1. नेता चारा खाए तो चूहा शराब क्यों नहीं पिये (व्यंग्य)

    नेता चारा खाए तो चूहा शराब क्यों नहीं पिये (व्यंग्य)

    जब नेता पशुओं का चारा खा सकते हैं, तो चूहे शराब क्यों नहीं पी सकते ? बिहार में सब कुछ हो सकता है। बिहार में चूहा साहित्य में नया अध्याय किसी रोचक किस्से से कम नहीं है।

  2. बदलाव की राह पर कांग्रेस, फूंक-फूंक कर उठा रही कदम

    बदलाव की राह पर कांग्रेस, फूंक-फूंक कर उठा रही कदम

    आज देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को ऐसे नेताओं की महत्ती आवश्यकता है जो आसमानी राजनीति से हट कर जमीनी स्तर पर चुनौतियों व समस्याओं का नए जोश के साथ का सामना करें और आम जनता के बीच खोया हुआ विश्वास हासिल करें।

  3. लाहौर, कराची पर हमला कर पाक को अधमरा करें

    लाहौर, कराची पर हमला कर पाक को अधमरा करें

    पाकिस्तानी फौज बदलने वाली नहीं है, तो हम किस रणनीति की प्रतीक्षा कर रहे हैं? क्यों न इस बार लाहौर और कराची पर सर्जिकल स्ट्राइक कर हम पाकिस्तान को अधमरा कर दें?

  4. केरल में विचारों की लड़ाई विचारों से लड़ें वामपंथी दल

    केरल में विचारों की लड़ाई विचारों से लड़ें वामपंथी दल

    सेवा और संस्कार के क्षेत्र में वामपंथी संघ के सामने नहीं टिकते। अतः उनके पास हिंसा ही एकमात्र रास्ता है; पर इतिहास गवाह है कि विचारों की लड़ाई विचारों से ही लड़ी जाती है।

  5. कश्मीर में गठबंधन सरकार के पांव तले से जमीन खिसकी

    कश्मीर में गठबंधन सरकार के पांव तले से जमीन खिसकी

    कश्मीर के हालात यह स्पष्ट करते हैं कि गठबंधन सरकार के पांव तले से जमीन खिसक चुकी है। राजनीतिक गतिविधियों के लौट आने की बातें यूं हवा में धूल के गुब्बार की तरह छंट जाएंगी किसी ने सोचा नहीं था।

  6. नक्सल विरोधी रणनीति अब तक नहीं बना पाई है सरकार

    नक्सल विरोधी रणनीति अब तक नहीं बना पाई है सरकार

    साल 2014 में केंद्र में सरकार बनने के बाद कहा गया था कि सरकार एक ''एंटी नक्सल स्ट्रैटजी'' बनायेगी। तीन साल गुजर गये, लेकिन अभी तक ऐसी कोई स्ट्रैटजी नहीं है। इस मामले में आज भी सरकार एडहॉक सिस्टम से चल रही है।

  7. दम तोड़ते मजदूर आंदोलनों के लिए मजदूर नेता जिम्मेदार

    दम तोड़ते मजदूर आंदोलनों के लिए मजदूर नेता जिम्मेदार

    आज मजदूर आंदोलन लगभग दम तोड़ता जा रहा है। इसके कई कारण रहे हैं। श्रमिकों नेताओं ने समय रहते सोच में बदलाव लाने पर जोर नहीं दिया और इसका प्रभाव मजदूर आंदोलनों को पीछे धकेलने के रूप में सामने आया।

  8. इसलिए लगातार चुनाव हारती जा रही है आम आदमी पार्टी

    इसलिए लगातार चुनाव हारती जा रही है आम आदमी पार्टी

    जब केजरीवाल ने सत्ता संभाली थी, तो लोगों में एक तरह का विश्वास था कि दिल्ली की काया पलटने वाली है। केजरीवाल ने भी प्रचार के माध्यम से जनता को लुभाने में अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

  9. अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में मिला वादाखिलाफी का सबक

    अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में मिला वादाखिलाफी का सबक

    दिल्लीवासियों ने वादाखिलाफी का सबक आप को सिखाया। भाजपा और अन्य दलों को भी सचेत होने की जरूरत है क्योंकि उन्हें भी जनता की कसौटी पर खरा उतरना होगा।

  10. पिक्चर अभी बाकी हैः आप को बड़ा झटका जल्द लगेगा

    पिक्चर अभी बाकी हैः आप को बड़ा झटका जल्द लगेगा

    2015 के विधानसभा चुनावों में 70 में से 67 सीटें जीतने वाली यह आम आदमी पार्टी का पतन शुरू हो चुका है। लाभ का पद मामले पर 21 आप विधायकों की सदस्यता पर खतरा मंडरा रहा है।

  11. लालबत्ती के आतंक से मुक्ति की नई सुबह

    लालबत्ती के आतंक से मुक्ति की नई सुबह

    जो राजनीति में आते ही प्रदर्शन, अहंकार एवं रौब गांठने के लिये हैं, ऐसे ही लोग जोड़−तोड़ करके लालबत्ती की गाड़ियां लेते थे और फिर समाज, प्रशासन व पुलिस में अपना अनुचित प्रभाव जमाते थे।

  12. महापुरुषों के नाम पर छुट्टी की जगह ज्यादा काम होना चाहिए

    महापुरुषों के नाम पर छुट्टी की जगह ज्यादा काम होना चाहिए

    ये बिलकुल सही बात है कि ऐसी छुट्टी की परंपरा बंद होनी चाहिए और ऐसे मौकों पर स्कूलों में एक-दो घंटे का विशेष सत्र आयोजित कर संबंधित महापुरुष के बारे में बच्चों को जानकारी दी जानी चाहिए।

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