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यूपी में योगी ने बदल दिया माहौल, 21 फरवरी से जुटेंगे निवेशक

By डॉ. आशीष वशिष्ठ | Publish Date: Feb 8 2018 11:53AM
यूपी में योगी ने बदल दिया माहौल, 21 फरवरी से जुटेंगे निवेशक
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उत्तर प्रदेश में निवेश जुटाने के लिए राज्य सरकार की ओर से 21 और 22 फरवरी को यूपी इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन होने वाला है। इन्वेस्टर्स समिट के लिए नवाबों की नगरी लखनऊ को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। लखनऊ के मुख्य मार्गों से गुजरते वक्त इनवेस्टर्स समिट की तैयारियों को महसूस किया जा सकता है। यूपी में निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए जिस तरह का माहौल योगी सरकार में दिख रहा है, वो पिछले दो दशकों में दिखाई नहीं दिया। इन्वेस्टर्स समिट की संजीदा व भव्य तैयारियों को देखकर ऐसा महसूस हो रहा है कि यूपी में उद्योग के लिए माहौल बना है। बदले माहौल की महक देश-दुनिया में महसूस की जा रही है। वास्तव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड का गठन प्रदेश में औद्योगिक माहौल बनाने में काफी कारगर साबित हो रहा है। औद्योगिक रूप से अभी तक प्रदेश काफी पिछड़ा माना जाता रहा है। इसकी कई वजह थी, लेकिन अब स्थितियां बदली हैं।

योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही यूपी में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रयास शुरू कर दिया था। इसी क्रम में पहले नई औद्योगिक नीति लाई गई। फिर 13 कॉमर्शियल कोर्ट की स्थापना की घोषणा की गई। इसके बाद राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड के गठन किया गया और अब विभिन्न राज्यों में रोड शो हुआ। कुल मिलाकर निवेश का शानदार माहौल लगभग तैयार किया जा चुका है। इनवेस्टर्स समिट के जरिए निवेशकों की उत्तर प्रदेश में रुचि बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। उनका मकसद वर्ष 2022 तक रक्षा, टेक्सटाइल्स, रेल और कोयला जैसे बड़े मंत्रालयों की मदद से राज्य में पांच लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश और 20 लाख रोजगार सृजन के लक्ष्य को प्राप्त करना है। 
 
इस समिट का मकसद योगी सरकार की औद्योगिक नीति को विश्वव पटल पर पेश करना है। इस इनवेस्टर्स समिट में उस देश के निवेशक ज्यादा होंगे, जहां भारतीय ज्यादा होंगे। इन देशों में मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद टैबेको, फिजी, गुयाना, भूटान हैं। इनके अलावा यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और एशियाई देशों के निवेशकों को भी बुलाया जा रहा है। यूपी में उद्यमी युवाओं को किसान कर्जमाफी की तर्ज पर मुद्रा योजना द्वारा ऋण उपलब्ध कराने की योजना बन रही है। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, ईस्टर्न डेडीकेटेड कॉरीडोर के किनारे डेयरी, फिश फॉर्मिंग, फूड प्रॉसेसिंग यूनिट्स लगाने के लिए इनवेस्टर्स को बुलाया गया है। 
 
इसमें कोई दो राय नहीं है कि यूपी की कानून व्यवस्था, लाल फीताशाही, भ्रष्टाचार और सरकारी विभागों की लचर प्रणाली ने निवेश को पिछले दो दशकों में निरूत्साहित करने का ही काम किया है। पहले निवेशक यूपी में नहीं आना चाहते थे। निवेशक यूपी की छवि खराब मानते थे। कहा कि कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश की छवि बहुत खराब हुई है। यूपी को अपराध के लिए जाना जाता था। अपहरण और भ्रष्टाचार को लेकर यूपी डिस्कस किया जाता था। अब यूपी का माहौल अच्छा है इसलिए निवेशक यूपी में निवेश करने में दिलचस्पी ले रहे हैं। सूबे में जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तब से विकास कार्यों ने तो तेजी पकड़ी ही है। वहीं कानून व्यवस्था के बिगड़े हालातों पर भी तेजी से काबू पाने के प्रयास तेज हुए हैं। योगी सरकार प्रदेश में निवेश बढ़ाने को लेकर पहले दिन से गंभीर है। एक साल की मेहनत का प्रयास इन्वेस्टर्स समिट के रूप में सामने है।
 
इन्वेस्टर्स समिट के लिए प्रदेश सरकार ने नई दिल्ली, बैंगलोर, हैदराबाद, अहमदाबाद, मुम्बई और  कोलकाता में रोड शो आयोजित किये गये। मुंबई रोड शो के एक रोज पहले उत्तर प्रदेश डेवलेपमेंट फोरम का सम्मेलन हुआ। इसमे सरकार की ओर से औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना ने निवेशकों की सुरक्षा और सम्मान की गारंटी का भरोसा निवेशकों को दिया। वही प्रवासी निवेशकों की जो भी दिक्कतें हैं सरकार उसे दूर करने के लिए संकल्पबद्व दिख रही है। प्रदेश में 15 नए एयरपोर्ट बन रहे हैं। सरकार सिंगल विंडो और इज ऑफ डूइंग बिजनेस पर फोकस कर रही है। योगी सरकार की नीतियों और कार्याप्रणाली से उत्तर प्रदेश के प्रति लोगो का नजरिया बदला है।
 
प्रदेश की कमान संभालने के बाद से योगी सरकार ने उद्योगों की सुध लेनी शुरू की है। आगरा में 13.15 करोड़ रुपये की लागत से टेस्टिंग लैब तथा डिजायनिंग इंस्टीट्यूट बनाने का फैसला सरकार ने लिया है। वास्तव में बने बनाये ढर्रे पर चल रहे आगरा के चमड़ा उद्योग को वैश्विक स्तर पर गति देने के लिए प्रदेश सरकार खास कदम उठाने जा रही है। जिससे आने वाले दिनों में आगरा के चर्म उत्पाद फैशन से कदम ताल और विश्व बाजार के साथ होड़ करते दिखेंगे। आगरा के चर्म उद्योग की गहराई से पड़ताल करने के बाद यह तथ्य सामने आया है कि हम अभी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में काफी पीछे हैं। चमड़े के उत्पाद को मौजूदा देशी-विदेशी फैशन के मुताबिक बनाने के लिए आगरा में टे¨स्टग लैब तथा डिजायनिंग इंस्टीट्यूट बनाया जाएगा।
 
इस समिट में 16 सत्र आयोजित होंगे। यूपी सरकार ने समिट में शामिल होने के लिए पांच हजार प्रतिनिधिमंडल को आमन्त्रित किया है। इस समिट में 11 सेक्टर्स पर इन्वेस्टमेंट के लिए फोकस किया गया है। जिसमें एग्रीकल्चर, एग्रो बेस्ड इंडस्ट्री, फूड प्रोसेसिंग, एमएसएमई, आईटी एन्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और टूरिज्म जैसे सेक्टर्स शामिल हैं। यूपी इन्वेस्टर समिट में टाटा, बिरला, अम्बानी और अडानी जैसे उद्योगपति भी शामिल होंगे। इनके अलावा कई और बड़े बिजनेसमैन भी इस दो दिवसीय समिट में आएंगे। इन्वेस्टर्स मीट में लगभग 1069 फॉरेन इन्वेस्टर्स को भी बुलाया गया है जिसमें ज्यादातर एनआरआई हैं। साथ ही 5 हजार से ज्यादा डेलिगेट्स विभिन्न क्षेत्रों के लोग शामिल होंगे। इससे 1 लाख करोड़ निवेश आने की संभावना है।
 
तस्वीर का दूसरा पक्ष यह है कि प्रदेश के कई औद्योगिक इलाकों में पहले से मौजूद उद्यमी सुविधाओं के अभाव व एरिया की बदहाली से तंग आकर यहां से पलायन की तैयारी कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल गाजियाबाद में मौजूद मोहन नगर इंडस्ट्रियल एरिया साइट-2 का है। कई साल से यहां सड़कें जर्जर हैं। नाली व सीवर का कोई इंतजाम नहीं है। इन सबसे कंपनियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है और वे यहां से पलायन की तैयारी में हैं। कमोबेश यही स्थिति राजधानी लखनऊ के चिनहट व कुर्सी रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र की है। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि जिस तरह से प्रदेश सरकार निवेश को लेकर गंभीर कदम उठा रही है, उससे इस बात की उम्मीद है कि हालात जल्दी ही बदल जाएंगे।
 
इन्वेस्टर्स समिट से यूपी में इंडस्ट्री को तो बढ़ावा मिलेगा ही, साथ ही यह समिट लखनऊ की खूबसूरती बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर करने काम भी करेगा। इस दौरान लखनऊ के सभी पर्यटन स्थलों की सफाई और मरम्मत के अलावा वहां से अतिक्रमण भी हटाया जा रहा है। इस समिट से पहले नगर निगम, एलडीए, लेसा, पर्यटन, इंडस्ट्री और राज्य सम्पत्ति समेत कई विभाग मिलाकर शहर को बेहतर बनाने के लिए डेढ़ सौ करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करेंगे। अनुमान है कि करीब पांच हजार इन्वेस्टर इस समिट में लखनऊ आएंगे। इनके ठहरने, खाने-पीने, घूमने और खरीदारी से शहर में एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार होगा। साथ ही शहर की पहचान चिकन और जरदोजी के काम को भी बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन, चिकन और होटेल-रेस्तरां व्यापारियों को सबसे ज्यादा फायदे की उम्मीद है। 
 
इन्वेस्टर्स समिट से पहले ही यूपी सरकार और निवेशकों के बीच करीब एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के 270 सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर हो चुका है। पिछले अनुभवों के मुताबिक इस बात पर ध्यान देना होगा कि सहमति पत्र जमीन पर उतर पाएं। फिलवक्त प्रदेश में औद्योगिक विकास को बहुत जल्द पंख लगने वाले हैं। राज्य सरकार की ओर से पांच वषों में पांच लाख करोड़ का निवेश स्थापित करते हुए सरकार द्वारा बीस लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का संकल्प किया गया है, जो कि नए उत्तर प्रदेश की इबारत लिखने के लिए पर्याप्त है। उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश में एक नया औद्योगिक परिदृश्य जल्द ही देखने को मिलेगा और इससे बेरोजगारी की समस्या भी काफी कुछ हल हो सकेगी।
 
डॉ. आशीष वशिष्ठ
(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)