1. सर्वज्ञानी (पंजाबी कहानी)

    सर्वज्ञानी (पंजाबी कहानी)

    गुलमर्ग, कुकड़नारा, पहिलगाम, सोनमर्ग, आदि सभी स्थान हम घूम चुके थे, अब तो अंतिम दो दिनों के लिए हम श्रीनगर के एक होटल में रुके हुए थे। सीटें आरक्षित करवा चुके थे। और परसों हमें चले जाना था।

  2. फ़ना होना चाहती हूं... (नज़्म)

    फ़ना होना चाहती हूं... (नज़्म)

    वरिष्ठ लेखिका फिरदौस खान द्वारा रचित नज़्म ''फना होना चाहती हूं'' यहां प्रस्तुत है।

  3. चल चमेली लैन में... (व्यंग्य)

    चल चमेली लैन में... (व्यंग्य)

    चार घंटे बाद जब ए.टी.एम. देवता के दर्शन हुए, तो उन्होंने अंगूठा दिखा दिया। सरदी में खड़े-खड़े मेरी टांगें ही अकड़ गयीं। ये तो गनीमत हुई कि गुप्ता जी अपनी गाड़ी से मुझे घर तक छोड़ गये।

  4. भारत के नये पर्व (व्यंग्य)

    भारत के नये पर्व (व्यंग्य)

    चुनाव और उसके साथ चलने वाले इन अस्थायी पर्वों की महिमा निराली है। आजकल कई राज्यों में इनका जोर है। इनमें सुहाने वादे और झूठे आश्वासनों के साथ कभी-कभी कुछ ठोस माल भी हाथ लग जाता है।

  5. मनमाने फैसले लेते हैं नेता (व्यंग्य)

    मनमाने फैसले लेते हैं नेता (व्यंग्य)

    नेता मनमाने फैसले लेते हैं। उनसे देश को लाखों करोड़ का नुकसान होता है। लेकिन, नेता के चेहरे पर अफसोस की एक शिकन तक दिखाई नहीं देती। उलटा वह मुक्त भाव से मुस्कुराता है। आज देश में हर जगह नेता मुस्कुरा रहे हैं।

  6. पांच रुपये के चक्कर में ईमान क्यों खराब करें? (व्यंग्य)

    पांच रुपये के चक्कर में ईमान क्यों खराब करें? (व्यंग्य)

    सामने वाली सीट पर बैठे सज्जन ने उतरते समय अपना सामान नीचे से निकाला, तो एक पांच रु. का चमकता हुआ नया सिक्का उसके साथ रगड़ता हुआ डिब्बे के बीच में आकर स्थापित हो गया।

  7. एक था भाई एक थी बहन (वियतनामी कथा)

    एक था भाई एक थी बहन (वियतनामी कथा)

    वियतनाम की पहाड़ी तलहिटयों में कहीं रहते थे एक भाई और एक बहन। भाई बाईस वर्ष और बहन सात वर्ष की। दोनों ही आपस में एक दूसरे पर आश्रित थे।

  8. मच्छर से कुछ सीखो भाई (व्यंग्य)

    मच्छर से कुछ सीखो भाई (व्यंग्य)

    आज भले ही बुलेट ट्रेन और राकेट का युग हो; पर अधिकांश देवी-देवताओं के वाहन पशु, पक्षी ही हैं। गणेश जी को चूहे की, तो मां दुर्गा को सिंह और इन्द्र देवता को हाथी की सवारी पसंद है। वरुण देवता के अवतार साईं झूलेलाल मछली पर चलते हैं।

  9. तलाश पूरी हुई (कहानी)

    तलाश पूरी हुई (कहानी)

    राजेश बाबू का मैडिकल स्टोर था। काम बहुत अधिक तो नहीं था, पर दाल-रोटी इज्जत से निकल जाती थी। उन्होंने सुमन के लिए एक-दो परिवार देखे; पर कहीं घर का वातावरण उन्हें नहीं जंचा, तो कहीं दहेज की मांग ने उनके कदम रोक लिये।

  10. व्यंग्यः टेम्पलवादी नेता से टॉयलटवादी नेता तक

    व्यंग्यः टेम्पलवादी नेता से टॉयलटवादी नेता तक

    एक टेम्पलवादी नेता है। दूसरा टेम्पलवादी नहीं है। हिंदुस्तान में कौनसा नेता कौनसा वादी होगा, यह उसकी पार्टी पर निर्भर करता है। पार्टी बदल जाती है तो वादी भी बदल जाती है। राजनीति में ''वादी'' कुछ वैसी ही चीज़ होती है, जैसी आयुर्वेद में ''बादी'' होती है।

  11. दोस्ती का फर्ज़ (कहानी)

    दोस्ती का फर्ज़ (कहानी)

    रमेश अभी तक घबराया हुआ नजर आ रहा था। मैंने फिर पूछा- रमेश तुमने बताया नहीं कि इस वक्त रात्रि के ग्यारह बज रहे हैं और तुम यहां बैठे हुये क्या कर रहे हो?

  12. एक विवाह (पंजाबी कहानी)

    एक विवाह (पंजाबी कहानी)

    विवाद लुधियाने में था। जाना दोराहा मंडी से था। फासला कुल सोलह मील। केवल इतनी दूरी के लिए ना बस का कोई अधिक खर्च था ना किसी टैक्सी या कार का।