1. नज़्मः तुम्हारा क्या हश्र होगा...

    नज़्मः तुम्हारा क्या हश्र होगा...

    वरिष्ठ लेखिका फिरदौस खान द्वारा रचित यह नज़्म संप्रदाय की राजनीति करने वाले नेताओं पर करारी चोट करती है और कई सवाल भी उठाती है।

  2. काश! हैरी पॉटर हमारा नेता होता (व्यंग्य)

    काश! हैरी पॉटर हमारा नेता होता (व्यंग्य)

    काश, हैरी पॉटर हमारे देश का नेता होता। तब, सरकार यह तो नहीं कह पाती कि उसके पास जादू की छड़ी नहीं है। आप देख लेना, जिस दिन जादू की छड़ी मिल जाएगी, उस दिन देश की सारी समस्याएं हल हो जाएंगी।

  3. दर्द और दवा (कहानी)

    दर्द और दवा (कहानी)

    प्रधान जी ने जब देखा कि सोहन आसानी से मानने वाला नहीं है, तो उन्होंने उसे अगली पंचायत में हाजिर होने को कहा। पहले तो सोहन ने सोचा कि वहां न जाए। पिताजी की वसीयत का किसी और को क्या पता है?

  4. दाल खाने के चक्कर में (व्यंग्य)

    दाल खाने के चक्कर में (व्यंग्य)

    सेठ जी के घर में खाना बनाने वाली महाराजिन दाल भिगो रही थी। उसने देखा किसी का ध्यान नहीं है तो चुपके से दाल का एक दाना उठा कर अपनी अंटी में खोंस लिया। लेकिन सेठानी की नज़र से यह बात छिपी न रही।

  5. सर्वज्ञानी (पंजाबी कहानी)

    सर्वज्ञानी (पंजाबी कहानी)

    गुलमर्ग, कुकड़नारा, पहिलगाम, सोनमर्ग, आदि सभी स्थान हम घूम चुके थे, अब तो अंतिम दो दिनों के लिए हम श्रीनगर के एक होटल में रुके हुए थे। सीटें आरक्षित करवा चुके थे। और परसों हमें चले जाना था।

  6. फ़ना होना चाहती हूं... (नज़्म)

    फ़ना होना चाहती हूं... (नज़्म)

    वरिष्ठ लेखिका फिरदौस खान द्वारा रचित नज़्म ''फना होना चाहती हूं'' यहां प्रस्तुत है।

  7. चल चमेली लैन में... (व्यंग्य)

    चल चमेली लैन में... (व्यंग्य)

    चार घंटे बाद जब ए.टी.एम. देवता के दर्शन हुए, तो उन्होंने अंगूठा दिखा दिया। सरदी में खड़े-खड़े मेरी टांगें ही अकड़ गयीं। ये तो गनीमत हुई कि गुप्ता जी अपनी गाड़ी से मुझे घर तक छोड़ गये।

  8. भारत के नये पर्व (व्यंग्य)

    भारत के नये पर्व (व्यंग्य)

    चुनाव और उसके साथ चलने वाले इन अस्थायी पर्वों की महिमा निराली है। आजकल कई राज्यों में इनका जोर है। इनमें सुहाने वादे और झूठे आश्वासनों के साथ कभी-कभी कुछ ठोस माल भी हाथ लग जाता है।

  9. मनमाने फैसले लेते हैं नेता (व्यंग्य)

    मनमाने फैसले लेते हैं नेता (व्यंग्य)

    नेता मनमाने फैसले लेते हैं। उनसे देश को लाखों करोड़ का नुकसान होता है। लेकिन, नेता के चेहरे पर अफसोस की एक शिकन तक दिखाई नहीं देती। उलटा वह मुक्त भाव से मुस्कुराता है। आज देश में हर जगह नेता मुस्कुरा रहे हैं।

  10. पांच रुपये के चक्कर में ईमान क्यों खराब करें? (व्यंग्य)

    पांच रुपये के चक्कर में ईमान क्यों खराब करें? (व्यंग्य)

    सामने वाली सीट पर बैठे सज्जन ने उतरते समय अपना सामान नीचे से निकाला, तो एक पांच रु. का चमकता हुआ नया सिक्का उसके साथ रगड़ता हुआ डिब्बे के बीच में आकर स्थापित हो गया।

  11. एक था भाई एक थी बहन (वियतनामी कथा)

    एक था भाई एक थी बहन (वियतनामी कथा)

    वियतनाम की पहाड़ी तलहिटयों में कहीं रहते थे एक भाई और एक बहन। भाई बाईस वर्ष और बहन सात वर्ष की। दोनों ही आपस में एक दूसरे पर आश्रित थे।

  12. मच्छर से कुछ सीखो भाई (व्यंग्य)

    मच्छर से कुछ सीखो भाई (व्यंग्य)

    आज भले ही बुलेट ट्रेन और राकेट का युग हो; पर अधिकांश देवी-देवताओं के वाहन पशु, पक्षी ही हैं। गणेश जी को चूहे की, तो मां दुर्गा को सिंह और इन्द्र देवता को हाथी की सवारी पसंद है। वरुण देवता के अवतार साईं झूलेलाल मछली पर चलते हैं।

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