1. दावों के विपरीत है ज्यादातर खाद्य व पेय उत्पादों की गुणवत्ता

    दावों के विपरीत है ज्यादातर खाद्य व पेय उत्पादों की गुणवत्ता

    बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से डच कंपनी एक्सेस टू न्यूट्रि्शन फाउंडेशन द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा तय मानकों के अनुसार यह जांच की गई।

  2. 26 सालों में सुरक्षा के नाम पर 7 हजार करोड़ डकार गया कश्मीर

    26 सालों में सुरक्षा के नाम पर 7 हजार करोड़ डकार गया कश्मीर

    यह भी एक चौंकाने वाला तथ्य हो सकता है कि कुछ साल पूर्व तक राज्य सरकार सुरक्षा संबंधी मद पर प्रति वर्ष 253 करोड़ की राशि खर्च करती रही थी लेकिन अब उसका अनुमान इस पर पांच सौ करोड़ का खर्चा होने का है।

  3. भोजन की बर्बादी रोकने के लिए सामाजिक चेतना लानी होगी

    भोजन की बर्बादी रोकने के लिए सामाजिक चेतना लानी होगी

    भारत ही नहीं, समूची दुनिया का यही हाल है। एक तरफ अरबों लोग दाने-दाने को मोहताज हैं, कुपोषण के शिकार हैं, वहीं रोज लाखों टन खाना बर्बाद किया जा रहा है।

  4. पहले शब्दों को तौलिए फिर बोलिए, जरूर होगा चमत्कार

    पहले शब्दों को तौलिए फिर बोलिए, जरूर होगा चमत्कार

    अपने शब्दों को तराशिए, तौलिए फिर बोलिए। परिणाम आपको स्वतः दिख जाएगा। वह पल दूर नहीं, जब आप महानता के मुसाफिर बन जाएंगे। बस इतना जरूर कीजिए कि आप महानता को धन, सम्पत्ति, वैभव या यश से मत आकिए।

  5. आंखें चली गयीं पर हौसला कायम, डॉक्टर बनने की चाहत

    आंखें चली गयीं पर हौसला कायम, डॉक्टर बनने की चाहत

    इंशा मुश्ताक आठ महीने बाद अपने स्कूल आकर काफी खुश हैं। घाटी में हिंसक प्रदर्शनों के दौरान 15 साल की इंशा को पैलेट गन के छर्रे लगने से उसकी आंखों की रोशनी चली गई थी।

  6. जीवन बचाने के लिए पानी की बर्बादी को रोकना होगा

    जीवन बचाने के लिए पानी की बर्बादी को रोकना होगा

    विश्व जल दिवस हर वर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है। आज विश्व में जल का संकट सर्वत्र व्याप्त है। विश्व में चहुंमुखी विकास का दिग्दर्शन हो रहा है। किंतु स्वच्छ जल मिल पाना कठिन हो रहा है।

  7. जल संरक्षण के प्रति हम सभी लापरवाह हैं

    जल संरक्षण के प्रति हम सभी लापरवाह हैं

    विडंबना यह है कि जल संरक्षण के तमाम तरीके केवल कागजों पर ही सिमट कर रह गए हैं। शुद्ध पेयजल की अनुपलब्धता और संबंधित ढेरों समस्याओं को जानने के बावजूद आज भी देश की बड़ी आबादी जल संरक्षण के प्रति सचेत नहीं है।

  8. जंगल हमारे जीवन की अमूल्य निधि, इसको बचाना होगा

    जंगल हमारे जीवन की अमूल्य निधि, इसको बचाना होगा

    पेड़ों की अंधाधुंध कटाई एवं सिमटते जंगलों की वजह से भूमि बंजर और रेगिस्तान में तब्दील होती जा रही है जिससे दुनियाभर में खाद्य संकट का खतरा मंडराने लगा है।

  9. जमीन का झगड़ा अदालतों के लिए सबसे बड़ा बोझ

    जमीन का झगड़ा अदालतों के लिए सबसे बड़ा बोझ

    दीवानी मामलों खासतौर से जमीन के मामलों का निपटारा होने में लंबा समय लगता है यहां तक की अदालतों की तारीख दर तारीख चक्कर काटते हुए पीढ़ियां गुजर जाती हैं।

  10. बच्चों के हाथों में खिलौना बंदूकें भी नहीं देखना चाहते कश्मीरी

    बच्चों के हाथों में खिलौना बंदूकें भी नहीं देखना चाहते कश्मीरी

    कश्मीर में सैंकड़ों ऐसे बच्चे हैं जिन्हें पटाखे फोड़ने या फिर खिलौना बंदूक के साथ खेलने पर अक्सर अपने माता-पिता की ओर से पिटाई का शिकार होना पड़ता है।

  11. बालिग होने से पहले ब्याह दी जाती है चार में से एक लड़की

    बालिग होने से पहले ब्याह दी जाती है चार में से एक लड़की

    देश में 27 फीसदी लड़कियों की शादी कानूनी प्रावधानों के अनुसार निर्धारित आयु 18 वर्ष की होने से पहले ही हो जाती है। आजादी के सात दशक बाद भी बाल विवाह जैसी कुरीति से छुटकारा नहीं पाना सभ्य समाज के लिए उचित नहीं माना जा सकता।

  12. मनोवैज्ञानिक तरीकों से रोके जा सकते हैं बाल अपराध

    मनोवैज्ञानिक तरीकों से रोके जा सकते हैं बाल अपराध

    वैयक्तिक स्वतंत्रता में वृद्धि के कारण नैतिक मूल्य बिखरने लगे हैं, इसके साथ ही अत्यधिक प्रतिस्पर्धा ने बालकों में विचलन को पैदा किया है। कम्प्यूटर और इंटरनेट की उपलब्धता ने इन्हें समाज से अलग कर दिया है।

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