कहानी/कविता

नज़्मः तुम्हारा क्या हश्र होगा...

नज़्मः तुम्हारा क्या हश्र होगा...

वरिष्ठ लेखिका फिरदौस खान द्वारा रचित यह नज़्म संप्रदाय की राजनीति करने वाले नेताओं पर करारी चोट करती है और कई सवाल भी उठाती है।

लेख

भाषा अभिव्यक्ति का साधन ही नहीं सांस्कृतिक सेतु भी है

भाषा अभिव्यक्ति का साधन ही नहीं सांस्कृतिक सेतु भी है

मातृभाषा के बिना, किसी भी देश की संस्कृति की कल्पना बेमानी है। मातृभाषा हमें राष्ट्रीयता से जोड़ती है और देश प्रेम की भावना उत्पन्न करती है। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस प्रत्येक भाषा की गरिमा को स्वीकार करने के लिए मनाया जाता है।

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