कहानी/कविता

दिमागीन सर्विस सेंटर (व्यंग्य)

दिमागीन सर्विस सेंटर (व्यंग्य)

कोई किसी राजनेता का सिर काटने पर ईनाम घोषित कर रहा है, तो कोई किसी लेखक या कलाकार पर। ऐसे लोगों से आग्रह है कि वे एक बार हमारे पड़ोस में स्थित ‘दिमागीन सर्विस सेंटर’ में आकर डॉ. दिमागीन से मिलें।

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पुस्तक दिवस पर खुद से पूछें- क्यों दूर हो रहे हैं पुस्तकों से

पुस्तक दिवस पर खुद से पूछें- क्यों दूर हो रहे हैं पुस्तकों से

गूगल के दौर में लगता है कि पुस्तकें अप्रासंगिक हो गई हैं परन्तु सत्य कुछ और है। पुस्तकें बातचीत एवं संवाद का माध्यम हैं। पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र हैं। किताबें संसार को बदलने का साधन रही हैं।

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