Prabhasakshi
बुधवार, फरवरी 21 2018 | समय 10:43 Hrs(IST)
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वही शिव है, वही संत है (कविता)

वही शिव है, वही संत है (कविता)

महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव शंकर की महिमा का बखान करती है वरिष्ठ पत्रकार संजय तिवारी की यह कविता। 'कुछ अंत है, कहीं अनंत है, वही शिव है, वही संत है।'
इस बेहद से इश्क की हदों को न आज़माया करो तुम...

इस बेहद से इश्क की हदों को न आज़माया करो तुम...

मुंबई के शायर समूह गुल्ज़ारियत की ओर से लिखी गयी यह नज़्म पाठकों को पसंद आयेगी। इसमें बड़े ही अलग अंदाज में इश्क से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर नजर डाली गयी है।
पत्रकारिता के माध्यम से लोकजागरण के प्रयास करते रहे मुज्जफर हुसैन

पत्रकारिता के माध्यम से लोकजागरण के प्रयास करते रहे मुज्जफर हुसैन

इन चार दशकों में उनका लिखा-बोला गया विपुल साहित्य उपलब्ध है। दैनिक अखबारों समेत, पांचजन्य जैसे पत्रों में उन्होंने नियमित लिखा है। उस पूरे साहित्य को एकत्र कर उनके लेखन का समग्र प्रकाशित होना चाहिए।
बुढ़ापे में वैलेंटाइन (सामयिक व्यंग्य)

बुढ़ापे में वैलेंटाइन (सामयिक व्यंग्य)

उम्र के सातवें दशक की दहलीज पर खड़े रामविभूति सिंह ने वैलेंटाइन डे की पूर्व संध्या पर अपनी अर्द्धांगिनी सुहासिनी का हाथ होले से दबाते हुए कहा- "कल अपुन भी घूमने चलते हैं- किसी पार्क में बैठेंगे.. मॉल में घूमेंगे।