Prabhasakshi
मंगलवार, दिसम्बर 12 2017 | समय 04:06 Hrs(IST)

स्तंभ

अमेरिका में बंदूक रखने का हक ज्यादा जरूरी है या फिर जिंदा रहने का

By मनोज झा | Publish Date: Oct 5 2017 12:05PM
अमेरिका में बंदूक रखने का हक ज्यादा जरूरी है या फिर जिंदा रहने का

दुनिया भर में अपनी आलीशान जीवन शैली के लिए मशहूर अमेरिका के लास वेगास शहर को रविवार रात एक हथियारबंद हमलावर ने मातम में बदल दिया। लास वेगास के एक होटल में चल रहे म्यूजिक कॉन्सर्ट में सनकी हमलावर ने जो खूनी खेल खेला उसे अमेरिका के लोग कभी नहीं भुला पाएंगे। हमलावर ने अंधाधुंध फायरिंग कर एक झटके में 58 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। ऑटोमेटिक राइफल से लैस हमलावर ने करीब 200 राउंड फायरिंग की जिसमें 500 से ज्यादा लोग घायल हो गए। वैसे बाद में चारों ओर से घिरने के बाद हमलावर ने खुद को गोली मार ली लेकिन गोलीबारी में जिस बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या हुई उससे समूचा देश हिल उठा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मृतकों के प्रति संवेदना जताते हुए पूरी घटना को राक्षसी कृत्य तो करार दिया लेकिन लास वेगास में हुई वारदात ने अमेरिका के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इस खूनी वारदात के बाद अमेरिका में एक बार फिर गन कंट्रोल को लेकर बहस छिड़ गई है। वैसे लास वेगास में हुई घटना के लिए कहीं न कहीं अमेरिका का वो कानून भी जिम्मेदार है जिसने अपने नागरिकों को खुलेमाम हथियार रखने का अधिकार दिया है। अमेरिका में हर नागरिक को अपनी सुरक्षा के लिए बंदूक रखने का मौलिक और संवैधानिक अधिकार मिला हुआ है। लेकिन अब लास वेगास की घटना के बाद वहां के लोग यही पूछ रहे हैं कि बंदूक रखने का हक ज्यादा जरूरी है या फिर जिंदा रहने का।
 
अमेरिका में हर साल कोई न कोई सनकी हमलवार खून की होली खेलता है ...कभी किसी स्कूल में तो कभी किसी चर्च में। निर्दोष लोगों की हत्या पर हर बार श्रद्धांजलि सभा होती है और फिर लोग अपने काम में लग जाते हैं। 
 
अमेरिका में गन कल्चर किस कदर हावी है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वहां हर साल करीब 55 लाख निजी हथियारों का उत्पादन होता है जिसमें से 95 फीसदी हथियार अमेरिकी बाजार में ही बेचे जाते हैं। दुनिया की 5 फीसदी आबादी वाले देश अमेरिका में 89 फीसदी लोगों के पास बंदूक है। एक सर्वे में अमेरिका की 66 फीसदी आबादी ने माना कि उनके पास एक से ज्यादा बंदूक है। रिपोर्ट के मुताबिक दो-तिहाई अमेरिकी अपनी रक्षा के लिए बंदूक खरीदते हैं। यानि अमेरिका में बंदूक रखना उतना ही आसान है जैसे भारत में लाठी-डंडा रखना। अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन का कहना था कि अमेरिकी नागरिक को खुद और देश की रक्षा के लिए बंदूक रखना जरूरी है लेकिन घरों में बंदूक रखने का शौक एक दिन अमेरिकी समाज के लिए खतरा पैदा हो जाएगा ये किसी ने नहीं सोचा था।
 
सवाल उठता है कि आखिर जिस देश में कानून-व्यवस्था चाक-चौबंद हो वहां लोगों को हथियार रखने की जरूरत क्यों पड़ती है? अमेरिका में बंदूक संस्कृति को उसके पुराने इतिहास से जोड़कर देखा जा सकता है। अगर इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो कभी ब्रिटेन के उपनिवेश रहे अमेरिका में आजादी की लड़ाई के लिए लोगों ने बंदूक उठाई थी। देश को आजाद कराने में बंदूक की इसी भूमिका ने बाद में वहां हथियार रखने को गौरव का विषय बना दिया।
 
आपको बता दें कि तीन साल पहले कनेक्टिकट के न्यूटॉउन में ऐसी ही हिंसा में जान गंवाने वाले 20 स्कूली छात्रों की याद में आयोजित कार्यक्रम में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के आंसू छलक आए थे। लेकिन अमेरिका की ताकतवर बंदूक लॉबी के आगे ओबामा भी बेबस नजर आए। अमेरिका में हुए पिछले चुनाव में ये एक बड़ा मुद्दा था। डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन अपने देश में हथियारों की खरीद पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में थीं लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने गन कंट्रोल नीति का विरोध किया था। वैसे ट्रंप ने स्कूल, कॉलेज जैसे जगहों को गन फ्री जोन बनाने पर जोर दिया था। आज अमेरिका में हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि लास वेगास की घटना के बाद डेमोक्रेट और रिपब्लिकन एक मंच पर आकर अमेरिकी संसद में गन राइट को नियंत्रित करने वाला कोई कानून बना पाएंगे या नहीं? अमेरिका में चुनाव के समय गन लॉबी राजनीतिक दलों को लाखों डॉलर का चंदा देती है और यही कारण है कि वहां के सांसद चाहकर भी उनके खिलाफ आवाज नहीं उठाते।
 
मनोज झा
(लेखक एक टीवी चैनल में वरिष्ठ पत्रकार हैं)