1. हर कामकाज में से अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त की जाए

    हर कामकाज में से अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त की जाए

    भाजपा सरकार संसद में एक विधेयक ऐसा लाए, जिसमें अंग्रेजी का सह-राजभाषा का पद समाप्त किया जाए। देश के हर कामकाज में से अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त की जाए। यह मांग अपने आपको राष्ट्रवादी कहने वाले सांसद खुद क्यों नहीं करते?

  2. हिन्दुस्तानी से हिंग्लिश की ओर बढ़ते हुये बीता यह साल

    हिन्दुस्तानी से हिंग्लिश की ओर बढ़ते हुये बीता यह साल

    अनेक आंचलिक बोलियों और विभिन्न भाषाओं से मिलकर बनने वाली यह हिन्दी इस्तेमाल में हिन्दुस्तानी है और अब ज्ञान-विज्ञान के नये क्षेत्रों और अंग्रेजी के शब्दों के शामिल होने से हिंग्लिश की ओर बढ़ रही है।

  3. राष्ट्र को सुदृढ़ करने के लिए हिंदी को जरूरी मानते थे गांधीजी

    राष्ट्र को सुदृढ़ करने के लिए हिंदी को जरूरी मानते थे गांधीजी

    जहां तक भारत को एक देश, एक राष्ट्र के रूप में सुदृढ़ करने का सवाल था, उसके लिए गांधीजी राष्ट्रभाषा के बतौर हिंदी के पक्ष में सभी को प्रान्तीयता के मोह से ऊपर उठना आवश्यक मानते एवं बताते रहे।

  4. भाषा व्याकरण सम्मत हो तो सहज-सरल बनेगी हिंदी

    भाषा व्याकरण सम्मत हो तो सहज-सरल बनेगी हिंदी

    हिंदी को सहज-सरल बनाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि भाषा व्याकरण सम्मत होनी चाहिए। इसमें बोलचाल का सहज लहजा होना चाहिए। इसके लिए हमें उर्दू को आदर्श मानना चाहिए।

  5. अंग्रेजी सीखिये पर हिंदी को अपनी प्राथमिकता में रखिये

    अंग्रेजी सीखिये पर हिंदी को अपनी प्राथमिकता में रखिये

    जैसे हम आज के युग में अंग्रेजी भाषा को महत्त्व देते हैं वही स्थान हिंदी भाषा को क्यों नहीं दे सकते, जोकि हमारी राष्ट्र भाषा है। आज तो हिंदी तकनीकी रूप से भी बहुत सक्षम हो चुकी है।

  6. हिंदी का स्वाभिमान बचाने का समाचार-पत्रों का शुभ संकल्प

    हिंदी का स्वाभिमान बचाने का समाचार-पत्रों का शुभ संकल्प

    मध्य प्रदेश के हिंदी समाचार पत्रों ने अपनी भाषा को बचाने और उसे समृद्ध करने का जो संकल्प लिया है, उसके साथ अन्य अस्मिताओं के प्रश्न भी जुड़े हुए हैं। इसलिए इस संकल्प को सभी संस्थानों को अपने समाचार पत्रों के पन्नों पर उतारना होगा।

  7. रचनाओं में समस्याओं के हल भी सुझाते थे प्रेमचंद

    रचनाओं में समस्याओं के हल भी सुझाते थे प्रेमचंद

    वह अपनी रचनाओं में सिर्फ समस्याओं को उभारने का काम नहीं करते बल्कि उनसे कैसे निपटा जाए उसे भी बखूबी बताते हैं। वह भावनाओं को सींचने वाले साहित्यकार थे।

  8. गहरा रिश्ता रहा है पत्रकार और साहित्यकार का

    गहरा रिश्ता रहा है पत्रकार और साहित्यकार का

    साहित्यकार और पत्रकार का चोली−दामन का साथ है। दोनों ही सम सामयिक समाज का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी लेखनी के माध्यम से समाज हित में सामाजिक मूल्यों और सम्वेदनाओं को दृष्टि प्रदान करते हैं।

  9. हिन्दी ने अंग्रेजी का वर्चस्व तोड़ डाला

    हिन्दी ने अंग्रेजी का वर्चस्व तोड़ डाला

    विश्व के लगभग 150 विश्वविद्यालयों तथा सैंकड़ों छोटे−बड़े केंद्रों में विश्वविद्यालय स्तर से लेकर शोध के स्तर तक हिन्दी के अध्ययन−अध्यापन की व्यवस्था हुई है। आज हिन्दी ने अंग्रेजी का वर्चस्व तोड़ डाला है।

  10. संस्कृत की तरह प्रतीकात्मक होती जा रही हिंदी

    संस्कृत की तरह प्रतीकात्मक होती जा रही हिंदी

    इससे बडी विडम्बना क्या हो सकती है की जिस भाषा को हम अपनी राष्ट्रीय भाषा कहते हैं। आज उसका हाल भी संस्कृत की तरह हो गया है जिधर देखो उधर ही अंग्रेजी से हिंदी और समस्त भारतीय भाषाओं को दबाया जा रहा है।

  11. सबसे शुद्ध और विज्ञान सम्मत भाषा है हिन्दी

    सबसे शुद्ध और विज्ञान सम्मत भाषा है हिन्दी

    हिन्दी भाषा अपनी लिपि और ध्वन्यात्मकता (उच्चारण) के लिहाज से सबसे शुद्ध और विज्ञान सम्मत भाषा है। हमारे यहां एक अक्षर से एक ही ध्वनि निकलती है और एक बिंदु (अनुस्वार) का भी अपना महत्व है।

  12. हिंदी दिवस ही मनाएंगे या हिंदी के लिए कुछ करेंगे भी

    हिंदी दिवस ही मनाएंगे या हिंदी के लिए कुछ करेंगे भी

    देश में आज जो टीवी चैनल चल रहे हैं उसमें हिंदी नहीं हिंग्लिश ज्यादा चल रही है, जिससे हिंदी को नुकसान हो रहा है। आज के दिवस पर यही कहना चाहेंगे कि हमें अपनी मातृभाषा के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।