1. तारेक फतेह को छोड़िए, और भी तरीकें हैं पाक को साधने के

    तारेक फतेह को छोड़िए, और भी तरीकें हैं पाक को साधने के

    हमें दुश्मन मुल्क से निपटने के लिए तारेफ फतेह जैसे छद्म नुस्खे आजमाने की बजाए बड़े विकल्पों पर विचार करना चाहिए, वर्ना गैरभरोसेमंद लोगों से भारत को बड़ा नुक्सान उठाना पड़ सकता है।

  2. J&K सरकार का धार्मिक यात्राओं पर खर्चा ज्यादा, लाभ कुछ नहीं

    J&K सरकार का धार्मिक यात्राओं पर खर्चा ज्यादा, लाभ कुछ नहीं

    राज्य सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण 2016 की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राज्य की अर्थव्यवस्था को इन धार्मिक यात्राओं से किसी भी प्रकार का लाभ नहीं होता है।

  3. बीच चौराहे बढ़ती रोड़ रेज की घटनाएं चिंताजनक

    बीच चौराहे बढ़ती रोड़ रेज की घटनाएं चिंताजनक

    हालात यह हो गए हैं कि देश में होने वाले कुल सड़क हादसों में 60 फीसदी मौतें रोड रेज के कारण होती हैं। यह कोई छोटा−मोटा आंकड़ा नहीं है और ना ही यह केवल हमारे देश की समस्या है।

  4. सुनने की फुर्सत हो तो आवाज़ है पत्थरों में

    सुनने की फुर्सत हो तो आवाज़ है पत्थरों में

    हरियाणा के हिसार क़िले में स्थित गूजरी महल आज भी सुल्तान फ़िरोज़शाह तुग़लक और गूजरी की अमर प्रेमकथा की गवाही दे रहा है। गूजरी महल भले ही आगरा के ताजमहल जैसी भव्य इमारत न हो, लेकिन दोनों की पृष्ठभूमि प्रेम पर आधारित है।

  5. सियाचिन से जीवित लौटना दूसरे जन्म के जैसा होता है

    सियाचिन से जीवित लौटना दूसरे जन्म के जैसा होता है

    इस सच्चाई के अतिरिक्त कि छह हजार के लगभग सैनिक इस युद्धक्षेत्र में पिछले 33 सालों में शहीद हो चुके हैं, सरकारी आंकड़ा 1022 का है। स्थिति यह है कि इस हिमखंड पर प्रत्येक दो दिनों में एक जवान की मृत्यु हो जाती है।

  6. अमेजन को उसकी हिमाकत के लिए सबक तो सिखाना चाहिए

    अमेजन को उसकी हिमाकत के लिए सबक तो सिखाना चाहिए

    दरअसल यह पहला मौका नहीं है। पहले भी भारतीय देवी देवताओं को अपमानित करते चित्र वाले उत्पादों को बाजार में उतारा जाता रहा है। समय−समय पर उसका विरोध भी किया जाता रहा है।

  7. भारत में काले धन की जननी है ईस्ट इण्डिया कम्पनी

    भारत में काले धन की जननी है ईस्ट इण्डिया कम्पनी

    मालूम हो कि सन १६०० में स्थापित ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया ट्रेडिंग कम्पनी वास्तव में समुद्री लुटेरों का एक संगठित गिरोह थी। ब्रिटेन की अंग्रेजी भाषा में उन दिनों ‘ट्रेडिंग’ का व्यावहरिक अर्थ- ‘लूट-पाट’ अथवा ‘जैसे-तैसे धन कमाना’ ही हुआ करता था।

  8. महज़ रस्म अदायगी तक सिमटते जा रहे हैं त्यौहार

    महज़ रस्म अदायगी तक सिमटते जा रहे हैं त्यौहार

    बदलते वक़्त के साथ तीज-त्यौहार भी पीछे छूट रहे हैं। कुछ दशकों पहले तक जो त्यौहार बहुत ही धूमधाम के साथ मनाए जाते थे, अब वे महज़ रस्म अदायगी तक ही सिमट कर रह गए हैं। इन्हीं में से एक त्यौहार है लोहड़ी।

  9. बिटकॉइन का चलन बढ़ने के साथ ही बढ़ी दुरुपयोग की संभावनाएँ

    बिटकॉइन का चलन बढ़ने के साथ ही बढ़ी दुरुपयोग की संभावनाएँ

    बिटकॉइन पर नजर रखने वालों का कहना है कि भारत में करीब 50 हजार लोग इंटरनेट पर बिटकॉइन समुदाय से जुड़े हैं और इनमें से करीब तीस हजार लोगों के पास बिटकॉइन है।

  10. बेंगलुरू की घटना हमारे पुरुषवादी समाज पर काला धब्बा

    बेंगलुरू की घटना हमारे पुरुषवादी समाज पर काला धब्बा

    महिलाओं को समाज से जोड़ने की बात भी इस समाज में होती है, लेकिन उनकी निजता और अस्मिता के साथ खेलना पुरूषवादी समाज में आम हो गया है, जो सामाजिक और भारतीय संस्कृति की दृष्टि से ठीक नहीं कहा जा सकता है।

  11. चीफ जस्टिस खेहर से सीख लें तो बदल सकती है तस्वीर

    चीफ जस्टिस खेहर से सीख लें तो बदल सकती है तस्वीर

    यदि रक्तदान के प्रति भी देश में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र में शीर्ष पदों पर आसीन लोग सीधे पहले करें तो इसका देश में व्यापक असर होगा। वैसे भी जनप्रतिनिधी तो समाज सेवा का दावा करते हैं।

  12. महेंद्र सिंह धोनी आप हमेशा ''महान'' कैप्टन रहोगे

    महेंद्र सिंह धोनी आप हमेशा ''महान'' कैप्टन रहोगे

    धोनी की कहानी अनंत है और वह ''पारस पत्थर'' की तरह, युवा खिलाड़ियों को निखारने में अपनी ऊर्जा लगातार लगाते रहे थे! कम सफल या तात्कालिक रूप से सफल न होने वाले खिलाड़ियों पर भी धोनी ने लगातार भरोसा दिखलाया।