स्वास्थ्य

दांत रहेंगे स्वस्थ तो हँसने पर वाकई बिखरेंगे मोती

दांत रहेंगे स्वस्थ तो हँसने पर वाकई बिखरेंगे मोती

कई बार कोई व्यक्ति हँसता है तो हम कहते हैं कि आप की तो हँसी में मोती बिखर जाते हैं। स्वस्थ, सफेद, चमकीले दांतों को देखकर ही हम ऐसा कहते हैं। सफेद चमकीले और अच्छे दांत व्यक्ति के व्यक्तित्व में चार चांद लगा देते हैं। इसलिए जरूरी है कि शरीर के इस महत्वपूर्ण अंग दांत की नियमित रूप से देखभाल की जाये। दांत स्वस्थ रहें, किन कारणों से दांतों के रोग होते हैं और उन रोगों से बचने के क्या उपाय हैं तथा रूट केनाल ट्रीटमेन्ट (आरसीटी) क्या है इन सब की जानकारी के लिए कोटा के मुख्य एवं दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. जसवंत सिंह सोलंकी से जब चर्चा की तो उन्होंने कई उपयोगी जानकारी दी। वही जानकारी यहां प्रस्तुत है-

स्वस्थ दांत क्या होते हैं के बारे में उन्होंने बताया कि दांतों का संगठनात्मक ढांचा सही होना चाहिए वह टेढ़े-मेढ़े या आड़े−तिरछे नहीं होने चाहिए। दांतों को फंक्शन सही हो तथा वे चमकीले व सफेद हों। मसूड़े मजबूत हों जिससे कि खाने−पीने में किसी भी प्रकार की परेशानी महसूस नहीं हो।
 
दांतों के खराब होने के कारणों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि दांतों के खराब होने में देर तक तम्बाकू युक्त दंत मंजन करना, गुटखे का सेवन करना (जिससे मुंह कम खुलता है तथा ओरल सबम्यूकस फाईब्रोसिस अर्थात कैंसर की पूर्व की स्थिति होने की संभावना बनती है, जो आगे चलकर कैंसर के रूप में बदल सकती है), हार्ड ब्रश से मंजन करना, सुपारी−गुटखे का सेवन करना तथा दांतों की नियमित रूप से सफाई नहीं करना प्रमुख कारण बनते हैं। 
 
दांतों में पायरिया होने से मसूढ़े नीचे चले जाते हैं जिससे दांतों की जड़ें निकल आती हैं और ठण्डा−गर्म महसूस होने लगता है। गुटखा व सुपारी खाने से दांतों में दरार पड़ जाती है। दांत टेढ़े-मेढ़े होने से घिस जाते हैं। दांत में पुरानी चोट होने से दांत का रंग बदल कर काला हो जाता है। दांत के दर्द के साथ सूजन आ जाती है और पस पड़ जाती है।
 
किसी भी प्रकार का दंत रोग दांतों में दर्द या ठण्डा−गर्म लगने की समस्या या और कोई समस्या हो तो तत्काल दंत चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। डॉक्टर मरीज के दांतों व मसूढ़ों की स्थिति को देखकर दवाइयां देते हैं और अतिआवश्यक होने पर दांत निकलवाने की सलाह देकर मरीज की इच्छानुसार दांत निकालते हैं। 
 
दांतों में रूट कैनाल ट्रीटमेन्ट के लिए दंत एक्सरे किया जाता है। एक्सरे में यदि सुपरफिशियल कैविटी प्रतीत होती है तो केवल मसाला भरकर (फिलिंग) उपचार किया जाता है। यदि कैविटी गहरी होती है एवं नस का संक्रमण होता है तो नस का उपचार करते हैं। इस उपचार को ही रूट कैनाल ट्रीटमेन्ट कहा जाता है। 
 
रूट कैनाल ट्रीटमेन्ट में दांत को मध्य से खोलकर नस तक पहुंचते हैं। डेन्टल फाई के द्वारा खराब नसों को निकाल दिया जाता है। दांत की नस की अच्छी प्रकार से सफाई करके कृत्रिम नसें डाली जाती हैं। इसके उपरान्त मसाला भरकर ऊपर से कैप लगा दी जाती है। कैप लगाने से दांत में की गई मसाले की भराई सुरक्षित रहती है। मरीज को दांत में मसाला भराने के बाद कैप अवश्य लगवा लेनी चाहिए। 
 
दांतों के उपचार के बारे में व्याप्त भ्रांतियों के बारे में खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि दांत निकालने से आंखों पर किसी प्रकार का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। दांतों की सफाई करने से वे कमजोर नहीं होते हैं वरन् स्वस्थ एवं मजबूत बनते हैं। दांतों को स्वस्थ बनाये रखने के लिए दिन में दो बार सुबह एवं रात को भोजन के बाद मंजन करना चाहिए। मंजन करने वाला ब्रश मुलायम लेना चाहिए। तम्बाकू युक्त मंजन का कभी भी प्रयोग नहीं करना चाहिए। प्रति छह माह में दांतों की दंत चिकित्सक से जांच कराते रहना चाहिए।
 
डॉ. प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवं पत्रकार

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