स्वास्थ्य

सुबह घास पर नंगे पैर टहलिये, आंखों को होगा लाभ

सुबह घास पर नंगे पैर टहलिये, आंखों को होगा लाभ

हमारे जीवन में आंखों का महत्वपूर्ण स्थान है। बिना आंखों के दैनिक कार्यों को करने में आने वाली कठिनाइयों का हम सहज ही अनुमान लगा सकते हैं। बिना आंखों के हमारी दुनिया अंधेरी ही हो जाती है। हमारा यह कर्तव्य है कि हम आंखों की उचित देखभाल करें जिससे वे रोगमुक्त रहें। यों भी आंखों की छोटी−मोटी तकलीफें हमारी ही लापरवाहियों के कारण होती हैं।

बहुत पास से टीवी देखना, चमकीली वस्तुओं को एकटक देखना, नींद आने पर भी न सोना, आंखों को बार−बार मलना, अधिक तेज मसालेदार भोजन का सेवन, गुस्सा करना, शराब पीना, मल−मूत्र आदि रोकने से आंखों में अनेक बीमारियां पैदा हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त सिर में तेल न डालना, लेटकर पढ़ना, घंटों लगातार कम्प्यूटर के आगे बैठे रहना, बिना चश्मा लगाए मोटरसाइकिल या स्कूटर चलाने आदि के कारण भी आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
 
आंखों की सुरक्षा के लिए उनकी उचित देखभाल जरूरी है। मल−मूत्र, छींक आदि वेगों को कभी रोकना नहीं चाहिए। इसी प्रकार यदि आंख में कुछ गिर जाए तो उन्हें बार−बार मलना ठीक नहीं होता। ऐसा होने पर आंखों को तुरंत ठंडे पानी से धोना चाहिए। घंटों तक लगातार काम करते−करते आंखें थकने लगें या उनमें जलन होने लगे तो घुटने तक पांव और आंखों को तुरंत ठंडे पानी से धोना चाहिए इससे आराम मिलेगा।
 
कई अन्य उपाय ऐसे हैं जिनके उपयोग से आंखें स्वस्थ रहती हैं, जैसे मस्तक पर चंदन लगाना आंखों के लिए फायदेमंद होता है। मुंह में ठंडा पानी भरकर आंखों पर ठंडे पानी के छीटें मारना भी लाभकारी होता है। टहलना हमारे लिए फायदेमंद है परन्तु सुबह−सवेरे हरी घास पर नंगे पैर टहलना आंखों को विशेष रूप से लाभ पहुंचाता है, साथ ही प्राकृतिक हरियाली निहारने से आंखों को ठंडक भी मिलती है।
 
प्रतिदिन बालों में तेल लगाना, नाक में और नाभी में तेल लगाना आंखों के लिए लाभकारी होता है। इसके लिए नारियल, सरसों या तिल के तेल का प्रयोग किया जाना चाहिए। मक्खन में मिश्री मिलाकर खाने से भी आंखों को शक्ति मिलती है। रात को सोते समय पैरों के तलवों में तेल लगाना आंखों के लिए अच्छा होता है। भोजन से पहले मल−मूत्र त्याग करना तथा सोते समय हाथ−पैर धोकर सोने से भी आंखों को रोग मुक्त रखने में मदद मिलती है।
 
आंखों को निरोग रखने में त्रिफला का चूर्ण भी कारगर सिद्ध होता है। हरड, बहेड़ा और आंवला मिलाकर कूटकर यह चूर्ण बनाया जाता है। दो चम्मच चूर्ण रात को एक गिलास पानी में भिगोकर सवेरे उस पानी से आंखें धोने से आंखों की छोटी−मोटी परेशानी स्वयं ही दूर हो जाती है।
 
आजकल नाक के बाल उखाड़ना फैशन है परन्तु यह आंखों के लिए नुकसानदायक होता है। इसी प्रकार कब्ज से भी बचना चाहिए। इसके लिए सुबह उठते ही पानी पीना, प्रातःकाल की सैर तथा हरी सब्जियों, सलाद आदि का सेवन उचित रहता है।
 
नेत्र ज्योति स्थिर रखने में त्रिफला का चूर्ण और काले तिल सहायक होते हैं। इसके लिए योग का सहारा भी लिया जा सकता है। सिंहासन नेत्रों की ज्योति बढ़ाने में उपयोगी साबित हुआ है। इसे करने के लिए दोनों पैरों को मिला लें और सामने फैलाकर बैठ जाएं। दोनों हथेलियों को बगल में जमीन पर रख लें और अंगुलियां सामने की ओर मिला लें। अब हाथों को बगल में ही रखते हुए घुटनों के बल खड़े होकर इस प्रकार बैठें कि दायां पैर दाएं कूल्हे पर बायां पैर बाएं कूल्हे के नीचे आ जाए। इसके बाद दायां हाथ दायी जंघा पर और बायां हाथ बायीं जंघा पर रखकर थोड़ा सा उठकर दाएं पैर की एड़ी तथा पंजा बायें पैर की एड़ी के ऊपर से कैंची की आकृति बनाकर दूसरी ओर रख लें। फिर दोनों एडि़यों पर बैठकर दायां हाथ दाएं घुटने पर और बायां हाथ बाएं घुटने पर रखें और उंगलियों को फैला लें। अब भौहों के बीच में देखते हुए, थोड़ा−सा आगे की ओर झुकते हुए जीभ निकालें। वापस पूर्व स्थिति में आने के लिए मुंह को सामान्य कर हाथों को ढीला छोड़ें और एक−एक कर पैरों को सीधा करें।
 
सिंहासन के दौरान जीभ निकालते समय हल्की आवाज के साथ सांस बाहर निकालना चाहिए। सांस बाहर निकालने की क्रिया पूरी होने पर कुछ देर रुकने के बाद ही जीभ को भीतर लेना चाहिए। इस आसन को करते समय आंखों को खुला रखना चाहिए और हाथ बिल्कुल सीधे होने चाहिएं।
 
सिंहासन से आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके अलावा यह रक्त संचरण की अनियमितताओं को दूर करता है और गर्दन की मांस पेशियों को भी पुष्ट करता है। नाक तथा कान के विकारों को दूर कर यह आवाज साफ तथा सुरीली बनाता है। यह श्वसन संबंधी तकलीकों को भी दूर करता है थायराइड ग्रंथि की क्रिया प्रणाली में उत्पन्न हुए विकारों का भी शमन करता है।
 
वह व्यक्ति जिसे घुटनों में दर्द की शिकायत हो उसे यह आसन नहीं करना चाहिए। इसी प्रकार बवासीर के रोगियों को भी इस आसन का निषेध है। इस आसन का सही अभ्यास होने तक इसे किसी योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें। एक बात ध्यान में रखें कि आसन करते समय खुद से कोई जोर जबरदस्ती न करें।
 
वर्षा शर्मा

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