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आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान खेल रहा दोहरा खेल: अमेरिका

By ankit@prabhasakshi.com | Publish Date: Jan 3 2018 1:10PM
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान खेल रहा दोहरा खेल: अमेरिका

वाशिंगटन/संयुक्त राष्ट्र। अमेरिका ने पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ‘‘दोहरा खेल’’ खेलने का आरोप लगाया और कहा कि इस्लामाबाद अमेरिकी सहायता राशि ‘‘कमाने’’ के लिए उसकी जमीन से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले आतंकवादियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करे।

 
अमेरिका की ओर से यह कड़ा संदेश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नववर्ष पर किए उस ट्वीट के बाद जारी किया गया है जिसमें उन्होंने (ट्रंप ने) पाकिस्तान पर आरोप लगाया था कि पिछले 15 वर्षों में अमेरिका से 33 अरब डॉलर की सहायता राशि के बदले में उसने केवल धोखा ही दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप के ट्वीट के थोड़ी देर बाद ही व्हाइट हाउस ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 25 करोड़ 50 लाख डॉलर की सहायता राशि पर रोक लगाने की पुष्टि की थी।
 
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निक्की हेली ने पाकिस्तान की सहायता राशि रोकने के ट्रंप के फैसले का समर्थन करते हुए कहा, ‘‘इसके कारण स्पष्ट हैं। पाकिस्तान ने कई वर्षों तक दोहरा खेल खेला है।’’उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान एक ही समय में हमारे साथ काम करता है और उसी समय आतंकवादियों को भी पनाह देता है जो अफगानिस्तान में हमारे सैनिकों पर हमला करते हैं। प्रशासन इस खेल को बर्दाश्त नहीं करेगा।’’ निक्की ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान से इससे कहीं अधिक सहयोग की उम्मीद करता है। शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कहा कि सहायता रोकने का फैसला पाकिस्तान के आतंकवादियों को पनाह देने से ही जुड़ा है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीथर नोर्ट ने अपने दैनिक संवाददाता सम्मेलन में पाकिस्तान को एक ‘‘महत्वपूर्ण सहयोगी’’ करार दिया और कहा कि इस्लामाबाद को आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई तेज करनी चाहिए।
 
हीथर ने कहा, ‘‘हम पाकिस्तान से उम्मीद करते हैं... अमेरिका पाकिस्तान से उम्मीद करता है कि वह हक्कानी नेटवर्क और अन्य आतंकवादियों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाए जो उसकी जमीन से अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण सहयोगी है। हमारे उस क्षेत्र में कई मसले हैं। पाकिस्तान उनके बारे में जानता है, हम सभी उनके बारे में जानते हैं और हम साथ मिलकर उनमें से कुछ पर सावधानीपूर्वक काम करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं यह कहना नहीं चाहती कि पाकिस्तान और क्या कर सकता है लेकिन पाकिस्तान जानता है कि उसे क्या करने की आवश्यकता है।’’ हीथर ने पाकिस्तान को 25 करोड़ 50 लाख डॉलर की सैन्य सहायता रोकने के अमेरिका के फैसले के बारे में कहा कि यह निर्णय अगस्त में लिया गया था और पाकिस्तान को ईमानदारी से कदम उठाकर इस प्रकार की सहायता को ‘‘कमाने’’ की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान की यात्रा करने वाले रक्षा मंत्री जिम मैटिस और विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने पाकिस्तानी नेतृत्व को यही संदेश दिया था।
 
इस बीच, व्हाइट हाउस ने भी ट्रंप के इस कदम का बचाव करते हुए पाकिस्तान से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में और कदम उठाने की बात कही। वाशिंगटन में व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम जानते हैं कि पाकिस्तान आतंकवाद का मुकाबला करने और उसे रोकने के लिए और कदम उठा सकता है और हम चाहते हैं कि वह अपने प्रयास तेज करे। यह काफी आसान लगता है।’’ सारा ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने दायित्वों को पूरा करने में विफल रहा है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल अगस्त में राष्ट्रपति ने अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया को लेकर अपनी नई रणनीति को रेखांकित किया था। उस समय उन्होंने (ट्रंप ने) कहा था कि पाकिस्तान अपने दायित्व पूरे नहीं कर रहा।’’ ट्रंप ने अगस्त मेंअपनी नई दक्षिण एशियाई नीति की घोषणा की थी और पाकिस्तान पर आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाया था। सारा ने कहा कि राष्ट्रपति ने जो प्रतिबद्धताएं जताई थीं, वह उन्हीं को पूरा कर रहे हैं, क्योंकि वह ऐसे राष्ट्रपति हैं जो अपनी कही बात को करके दिखाते हैं। 
 
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने इन आरोपों पर ‘‘गहरी निराशा’’ व्यक्त की और कहा कि आरोपों से दोनों देशों के बीच ‘‘विश्वास’’ को तगड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक ट्वीट में ट्रंप के इस दावे को चुनौती दी कि अमेरिका ने उसे गत 15 वर्षों में 33 अरब डॉलर से अधिक की सहायता दी है। उन्होंने कहा कि किसी ऑडिट कंपनी से सत्यापन कराने से अमेरिकी राष्ट्रपति गलत साबित होंगे। पाकिस्तान ने ट्रंप के ट्वीट के खिलाफ अपना विरोध जाहिर करते हुए अमेरिकी राजदूत डेविड हेल को भी समन किया था।