1. सत्रह दलों की बैठक पर भारी पड़ी मोदी−नीतीश भेंट

    सत्रह दलों की बैठक पर भारी पड़ी मोदी−नीतीश भेंट

    जाहिर तौर पर इस बैठक का स्वरूप व्यापक था। दिग्गजों की कोई कमी नहीं थी। चर्चा थी कि बैठक में कोई बड़ा फैसला हो सकता है। दूसरी तरफ केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक साथ थे।

  2. कश्मीरी पंडितों का अपना वोट-बैंक होता तो हालात यह नहीं होते

    कश्मीरी पंडितों का अपना वोट-बैंक होता तो हालात यह नहीं होते

    लगभग सत्ताईस साल हो गए हैं पंडितों को बेघर हुए। इनके बेघर होने पर आज तक न तो कोई जांच-आयोग बैठा, न कोई स्टिंग आपरेशन हुआ और न संसद या संसद के बाहर इनकी त्रासद-स्थिति पर कोई बहसबाजी ही हुई।

  3. AMU में जो हुआ वही BHU में होता तब क्या होता?

    AMU में जो हुआ वही BHU में होता तब क्या होता?

    मान लीजिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जो हुआ अगर यही नियम काशी हिंदू विश्वविद्यालय में नवरात्रों के समय पर कर दिया जाता तो क्या धर्मनिरपेक्षता प्रसव पीड़ा से कराह नहीं उठती?

  4. उप्र में अपराध बढ़ रहे, सरकार-पुलिस का पुराना रवैया जारी

    उप्र में अपराध बढ़ रहे, सरकार-पुलिस का पुराना रवैया जारी

    उत्तर प्रदेश में नयी सरकार बनने के बाद सैंकड़ों पुलिस अधिकारी इधर से उधर हो गये परन्तु अखबार के पन्नों पर अपराध की खबरें आज भी वैसे ही जमी हुयीं हैं जैसे सपा सरकार के समय थीं।

  5. शिवराज सरकार को उखाड़ पाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं

    शिवराज सरकार को उखाड़ पाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं

    मध्य प्रदेश में प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस 13 साल से सत्ता से बाहर है। प्रदेश में भाजपा सरकार के 13 साल पूरे होने के बाद भी एंटी-इनकंबेंसी जैसा कोई बाहरी माहौल दिखाई नहीं दे रहा।

  6. मोदी के कड़े निर्णयों को पसंद करती है जनता, विपक्ष भी समझे

    मोदी के कड़े निर्णयों को पसंद करती है जनता, विपक्ष भी समझे

    बड़ी स्पष्ट सी बात है। आम जनता कड़े निर्णयों की कायल है। विपक्ष आज भी हिन्दुस्तान की अवाम की भावनाओं को समझने में विफल रहा है। देश की अस्मिता को लेकर सारा देश आज एक है।

  7. रोष भरे बयानों, कड़े प्रस्तावों से ही लड़ेंगे आतंकवाद से?

    रोष भरे बयानों, कड़े प्रस्तावों से ही लड़ेंगे आतंकवाद से?

    आतंकवाद से लड़ना है तो दृढ़ इच्छा-शक्ति चाहिए। विश्व की आर्थिक और सैनिक रणनीति को संचालित करने वाले देश अगर ईमानदारी से ठान लें तो आतंकवाद पर काबू पाया जा सकता है।

  8. विदेश यात्राओं पर सवाल उठाने से पहले उपलब्धियाँ देखें

    विदेश यात्राओं पर सवाल उठाने से पहले उपलब्धियाँ देखें

    यद्यपि मजबूत विदेश नीति की बुनियाद मजबूत घरेलू नीति ही होती है। वह भारत, जहाँ सम्पूर्ण विश्व का छठवां भाग निवास करता है, हमेशा अपनी शक्ति से बहुत कम प्रहार करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह नियम मानने वाला देश रहा है।

  9. कोयला घोटाला मामले में आया फैसला बेईमानों को सबक

    कोयला घोटाला मामले में आया फैसला बेईमानों को सबक

    भ्रष्टाचार के इन ढेर सारे मामलों की तरह कोयला घोटाला भी भ्रष्ट नौकरशाही और बेईमान कारोबारियों के गठजोड़ की तरफ इशारा करता है। यह पद के दुरुपयोग का मामला भी है, जिसके बिना कोई घोटाला संभव नहीं हो सकता।

  10. मनमोहन और मोदी सरकार के बीच जमीन-आसमान का अंतर

    मनमोहन और मोदी सरकार के बीच जमीन-आसमान का अंतर

    कार्यशैली और घोटालों के मामले में मनमोहन सिंह व मोदी सरकार के बीच जमीन−आसमान का अन्तर है। इस तथ्य को देश का आम जनमानस भी स्वीकार करता है। हालिया चुनाव परिणामों ने भी यह बात साबित की है।

  11. दो करोड़ रोजगार हर वर्ष देने का वादा रह गया अधूरा

    दो करोड़ रोजगार हर वर्ष देने का वादा रह गया अधूरा

    भाजपा ने हर वर्ष दो करोड़ रोजगार मुहैया कराने की वादा किया था, इस पर सरकार मौन है। मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, स्मार्ट सिटी, स्वच्छ भारत और गुड गवर्नेंस के नारे तो नजर आते हैं लेकिन रोजगार की बात सिरे से गायब है।

  12. देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर ले आई मोदी सरकार

    देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर ले आई मोदी सरकार

    मोदी सरकार न केवल फैसले ले रही है, बल्कि पारदर्शी और प्रभावी तरीके से लागू भी कर रही है। जबकि पूर्व सरकार की नीतियों से देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बिगड़ रही थी।

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