1. कपिल सिब्बल का कुतर्क (राजनीतिक व्यंग्य)

    कपिल सिब्बल का कुतर्क (राजनीतिक व्यंग्य)

    तीन तलाक पर सर्वोच्च न्यायालय में जो बहस चल रही है, वहां कपिल सिब्बल साब ने कहा कि जो प्रथा पिछले 1,400 साल से चली आ रही है, उसे गलत कैसे कह सकते हैं?

  2. कलाकार का घर (कहानी)

    कलाकार का घर (कहानी)

    क्या वास्तव में कला इतनी बेबस है। वह कला व कलाकार जो राजनीति से दूर सीधा−सादा है वह कितनी परेशानी को देखता है शायद इसीलिए परिवार में अब कोई कलाकार नहीं बनना चाहता।

  3. कड़े शब्दों में निंदा का अर्थ जानते हैं? (व्यंग्य)

    कड़े शब्दों में निंदा का अर्थ जानते हैं? (व्यंग्य)

    मुझे अपने अल्प-ज्ञान के कारण हमेशा शर्मिंदा होना पड़ता है। जब-जब दुश्मन देश नापाक हरकतें करता है हमारे देश के कर्णधारों के श्रीमुख से कड़े शब्दों में निन्दा का रस झरने लगता है।

  4. बेटी का दहेज (पंजाबी कहानी)

    बेटी का दहेज (पंजाबी कहानी)

    अल्लारखा ने ठीक कहा, उन्हें लाना अब बहुत खतरे वाला काम था। हमें जाते हुए देख कर लोगों को गुस्सा हद पर आ गया था। वे एक दूसरे से बढ़ बढ़ कर कड़वी बातें मुंह से निकाल रहे थे।

  5. दिमागीन सर्विस सेंटर (व्यंग्य)

    दिमागीन सर्विस सेंटर (व्यंग्य)

    कोई किसी राजनेता का सिर काटने पर ईनाम घोषित कर रहा है, तो कोई किसी लेखक या कलाकार पर। ऐसे लोगों से आग्रह है कि वे एक बार हमारे पड़ोस में स्थित ‘दिमागीन सर्विस सेंटर’ में आकर डॉ. दिमागीन से मिलें।

  6. (राजनीतिक हालात पर कविता) तुमसे ही सवाल क्यूँ?

    (राजनीतिक हालात पर कविता) तुमसे ही सवाल क्यूँ?

    स्वतंत्र लेखिका शालिनी तिवारी जोकि जल, प्रकृति एवं समसामयिक मसलों पर लेखन के साथ साथ वर्षों से मूल्यपरक शिक्षा हेतु विशेष अभियान का संचालन भी करती हैं पेश कर रही हैं आज के राजनीतिक हालात पर एक कविता।

  7. रावी के आर पार (पंजाबी कहानी)

    रावी के आर पार (पंजाबी कहानी)

    मसीह के बेटों ने एक बच्चा बहता हुआ देख लिया। उन्हें बच्चा अभी जीवित लगा उन्होंने सिर से साफा खोल कर बच्चे की ओर फेंका, पर वह थोड़ा पीछे रह गया। उन्होंने एक पैर तेज धार पर डाल कर दोबारा साफा फेंका, फिर भी साफा पीछे रह गया।

  8. चुनावी रंग (कविता)

    चुनावी रंग (कविता)

    पत्रकार और शिक्षक श्रीकांत दुबे की रचना ''चुनावी रंग'' चुनावों के समय नेताओं के रुख और चुनाव बाद उनके विपरीत रुख पर करारी चोट करती है।

  9. नज़्मः तुम्हारा क्या हश्र होगा...

    नज़्मः तुम्हारा क्या हश्र होगा...

    वरिष्ठ लेखिका फिरदौस खान द्वारा रचित यह नज़्म संप्रदाय की राजनीति करने वाले नेताओं पर करारी चोट करती है और कई सवाल भी उठाती है।

  10. काश! हैरी पॉटर हमारा नेता होता (व्यंग्य)

    काश! हैरी पॉटर हमारा नेता होता (व्यंग्य)

    काश, हैरी पॉटर हमारे देश का नेता होता। तब, सरकार यह तो नहीं कह पाती कि उसके पास जादू की छड़ी नहीं है। आप देख लेना, जिस दिन जादू की छड़ी मिल जाएगी, उस दिन देश की सारी समस्याएं हल हो जाएंगी।

  11. दर्द और दवा (कहानी)

    दर्द और दवा (कहानी)

    प्रधान जी ने जब देखा कि सोहन आसानी से मानने वाला नहीं है, तो उन्होंने उसे अगली पंचायत में हाजिर होने को कहा। पहले तो सोहन ने सोचा कि वहां न जाए। पिताजी की वसीयत का किसी और को क्या पता है?

  12. दाल खाने के चक्कर में (व्यंग्य)

    दाल खाने के चक्कर में (व्यंग्य)

    सेठ जी के घर में खाना बनाने वाली महाराजिन दाल भिगो रही थी। उसने देखा किसी का ध्यान नहीं है तो चुपके से दाल का एक दाना उठा कर अपनी अंटी में खोंस लिया। लेकिन सेठानी की नज़र से यह बात छिपी न रही।