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विश्लेषण

राष्ट्रपति चुनाव में जादुई आंकड़ा एनडीए के पास

By बाल मुकुन्द ओझा | Publish Date: May 17 2017 11:12AM
राष्ट्रपति चुनाव में जादुई आंकड़ा एनडीए के पास

आगामी जुलाई में संपन्न होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा खेमे में चार राज्यों में अपनी सरकार बनाने के बाद बल्ले बल्ले है। अब राष्ट्रपति चुनाव का जादुई आंकड़ा भाजपा के पास है। 14वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में 4,896 सदस्य हैं, जिसमें 776 सांसद और 4,120 विधायक शामिल हैं। इन सबका कुल मत मूल्य 10,98,882 है। वर्तमान में प्रत्येक सांसद का मत मूल्य 708 है। सांसदों का कुल मत मूल्य 5,49,408 और विधायकों का कुल मत मूल्य 5,49,474 है। राज्यों में उत्तर प्रदेश विधानसभा का मत मूल्य सर्वाधिक 83,824 है। इसके बाद क्रमशः महाराष्ट्र विधानसभा का मत मूल्य 50,400, पश्चिम बंगाल का 44,394, आंध्र प्रदेश का 43,512 और बिहार विधानसभा का मत मूल्य 42,039 है। सिक्किम विधानसभा का मत मूल्य सबसे कम 224 है।

वर्तमान में एनडीए के पास 410 सांसद और 1691 विधायक हैं। एनडीए के पास 5 लाख 32 हजार 19 मत हैं जबकि जीत के लिए 5 लाख 49 हजार 442 मतों की जरूरत है। इस भांति 17 हजार 423 मत कम पड़ते हैं। आंध्र की वाईएसआर कांग्रेस एनडीए के साथ है। दूसरी तरफ तेलंगाना की सत्तारूढ़ टीआरएस ने एनडीए का साथ देने की घोषणा की है। वहीँ अन्ना डीएमके के पास एनडीए का साथ देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है क्योंकि तमिलनाडु की उसकी धुर विरोधी डीएमके विपक्ष के साथ है। अन्ना डीएमके और टीआरएस के पास कुल 59 हजार 224 मत हैं जो एनडीए उम्मीदवार की जीत आसान करने के लिए काफी हैं। वहीँ इस समय कांग्रेस काफी कमजोर स्थिति में है। उसके पास केवल 3 लाख 91 हजार 739 मत हैं। कांग्रेस को वामपंथियों के अलावा ममता, मायावती, समाजवादी आरजेडी, जेडीयू आदि का खुला समर्थन है। बीजेडी ढुलमुल स्थिति में है। इस समीकरण के बाद यह लगभग साफ है कि भाजपा अपना उमीदवार जिताने की स्थिति में है क्योंकि जादुई आंकड़ा उसके पास है।
 
भाजपा में आज भी लालकृष्ण आडवाणी नंबर वन पर हैं। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, सुषमा स्वराज, द्रोपदी मुर्मू, वेंकैया नायडू आदि नामों की चर्चा भी है। जानकार सूत्रों के अनुसार कोई चौंकाने वाला नाम भी सामने आ सकता है। कांग्रेस सहित समस्त विपक्ष चाहता है की वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी एक बार फिर कमान संभालें मगर आंकड़ों का साथ नहीं होने के कारण प्रणब बाबू तैयार नहीं हो रहे हैं। विपक्ष में गांधीजी के पोते गोपाल गाँधी, मीरा कुमार और शरद यादव के नामों की चर्चा है।
 
देश के 29 राज्यों में से भाजपा 12 पर काबिज है। वहीं कांग्रेस के पास 5 राज्य हैं। भाजपा को मिलाकर एनडीए 15 राज्यों पर काबिज है। इनमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखण्ड, असम, गोवा, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, मणिपुर, अरूणाचल, उत्तराखंड शामिल हैं। कांग्रेस के पास हिमाचल, कर्नाटक, मेघालय, नागालैंड, सिक्किम जैसे छोटे राज्य हैं। तमिलनाडू में अन्ना द्रमुक, पं. बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, बिहार में जनता दल यूनाईटेड और आर.जे.डी. तथा ओडिशा में बीजू जनता दल का शासन है। मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी केरल और त्रिपुरा में काबिज है। केंद्र शासित दिल्ली में आम आदमी पार्टी और अन्य में कांग्रेस है। देखा जाये तो बड़े राज्यों पर भाजपा और छोटे राज्यों पर कांग्रेस का शासन है। इस भांति भाजपा के मतों का मूल्य अधिक है। वर्तमान स्थिति का आकलन किया जाये तो भाजपा आगे है।
 
भारत के राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रणाली के एकल संक्रमणीय मत पद्धति से होता है। राष्ट्रपति को भारत की संसद के दोनों सदनों लोकसभा एवं राज्य सभा के साथ राज्य विधायिकाओं के निर्वाचित सदस्य पांच वर्ष के लिए निर्वाचित करते हैं। वोट आवंटित करने के लिए एक विधिमान्य फार्मूला तय किया गया है ताकि हर राज्य की जन संख्या और उस राज्य से विधान सभा के सदस्यों द्वारा मत डालने की संख्या के मध्य एक अनुपात रहे और राज्य विधान सभाओं के सदस्यों और सांसदों के बीच एक समानुपात की स्थिति बनी रहे। अगर किसी उम्मीदवार को बहुमत नहीं मिले तो एक स्थापित पद्धति है जिससे हारने वाले उम्मदवारों को प्रतियोगिता से हटाकर उसके मत अन्य उम्मीदवारों को हस्तान्तरित किये जाते हैं।
 
भारत में अब तक 13 व्यक्ति राष्ट्रपति का पद ग्रहण कर चुके हैं, जिनमें से प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 2 बार इस पद को सुशोभित किया है। राष्ट्रपति की पदावधि 5 वर्ष की होती है लेकिन राजेन्द्र प्रसाद 10 वर्ष से अधिक की अवधि तक राष्ट्रपति का पद धारण किये थे। इसका कारण यह था कि 1952 में राष्ट्रपति के प्रथम चुनाव के पूर्व ही 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा के द्वारा राष्ट्रपति के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद का चुनाव कर लिया गया था। संविधान के प्रवर्तन की तिथि अर्थात् 26 जनवरी, 1950 से लेकर 12 मई, 1952 तक राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति के पद पर रहे।
भारत में अब तक 13 बार राष्ट्रपति के चुनाव हुए हैं, जिनमें से एक बार, अर्थात् 1977 में, श्री नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध राष्ट्रपति चुने गये थे। शेष 12 बार राष्ट्रपति पद के चुनाव में एक से अधिक उम्मीदवार थे। डॉ. एस. राधाकृष्णन लगातार दो बार उपराष्ट्रपति तथा एक बार राष्ट्रपति के पद पर आसीन हुए। निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में वी.वी. गिरी ऐसे राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे, जिन्होंने कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत होते हुए भी उसके उम्मीदवार को पराजित किया था। अब तक नीलम संजीव रेड्डी एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हुए हैं, जो एक बार चुनाव में पराजित हुए तथा बाद में निर्विरोध निर्वाचित हुए।
 
- बाल मुकुन्द ओझा