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अवैध खनन पर काबू के लिए उपग्रह से निगरानीः सरकार

अवैध खनन पर काबू के लिए उपग्रह से निगरानीः सरकार

देश में अवैध खनन का एक बड़ा मुद्दा करार देते हुए केंद्र सरकार ने आज कहा कि इस पर काबू के लिए उपग्रह से निगरानी सहित कई कदम उठाए गए हैं जिससे सैंकड़ों ऐसे मामले सामने आए और उनमें कार्रवाई की गयी। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने आज राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बड़े और छोटे दोनों प्रकार के खनिजों के अवैध खनन पर रोक के लिए कदम उठाए गए हैं।

 
उन्होंने कहा कि अवैध खनन पर रोक के लिए उपग्रहों की भी मदद ली जा रही है। जावडेकर पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे के बदले पूरक सवालों का जवाब दे रहे थे। उपग्रह की निगरानी से सैंकड़ों मामले सामने आए और उनमें कार्रवाई हुयी। उन्होंने हालांकि कहा कि कार्यान्वयन राज्य सरकार के पास है। रेत खनन से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इसके लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनायी गयी है और उपग्रह मैपिंग के बाद खनन की अनुमति दी गयी है। उन्होंने कहा कि पहली बार लाइसेंस देने का काम जिला स्तर पर शुरू किया गया है। इसके साथ ही यह व्यवस्था भी की गयी है कि एक ही बार कोड पर ट्रक बार बार नहीं जा सकेंगे। कोयले के अवैध खनन से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इस पर काबू के लिए राज्य और केंद्र को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि खनिजों के खनन की सभी परियोजनाओं के लिए पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृत प्राप्त करना अपेक्षित है।
 
जावडेकर ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि प्लास्टिक कचरा एकत्र किया जाना एक बड़ी चुनौती है और इसीलिए विस्तारित उत्पादक जवाबदेही (ईपीआर) प्रावधान लाए गए हैं। उन्होंने कहा कि ईपीआर के तहत उम्मीद की जाती है कि बड़े प्लास्टिक उत्पादक प्लास्टिक की बोतलें और अन्य चीजें वापस लें ताकि उनका पुन:चक्रण किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन गंभीर चुनौती है और अनुमानों के अनुसार 20 लाख टन कचरा एकत्र नहीं हो पाता। जावडेकर ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि राजमार्गों के दोनों ओर हरियाली हो सके। उन्होंने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय का प्रयास रेलवे के साथ मिलकर पटरियों के दोनों ओर पेड़ लगाने का भी है।
 

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