूर कहा जाता था।

शशि कपूर हिंदी फिल्म जगत के बेहतरीन अभिनेता रहे हैं और इनका नाम बलबीर राज कपूर था लेकिन फिल्मों में इन्होंने शशि कपूर के नाम से एंट्री की थी। फिल्मी परिवार से सम्बन्ध होने के कारण शशि कपूर शशिराज नाम से बाल कलाकार के रूप में काम करते थे। चार साल की उम्र में शशि कपूर ने पृथ्वीराज कपूर द्वारा बनाए जाने वाले नाटकों और फिल्मों में काम करना शुरु किया था और संग्राम, दाना पानी में उन्होंने शशिराज नाम से काम किया था। आग फिल्म में उनके चाइल्ड कैरेक्टर को सबसे ज्यादा पसंद किया गया था। शशि कपूर ने मुंबई के डॉन बॉस्को स्कूल में पढ़ाई की और कलकत्ता में वो अंग्रेजी फिल्मों की अभिनेत्री जेनिफर से मिले और कुछ ही मुलाकातों में दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया और बाद में इन्होंने उनसे शादी कर ली थी।
 
शशि कपूर के तीन बच्चे कुणाल कपूर, करन कपूर और संजना कपूर हैं। 5 नवंबर 1978 को शशि कपूर और जेनिफर ने मिलकर पृथ्वी थियेटर का निर्माण किया और उसके जरिए थियेटर के जरिए कला को बढ़ावा दिया। शशि कपूर ने अपने कॅरियर की शुरुआत 1961 में फिल्म धर्मपुत्र से की थी और राखी, शर्मिला टैगोर, जीनत अमान और नंदा के साथ इनकी जोड़ी खूब हिट रही है। अमिताभ बच्चन के साथ उन्होंने कई शानदार फिल्में की हैं और इनकी जोड़ी खूब हिट हुई। अमिताभ ने एक बार बताया था कि सात फिल्में फ्लॉप होने के बाद वह मुंबई से वापस लौटना चाहते थे तभी मनोज कुमार ने उन्हें फिल्म 'रोटी कपड़ा और मकान' में रोल ऑफर किया। यही वह वक्त था, जब उनकी मुलाकात शशि कपूर से हुई थी। अमिताभ बच्चन और शशि कपूर ने एक साथ करीब 12 फिल्मों में काम किया है। पहली फिल्म रोटी, कपड़ा और मकान हिट रही थी।
 
अमिताभ ने अपने एक ब्लॉग में खुलासा किया है कि 1975 में 'दीवार' की रिलीज के बाद से वे हर जन्मदिन पर शशि कपूर को फोन कर बधाई देते हैं। 1984 में शशि की पत्नी जेनिफर की मौत हुई तो उन्होंने लोगों से घुलना-मिलना बिल्कुल बंद कर दिया था लेकिन तब भी शशि कपूर अमिताभ से बात जरूर करते थे। दीवार फिल्म में अमिताभ बच्चन और शशि कपूर ने भाई का किरदार निभाया था। यह फिल्म अमिताभ और शशि के कॅरियर का मील का पत्थर साबित हुई थी। इसके अलावा दोनों ने कभी-कभी, नमक हलाल, सिलसिला, दो और दो पांच जैसी फिल्में की थीं। शशि कपूर ने हिंदी  के अलावा अंग्रेजी फिल्में दि हाउसहोल्डर, शेक्सपीयर वल्लाह, दि डिसीवर्स, साइड स्ट्रीट, प्रीटी पोली में भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। शशि कपूर ने 1996 में टीवी सीरीज गुलीवर्स ट्रेवल में भी काम किया और इस टीवी शो को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। शशि कपूर ने 80 के दशक में फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा था और जुनून, कलियुग, 36 चौरंगी लेन, विजेता, उत्सव जैसी फिल्मों का निर्माण किया लेकिन यह फिल्में असफल हुईं पर कला के प्रति उनका समर्पण बरकरार रहा और उनके जाने से फिल्म जगत का एक महान स्तम्भ टूट गया है।
 
- विजय शर्मा