1. सिद्धू के आने से पंजाब कांग्रेस में बढ़ सकती है कलह

    सिद्धू के आने से पंजाब कांग्रेस में बढ़ सकती है कलह

    अमरिन्दर को कांग्रेस हाईकमान का दबाव या हस्तक्षेप मंजूर नहीं है। वहीं सिद्धू को राहुल गांधी ने कांग्रेस में शामिल किया है। इसलिए पंजाब कांग्रेस में इन्हें हाईकमान का प्रतिनिधि माना जायेगा।

  2. पार्टी हित में राहुल की कम सक्रियता चाहते हैं कांग्रेस क्षत्रप

    पार्टी हित में राहुल की कम सक्रियता चाहते हैं कांग्रेस क्षत्रप

    बताया जा रहा है कि अमरिन्दर सिंह अपनी मर्जी से पंजाब चुनाव का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने पहले ही यह कह दिया था कि राहुल गांधी पंजाब में ज्यादा हस्तक्षेप न करें। वह जितने सक्रिय होंगे पार्टी को उतना ही नुकसान होगा।

  3. तस्वीर की जगह गांधी विचार पर बहस होनी चाहिए

    तस्वीर की जगह गांधी विचार पर बहस होनी चाहिए

    हंगामा खड़ा कर रहे राजनीतिक दलों और बुद्धिजीवियों से एक प्रश्न यह जरूर पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने खादी और गांधी के विचार के लिए अब तक क्या किया है?

  4. आरोप निराधार नहीं पर समूची सेना पर प्रश्नचिह्न गलत

    आरोप निराधार नहीं पर समूची सेना पर प्रश्नचिह्न गलत

    शिकायतों में रत्ती भर भी झूठ नहीं है, इस बात को सभी जानते हैं, किन्तु सवाल वही है कि क्या कुछ अधिकारियों द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार के लिए समस्त सेना पर प्रश्नचिन्ह उठाया जाना न्यायसंगत है।

  5. सेना की साख में किसी भी तरह का सुराख होना चिन्तनीय

    सेना की साख में किसी भी तरह का सुराख होना चिन्तनीय

    सेना की साख में यह पहला सुराख नहीं है। समय−समय पर अनेक सुराख कभी भ्रष्टाचार के नाम पर, कभी सेवाओं में धांधली के नाम पर, कभी घटिया साधन−सामग्री के नाम पर, कभी राजनीतिक स्वार्थों के नाम पर होते रहे हैं।

  6. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विकास का मुद्दा पीछे छूट रहा

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विकास का मुद्दा पीछे छूट रहा

    इस बार के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विचार और विकास के मुद्दे पीछे छूट रहे हैं। गठबंधन और दूसरों के विभाजन में राजनीतिक दलों द्वारा अपने लिए कोई उम्मीद तलाशी जा रही है।

  7. जिम्मेदारी का जवाब जातिवाद से देना चाहती हैं मायावती

    जिम्मेदारी का जवाब जातिवाद से देना चाहती हैं मायावती

    मायावती ने सत्ता में रहते हुए अपनी जिम्मेदारियों का उचित निर्वाह किया होता, तो अगले ही चुनाव में उन्हें बाहर का रास्ता न देखना पड़ता और न ही आज यह बताना पड़ता कि किस जाति के कितने प्रत्याशी उतार रही हैं।

  8. सपाई दंगल में कौन जीता, कौन हारा का फैसला करना मुश्किल

    सपाई दंगल में कौन जीता, कौन हारा का फैसला करना मुश्किल

    किसी की छवि में उतार−चढ़ाव हुआ करता है लेकिन रिश्ते नहीं बदला करते। अखिलेश के पिता मुलायम सिंह हैं, तो सगे चाचा शिवपाल ने भी उन्हें गोद में खिलाया है। कैसे कहा जाए कौन जीता कौन हारा।

  9. कश्मीर का भविष्य राजनीतिक इच्छाशक्ति और सोच पर

    कश्मीर का भविष्य राजनीतिक इच्छाशक्ति और सोच पर

    पचास सालों ने कश्मीर शब्द को बच्चे-बच्चे की जुबान पर चढ़ाने में इतनी भूमिका नहीं निभाई जितनी उन 27 सालों के अरसे ने निभाई है जिनके दौरान कश्मीर में आतंकवाद फैला।

  10. विपक्ष बर्बादी का अलाप करता रहा, हक़ीक़त कुछ और थी

    विपक्ष बर्बादी का अलाप करता रहा, हक़ीक़त कुछ और थी

    नोटबन्दी ने एक ही झटके में नकली नोटों का जखीरा निष्प्रभावी कर दिया। विपक्ष जिस बर्बादी का अलाप कर रहा था, उसमें भी सच्चाई नहीं थी। इसके विपरीत नोटबन्दी की अवधि में रबी की बोआई बढ़ी, वहीं कर संग्रह व आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि हुई है।

  11. 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में नोटबंदी ही है अहम मुद्दा

    5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में नोटबंदी ही है अहम मुद्दा

    इस बार के चुनावी नतीजों में जहां केन्द्र सरकार द्वारा खेले गए नोटबंदी के जुए का असर साफ दिखाई देगा, वहीं चुनाव आयोग के नए निर्देश और हाल ही में सर्वोच्च अदालत द्वारा दिए गए निर्णय से भी चुनाव प्रभावित होंगे।

  12. शांति की बयार के बीच बर्फबारी से कश्मीर फिर बना स्वर्ग

    शांति की बयार के बीच बर्फबारी से कश्मीर फिर बना स्वर्ग

    शांति की बयार के बीच होने वाली बर्फबारी ने एक बार फिर कश्मीर को धरती का स्वर्ग बना दिया है। दो साल पहले तो यह धरती का नर्क बन गया था इसी बर्फबारी के कारण।

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