1. गंदे बोलों की राजनीति से लोकतांत्रिक परम्पराएं ध्वस्त

    गंदे बोलों की राजनीति से लोकतांत्रिक परम्पराएं ध्वस्त

    रामायण और महाभारत के युद्धों में भी कभी ऐसे सियासी बोल सुनने को नहीं मिले जो देशवासियों को इस बार के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सुनने को मिल रहे हैं।

  2. उद्योगपतियों की कर्जमाफी पर राहुल गांधी की गलतबयानी

    उद्योगपतियों की कर्जमाफी पर राहुल गांधी की गलतबयानी

    कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का हर चुनावी सभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बड़े उद्योगपतियों का हिमायती और अपने को गरीबों, किसानों का मसीहा साबित करने पर ही पूरा जोर होता है।

  3. चुनाव का चौथा चरण तय करेगा बुंदेलखंड का भाग्य भी

    चुनाव का चौथा चरण तय करेगा बुंदेलखंड का भाग्य भी

    बुंदेलखंड की सीमाएं मध्य प्रदेश से सटी हुई हैं। बुंदेलखंड जैसी भौगौलिक स्थितियां मध्य प्रदेश के जिलों की भी हैं, लेकिन वहां की सरकारों ने अपने क्षेत्र के शहरों को काफी विकसित कर लिया है। इसको देखकर बुंदेलखंड वालों की नाराजगी और भी बढ़ जाती है।

  4. घटती हिंदू आबादी पर सच ही तो कहा है किरण रिजिजू ने

    घटती हिंदू आबादी पर सच ही तो कहा है किरण रिजिजू ने

    केंद्रीय मंत्री के बयान पर राजनीतिक हल्ला कर रहे लोग कांग्रेस के आरोप पर मुंह में गुड़ दबा कर क्यों बैठ गए थे? रिजिजू ने अपनी तरफ से कुछ नहीं कहा है, बल्कि कांग्रेस के झूठे आरोप पर अरुणाचल प्रदेश की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत की है।

  5. राहुल गांधी को भी स्थापित करे इसरो (राजनीतिक व्यंग्य)

    राहुल गांधी को भी स्थापित करे इसरो (राजनीतिक व्यंग्य)

    मेरे विचार से हमें इसरो की ही सेवाएं लेनी चाहिए। जब वे देश और विदेश के 104 उपग्रह एक साथ अंतरिक्ष में स्थापित कर सकते हैं, तो क्या हमारे छोटे से राहुल बाबा को दिल्ली में प्रधानमंत्री की कुरसी पर स्थापित नहीं कर सकते।

  6. बलात्कारियों को सजा देने का सही तरीका बताया उमा भारती ने

    बलात्कारियों को सजा देने का सही तरीका बताया उमा भारती ने

    उमा भारती ने आगरा में जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि जिन्होंने लड़कियों के साथ दुष्कर्म या बलात्कार किए हैं, ऐसे दुष्कर्मियों या बलात्कारियों को उन्हीं लड़कियों के सामने उल्टा लटका कर मार-मारकर चमड़ी उधेड़ देनी चाहिए।

  7. जानबूझकर भाई और बहू के चुनाव क्षेत्र तक सिमटे नेताजी

    जानबूझकर भाई और बहू के चुनाव क्षेत्र तक सिमटे नेताजी

    अखिलेश के चचा शिवपाल यादव भी 11 मार्च का बेताबी से इंतजार कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि यह दिन अखिलेश को उनकी असली हैसियत समझा देगा। शिवपाल ही नहीं नेताजी मुलायम सिंह यादव भी अखिलेश से दूरी बनाकर चल रहे हैं।

  8. उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रचार में छाया SCAM और जन्मकुंडली

    उत्तर प्रदेश के चुनाव प्रचार में छाया SCAM और जन्मकुंडली

    शुरू में लगा था कि अखिलेश यादव ''काम बोलता है'' के नारे पर ही चुनाव लड़ेंगे, लेकिन कांग्रेस से गठबन्धन के बाद स्थिति बदल गयी है। सपा को एहसास हुआ कि उनका अपना नारा जमीनी स्तर पर लोगों को प्रभावित नहीं कर रहा है।

  9. विचार को पकड़े रहेंगे तो जीवन भर कार्यकर्ता ही बने रहेंगे

    विचार को पकड़े रहेंगे तो जीवन भर कार्यकर्ता ही बने रहेंगे

    नेता बनना है, तो विचार के कंधे पर चढ़कर पार्टी का झंडा पकड़ो। फिर उसके डंडे पर चाहे जो झंडा लगा लो। मुझे कार्यकर्ता बने 40 साल हो गये। अब मैंने नेता बनने का निश्चय कर लिया है। इसलिए अब मैं विचार के नहीं, व्यवहार के साथ हूं।

  10. फटा कुर्ता दिखाकर राहुल गांधी ने की बचकाना हरकत

    फटा कुर्ता दिखाकर राहुल गांधी ने की बचकाना हरकत

    क्या कोई कल्पना कर सकता है कि इन्दिरा गांधी के पौत्र और राजीव-सोनिया गांधी के पुत्र की आज यह हालत हो गई है। वह फटा कुर्ता पहनने को विवश हैं। लेकिन फटे कुर्ते वाले छुटि्टयां मनाने विदेश कैसे चले जाते हैं।

  11. वाद, विवाद, समाजवाद और विकासवाद (राजनीतिक व्यंग्य)

    वाद, विवाद, समाजवाद और विकासवाद (राजनीतिक व्यंग्य)

    संसद से लेकर सड़क तक, घर से लेकर बाजार तक, जहां देखो वहां बेसिर पैर के विवाद। 70 साल हो गये हमें आजाद हुए; पर हम अभी तक तय नहीं कर पाए हैं कि विकास का सही रास्ता क्या है?

  12. उप्र में नेताओं के लिए धर्मनिरपेक्षता के अलग अलग मायने

    उप्र में नेताओं के लिए धर्मनिरपेक्षता के अलग अलग मायने

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय स्तर के नेता मजहब व वोट बैंक की राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं। विडम्बना यह है कि इसके बाद भी धर्मनिरपेक्षता की दुहाई दी जाती है।

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