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बढ़ती बेरोजगारी और किसान आत्महत्या मोदी सरकार की विफलता

बढ़ती बेरोजगारी और किसान आत्महत्या मोदी सरकार की विफलता

26 मई को मोदी सरकार के तीन साल पूरे हो रहे हैं। 3 साल यानि 36 महीने। प्रधानमंत्री बनने से पहले चुनावी सभाओं में मोदी ने एक नारा दिया था...आपने उन्हें (कांग्रेस) 60 साल दिए हमें 60 महीने दो। तो अब मोदी सरकार के पास सिर्फ 24 महीने बचे हैं..उन सभी वादों को पूरा करने के लिए जो देश की जनता से किये गये थे।

अगर मोदी के 3 साल के कामकाज पर गौर करें...तो अब तक कई ऐसे काम हुए हैं जिसे लेकर बीजेपी अपनी पीठ थपथपा सकती है। उज्ज्वला योजना, मुद्रा लोन, फ़सल बीमा योजना, स्वच्छ भारत अभियान, अटल पेंशन योजना...सरकार के लिए लोगों को बताने के लिए बहुत कुछ है। लेकिन मोदी सरकार अब भी कई मोर्चे पर पिछड़ती दिखाई दे रही है। हम बुलेट ट्रेन की बात नहीं कर रहे...ना ही नमामि गंगे परियोजना की। मेरी समझ में मोदी सरकार अपने 3 साल के कार्यकाल में जिस एक मोर्चे पर विफल रही है वो है बेरोजगारी का मुद्दा। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में भारत में बेरजोगरों की संख्या 1.77 करोड़ से बढ़कर 1.78 करोड़ होने की आशंका है...यानि इस साल देश में 10 लाख बेरोजगार और बढ़ जाएंगे।
 
एक रिसर्च के मुताबिक देश में हर साल 30 लाख से ज्यादा युवा ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री हासिल करते हैं...लेकिन इनमें से ज्यादातर युवा बेरोजगार रह जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में 20 से 24 साल के 25 फीसदी युवी बेरोजगार हैं...25 से 29 साल के 17 फीसदी नौजवानों के पास नौकरी नहीं है। आपको बता दें कि सत्ता में आने से पहले बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में हर साल  2 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था...लेकिन खुद मोदी सरकार के आंकड़े बताते हैं कि देश में बेरोजगारी दर बढ़कर अब 5 फीसदी हो गई है।
 
बेरोजगारी के बाद दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा किसानों की खुदकुशी का है...राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक 2014 में 5650 और 2015 में 8007 किसानों ने खुदकुशी की। पिछले साल नवंबर तक किसानों की खुदकुशी के 200 से ज्यादा मामले सामने आए। मोदी सरकार ने यूपी में कर्जमाफी कर वहां के 55 लाख किसानों का तो भला कर दिया...लेकिन देश के बाकी राज्यों का क्या होगा?
 
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी हमें पिछले 3 सालों में कुछ ज्यादा सुधार देखने को नहीं मिला...वैसे शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देना राज्य सरकारों की भी जिम्मेदारी बनती है...लेकिन गैर बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री केंद्र से मदद नहीं मिलने की बात कह अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लेते हैं।
 
अगर सरकारी आंकड़ों की बात करें तो देश में हर 1681 मरीज पर एक डॉक्टर उपलब्ध है। मोदी सरकार ने देश में डॉक्टरों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 65 साल तो कर दी लेकिन भारत में अब भी 5 लाख डॉक्टरों की कमी है। ग्रामीण इलाकों में अस्पतालों में किस कदर बदहाली है इसकी तस्वीरें रोज सामने आती हैं...एंबुलेंस के अभाव में कहीं कोई पिता बेटे के शव को कंधे पर ले जाता दिखता है ...तो कहीं अस्पताल में स्ट्रेचर नहीं होने पर मरीज को उसके परिजन घसीटते हुए ऑपरेशन थियेटर ले जाते हैं।
 
ये बात सही है कि आजादी के बाद देश में सबसे ज्यादा शासन कांग्रेस का रहा। अभी मोदी सरकार को सत्ता में आए 3 साल ही हुए हैं...लेकिन मोदी जी ने खुद लोकसभा चुनाव से पहले लोगों को अच्छे दिन का सपना दिखाया था। मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, बुलेट ट्रेन, 'स्टार्ट अप इंडिया' योजना ये सभी कानों को सुनने में अच्छे लगते हैं...लेकिन पहले युवाओं को बेरोजगारी से मुक्ति चाहिए...किसानों को साहूकारों से छुटकारा और आम जनता को बुलेट ट्रेन की जगह सस्ती रेल सेवा।
 
डायनैमिक फेयर के नाम पर रेलवे राजधानी समेत कुछ ट्रेनों में यात्रियों की जेब काटकर जिस तरह मुनाफा कमाने में लगी है उससे मध्यम वर्ग काफी नाराज है। सुरेश प्रभु ने ऐसी कृपा की है कि अब मेरे जैसा आदमी भी राजधानी में सेकेंड एसी में सफर करने से पहले दो बार सोचता है। 
 
सरकार की ओर से जारी आर्थिक सर्वे की मानें तो 2016-17 में भारत की जीडीपी 7 फ़ीसदी से बढ़कर 7.75 फ़ीसदी पहुंच सकती है। लेकिन वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में भारत की विकास दर 7 फीसदी रहने का अनुमान है। ये बात सही है कि मोदी को घोटालों में घिरी विरासत मिली थी, नई सरकार के लिए धीमी विकास दर और महंगाई से निपटना आसान नहीं था। लेकिन मोदी ने खुद देश की गरीब जनता से अच्छे दिन लाने का वादा किया था। अभी सरकार के पास 2 साल का समय बचा है...2 साल कम नहीं होता, जो प्रधानमंत्री नोटबंदी जैसा बड़ा फैसला ले सकता है वो आम जनता की बेहतरी के लिए और भी कड़े कदम उठा सकता है। 
 
मनोज झा
(लेखक टीवी चैनल में वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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