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महाराष्ट्र बंद : मुंबई में बसों पर हमला, नागपुर में स्थिति तनावपूर्ण

By ankit@prabhasakshi.com | Publish Date: Jan 3 2018 11:44AM
महाराष्ट्र बंद : मुंबई में बसों पर हमला, नागपुर में स्थिति तनावपूर्ण

मुंबई/पुणे/नागपुर। महाराष्ट्र के पुणे में दो दिन पहले हुई हिंसा और उसके बाद अलग अलग इलाकों में हुये विरोध प्रदर्शनों के बाद बुलाये गये बंद के दौरान सरकारी परिवहन की बसों पर पथराव की छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो स्थिति सामान्य है। बंद की वजह से कई स्कूलों तथा बाजारों को बंद रखा गया है।

राज्य में दलित नेताओं के बंद के आह्वान के बीच मुंबई में एक बार फिर बसों को निशाना बनाया गया। दलित नेता भीमा-कोरेगांव लड़ाई की 200वीं सालगिरह के दौरान भड़की हिंसा का विरोध कर रहे हैं। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की आपदा प्रबंधन इकाई के एक अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने कलानगर इलाके (बांद्रा), धारावी, कामराज नगर, संतोष नगर, डिंडोशी और हनुमान नगर में ‘बेस्ट’ की 13 बसों में तोड़फोड़ की। पूर्वी उपनगरों में मंगलवार को प्रदर्शनों के कारण शहर में सड़क यातायात बाधित रहा। नागपुर में भी स्कूलों और बाजारों के बंद रहने के साथ स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पुणे में सरकारी परिवहन की बसों पर पथराव की कुछ घटनाओं को छोड़कर बंद शांतिपूर्ण रूप से शुरू हुआ। शहर में सुबह से बंद का मिला जुला असर देखने को मिला। कुछ दुकानों के शटर आधे खुले हुए हैं।

संयुक्त पुलिस आयुक्त शिवाजी बोडके ने कहा कि शहर में पथराव की घटनाएं हुई। न्यू काम्प्टे इलाके में पथराव में एक व्यक्ति घायल हो गया। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने हिंगना इलाके में एक सड़क को अवरुद्ध कर दिया जबकि कुछ स्थानों पर सड़कों पर टायर फूंके गए। शहर भर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। राज्य रिजर्व पुलिस बल की दो टुकड़ियां और 250 होम गार्ड तैनात किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने प्रदर्शन मार्च करने वाले लोगों से सड़कों को अवरुद्ध ना करने की अपील की है और अपनी मांगों का ज्ञापन पत्र इलाके में पुलिस थानों को देने के लिए कहा है।

उधर इस हिंसा को उकसावे का परिणाम बताते हुए कांग्रेस ने लोकसभा में घटना के लिए हिंदूवादी संगठनों और आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया, वहीं सरकार ने इस मुद्दे पर विपक्षी दल पर हिंसा की आग को बुझाने के बजाय उसे भड़काने का आरोप लगाया। लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस विषय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया और कहा कि वह दलितों से जुड़ी इस तरह की घटनाओं पर हमेशा चुप रहते हैं। कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री से इस मामले में सदन में बयान देने की मांग की। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश द्वारा घटना की जांच कराने की भी मांग की।

जवाब में संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी हिंसा की आग को बुझाने के बजाय उसे और भड़काने का काम कर रहे हैं। संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि खड़गे जी महाराष्ट्र की समस्या का निदान नहीं करना चाहते, बल्कि उसे भड़काना चाहते हैं। वह राजनीति करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश की हार के बाद कांग्रेस हताशा में है। महाराष्ट्र में शांति की कामना के बजाय वे इसे भड़काना चाह रहे हैं और जिस तरह अंग्रेज शासक ‘बांटो और राज करो’ की नीति अपनाते थे, उसी तरह कांग्रेस ‘फूट डालो और राज करो’ की राजनीति कर रहे हैं।