1. प्रख्यात कवि, गीतकार, संगीतकार व लेखक थे गजानन वर्मा

    प्रख्यात कवि, गीतकार, संगीतकार व लेखक थे गजानन वर्मा

    गजानन जी ने कई आध्यात्मिक रचनाएं भी लिखीं जिनमें से ’मीरा’ व ’ओम शिव शक्तिमती माँ’ को पद्मा बिनानी फाउन्डेशन द्वारा इन्हीं के संगीत निर्देशन में जारी किया गया।

  2. अद्भुत हैं हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के ललित निबंध

    अद्भुत हैं हजारी प्रसाद द्विवेदी जी के ललित निबंध

    हिंदी साहित्य के पुरोधा आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का हिन्दी साहित्य में योगदान कभी नकारा नहीं जा सकता और कबीर जैसे महान संत को दुनिया से परिचित कराने का श्रेय भी उनको ही जाता है।

  3. शहरी मध्यम वर्ग की छटपटाहट को बखूबी व्यक्त किया तेंदुलकर ने

    शहरी मध्यम वर्ग की छटपटाहट को बखूबी व्यक्त किया तेंदुलकर ने

    विजय तेंदुलकर ने 1950 के दशक में अपनी लेखनी के माध्यम से आधुनिक मराठी रंगमंच को एक नई दिशा प्रदान की जबकि 60 के दशक में रंगायन थियेटर समूह में डॉ. श्रीराम लागू, मोहन अगाशे और सुलभा देशपांडे के साथ मिलकर काम किया।

  4. पुस्तक दिवस पर खुद से पूछें- क्यों दूर हो रहे हैं पुस्तकों से

    पुस्तक दिवस पर खुद से पूछें- क्यों दूर हो रहे हैं पुस्तकों से

    गूगल के दौर में लगता है कि पुस्तकें अप्रासंगिक हो गई हैं परन्तु सत्य कुछ और है। पुस्तकें बातचीत एवं संवाद का माध्यम हैं। पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र हैं। किताबें संसार को बदलने का साधन रही हैं।

  5. राहुल सांकृत्यायन की रचनाओं का दायरा विशाल है

    राहुल सांकृत्यायन की रचनाओं का दायरा विशाल है

    राहुल सांकृत्यायन की रचनाओं का दायरा विशाल है। उन्होंने अपनी आत्मकथा के अलावा कई उपन्यास, कहानी संग्रह, जीवनी, यात्रा वृतांत लिखे हैं। इसके साथ ही उन्होंने धर्म एवं दर्शन पर कई किताबें लिखीं।

  6. टीवी पर सोप ऑपेरा की शुरुआत का श्रेय मनोहर श्याम जोशी को

    टीवी पर सोप ऑपेरा की शुरुआत का श्रेय मनोहर श्याम जोशी को

    भारतीय टेलीविजन पर प्रसारित पहले सोप ऑपेरा ''हम लोग'' में ''नन्हे'' का किरदार निभाने वाले अभिनव चतुर्वेदी कहते हैं, ''''बात बुनियाद की सफलता की हो या हम लोग की सफलता की, पूरा श्रेय मनोहर श्याम जोशी को जाता है।''''

  7. जनता की बात को जनभाषा में ही रखते थे भवानी बाबू

    जनता की बात को जनभाषा में ही रखते थे भवानी बाबू

    नई कविताओं में भवानी प्रसाद मिश्र का काफी योगदान है। उनका सादगी भरा शिल्प अब भी नये कवियों के लिए चुनौती और प्रेरणास्रोत है। भवानी प्रसाद मिश्र जनता की बात को जनभाषा में ही रखते थे।

  8. हिंदी को सहज और सरल बनाने का आसान तरीका

    हिंदी को सहज और सरल बनाने का आसान तरीका

    उर्दू में वाक्यों के गठन का बहुत ध्यान रखा जाता है। हिंदी में वाक्य गठन का ध्यान कम रखा जाता है। मशहूर शायर फिराक गोरखपुरी ने अपनी एक रचना में सीख देते हुए कहा है कि ''पूरी शुद्ध क्रियाएं लिखिए, शब्दों का क्रम रखिए ठीक।''

  9. 'मीडिया की ओर देखती स्त्री' पुस्तक का लोकार्पण

    'मीडिया की ओर देखती स्त्री' पुस्तक का लोकार्पण

    इस पुस्तक में देश के जाने-माने साहित्यकारों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों के 39 लेख समाहित हैं जिनसे आज के मीडिया में स्त्री की बहुआयामी छवि का मूल्यांकन किया गया है।

  10. फिराक गोरखपुरी मानते थे इश्क में होती है बहुत ताक़त

    फिराक गोरखपुरी मानते थे इश्क में होती है बहुत ताक़त

    फ़िराक़ के इश्क़ और मोहब्बत के चर्चे आम रहे। वह इस क़िस्म की शौहरत चाहते भी थे। कभी-कभी ख़ुद भी क़िस्सा बना लिया करते थे, ताकि ज़माना उन्हें एक आदर्श आशिक़ समझे।

  11. भाषा अभिव्यक्ति का साधन ही नहीं सांस्कृतिक सेतु भी है

    भाषा अभिव्यक्ति का साधन ही नहीं सांस्कृतिक सेतु भी है

    मातृभाषा के बिना, किसी भी देश की संस्कृति की कल्पना बेमानी है। मातृभाषा हमें राष्ट्रीयता से जोड़ती है और देश प्रेम की भावना उत्पन्न करती है। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस प्रत्येक भाषा की गरिमा को स्वीकार करने के लिए मनाया जाता है।

  12. एक लोकसंग्रही व्यक्तित्व कैलाश चंद्र पंत

    एक लोकसंग्रही व्यक्तित्व कैलाश चंद्र पंत

    पंत जी का लोकसंग्रही व्यक्तित्व इस मायने में बड़ा सजग संवेदनशील रहा है, उनके क्रियाकलाप, उनकी उपलब्धियां उसी से प्रेरित और संभव हुई हैं, यह देख पाना उन्हें करीब से जानने वालों के लिए तो सजग है ही, सामान्य जानकारों के लिए भी कठिन होना चाहिए।

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