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एनआरसी के पहले मसौदे में नाम नहीं आए तो भी चिंता की बात नहीं: सोनोवाल

By anand@prabhasakshi.com | Publish Date: Jan 3 2018 5:33PM
एनआरसी के पहले मसौदे में नाम नहीं आए तो भी चिंता की बात नहीं: सोनोवाल

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (राष्ट्रीय नागरिक पंजी या एनआरसी) के पहले मसौदे में जिनके नाम शामिल होने से रह गए हैं उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि जाति अथवा समुदाय के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा और नागरिकता साबित करने के अवसर दिए जाएंगे। सोनोवाल ने कहा कि राज्य के नागरिकों की सूची राष्ट्रीय नागरिक पंजी को अंतिम रूप दिए जाने के बाद जो लोग अवैध आव्रजक पाए जाएंगे उनके साथ क्या करना चाहिए, इस बारे में केंद्र सरकार को मानवोचित तरीके से चिंतन करना चाहिए।

सोनोवाल ने कहा, ‘‘किसी के भी खिलाफ भेदभाव करने का सवाल ही नहीं उठता चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो, बंगाली हो या फिर नेपाली हो।’’ उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी के साथ समानता का व्यवहार होगा और लोगों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए मौके दिए जाएंगे ताकि उनके नाम एनआरसी के आने वाले मसौदों में शामिल किए जा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि एनआरसी ने प्रामाणिक नागरिकों को अवैध आव्रजकों से अलग करने का मौका दिया है। यह उन लोगों के लिए भी अच्छा है जो बीते चार दशक से ‘‘संदिग्ध अवैध आव्रजक’’ का कलंक लिए जी रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुताबिक समझदारी से काम कर रही है। अंतिम सूची के बाद जो लोग अवैध आव्रजक पाए जाएंगे उनके साथ भी मानवोचित व्यवहार होगा। उनके साथ क्या करना है इसे लेकर केंद्र सरकार को एक व्यवस्था बनानी होगी।’’ एनआरसी के मसौदे का एक हिस्सा 31 दिसंबर और एक जनवरी की दरमियान रात में प्रकाशित हुआ था। इसमें 3.29 करोड़ आवेदकों में से 1.9 करोड़ लोगों के नाम शामिल किए गए थे।