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पर्रीकर की चिंता वाजिब, समाज को इस पर विचार करना चाहिए

By संजय तिवारी | Publish Date: Feb 12 2018 11:07AM
पर्रीकर की चिंता वाजिब, समाज को इस पर विचार करना चाहिए
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युवा संसद। युवा महोत्सव। युवा सम्मलेन। युवा दिवस। युवा मंच। युवा वार्ता। युवा संवाद। फिर नारी सशक्तिकरण। नारी मंच। नारी उत्थान। नारी मुक्ति। नारी शक्ति। प्रायः रोज ही देश में युवा समुदाय और नारी खासकर युवा बालिकाओं के लिए ऐसे मंच सजते रहते हैं। युवाओं के लिए बड़ी बातें होती रहती हैं। केंद्र से लेकर राज्य सरकारें तक युवाओं और बालिकाओं के लिए अपनी चिंता का इजहार करती रहती हैं। सब देख सुन कर ऐसा लगता है जैसे देश वास्तव में युवाओं और बालिकाओं को लेकर बहुत चिंतित है। देश के केंद्र में युवाओं और बालिकाओं की यह उपस्थिति बहुत सुकून देने वाली लगती है। शिक्षा परिसरों में पहुंच कर बड़े बड़े व्याख्यान देते और युवा समुदाय को आकर्षित करते राजनेताओं और बुद्धिजीवियों को देखा जा सकता है। युवा शक्ति, नारी शक्ति और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे नारों की गूँज से शायद ही कोई कोना  छूटा हो। लेकिन इन्हीं सब के बीच गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की एक ईमानदार चिंता एक दहकता अंगार बन कर सामने आयी है। समय की मांग है कि मनोहर पर्रिकर की इस चिंता में सभी शरीक हों। 

दरअसल हालात ऐसे हो चुके हैं कि गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर को लड़कियों की चिंता सताने लगी है। उन्हें इस बात से डर लगने लगा है कि लड़कियों ने बियर पीना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, 'मुझे डर लगने लगा है, क्योंकि अब तो लड़कियों ने भी बियर पीना शुरू कर दिया है, सहन शक्ति की सीमा टूट रही है।' मनोहर पर्रीकर ने राज्य विधानमंडल विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले राज्य युवा संसद को संबोधित करते हुए कहा कि ड्रग्स लेना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने वहां मौजूद लोगों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि मैं सभा की इस भीड़ की बात नहीं कर रहा। पर्रीकर ने अपने छात्र जीवन की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जब मैं आइआइटी में था तो वहां एक समूह था जो गांजे का नशा करता था, तो यह कोई नहीं घटना नहीं है। कुछ छात्रों पर अश्लील फिल्मों का जुनून सवार था। राज्य में नशीले पदार्थों के होने वाले व्यापार के बारे में उन्होंने कहा कि अपराधियों की धर-पकड़ लगातार जारी है और ये तब तक जारी रहेगा जब तक ये पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता। हालांकि मुझे विश्वास नहीं है कि ये पूरी तरह से खत्म हो पाएगा। पर्रीकर ने कहा, 'मुझे व्यक्तिगत स्तर पर इस बात का विश्वास है कि कॉलेज में नशीले पदार्थों का प्रसार बहुत ज्यादा नहीं है।' उन्होंने कहा कि जब से पुलिस को नशीले पदार्थों का व्यापार करने वालों को पकड़ने के आदेश दिए गए हैं तब से करीब 170 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
 
वास्तव में यह चिंता अब समाज को ही करनी होगी। शराब और नशे की दुकानों को सभी ने देखा ही है। रोज ही देखते भी हैं। ऐसा कभी संभव नहीं कि किसी युवा या किशोर को शराब या नशा खरीदने से किसी ने मना किया हो या रोका हो। ऐसी कोई व्यवस्था हमारे समाज में बनी ही नहीं। सरकार के लिए शराब केवल कमाई के जरिये के रूप में है। हर शाम शराब की दुकानों पर उमड़ने वाली भीड़ सरकार के लिए आती है लेकिन इसका समाज पर क्या असर हो रहा है इससे सरकार का क्या कोई दायित्व नहीं बनता ? 
 
- संजय तिवारी