1. सपा के 47 पर सिमटने के कारणों में आजम की बदजुबानी भी

    सपा के 47 पर सिमटने के कारणों में आजम की बदजुबानी भी

    राज्यपाल के साथ बतौर मुख्यमत्री अखिलेश यादव का संवाद शालीनता पूर्ण था। वह संवैधानिक पद की मर्यादा का ध्यान रखते थे, लेकिन आज़म खां के प्रकरण पर अखिलेश लाचार नजर आते थे।

  2. अटकाती नहीं, विधेयकों को और सशक्त बनाती है राज्यसभा

    अटकाती नहीं, विधेयकों को और सशक्त बनाती है राज्यसभा

    इसमें कोई दो राय नहीं कि संविधान के निर्माताओं ने दो सदनों वाली विधायिका का फैसला ‘‘उद्देश्यपूर्वक और सोच-समझकर’’ लिया था और इसका मकसद ‘‘पुनर्विचार की जगह’’ मुहैया कराना था।

  3. दुल्हन वही जो पिया मन भाये, नेता वही जो वोट दिलाये

    दुल्हन वही जो पिया मन भाये, नेता वही जो वोट दिलाये

    जब से पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आये हैं, हमारे प्रिय शर्मा जी भी इसी स्थिति में हैं। हर बार वे होली काफी धूमधाम से मनाते थे। तैयारी तो इस बार कुछ अधिक ही थी।

  4. कृषि के माध्यम से उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ाएँ आदित्यनाथ

    कृषि के माध्यम से उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ाएँ आदित्यनाथ

    आदित्यनाथ योगी जी को उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र के विकास के लिए कलाम साहेब के फार्मूले आजमाने चाहिए। डॉ. कलाम के विजन डॉक्यूमेंट में इस पर प्रकाश डाला गया है।

  5. कानून व्यवस्था सुधारने को जनता ने भाजपा को सौंपी गद्दी

    कानून व्यवस्था सुधारने को जनता ने भाजपा को सौंपी गद्दी

    वास्तविकता के धरातल पर सर्वमान्य तथ्य सिर्फ यही है कि भ्रष्टाचार एवं बिगड़ी कानून व्यवस्था से आजिज आ चुकी उत्तर प्रदेश की जनता ने लगभग एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी को सत्ता सौंपी है।

  6. चुनाव आते ही कश्मीर में शुरू हो जाती हैं राजनीतिक हत्याएं

    चुनाव आते ही कश्मीर में शुरू हो जाती हैं राजनीतिक हत्याएं

    कश्मीर में चुनावों की घोषणा हमेशा ही खूनी लहर इसलिए आती है क्योंकि चुनाव रोकने की अपनी मुहिम को अंजाम देने की खातिर आतंकी राजनीतिज्ञों को निशाना बनाना आरंभ कर देते हैं।

  7. मणिशंकर अय्यर का सुझाव राहुल की नेतृत्व क्षमता पर सवाल

    मणिशंकर अय्यर का सुझाव राहुल की नेतृत्व क्षमता पर सवाल

    अय्यर का जो सुझाव है उसका मतलब यह भी है कि पार्टी नेता भी अब मानने लगे हैं कि कांग्रेस में अपने बलबूते जीतने की शक्ति नहीं रही। यह अप्रत्यक्ष रूप से राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल भी है।

  8. उत्तर प्रदेश ने आखिर नरेन्द्र मोदी को ले लिया गोद

    उत्तर प्रदेश ने आखिर नरेन्द्र मोदी को ले लिया गोद

    विधानसभा चुनाव परिणाम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कथन सही सबित हुआ कि उत्तर प्रदेश ने उन्हें गोद ले लिया है। जिन्होंने उन्हें बाहरी बताया था उनके सामने अब मुंह छिपाने कि नौबत है।

  9. मुलायम की खोई इज्जत उन्हें कैसे वापस मिलेगी?

    मुलायम की खोई इज्जत उन्हें कैसे वापस मिलेगी?

    विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद समाजवादी पार्टी कह रही है कि वह हार की समीक्षा करेगी। मगर यक्ष प्रश्न यह है कि मुलायम की खोई इज्जत उन्हें वापस कैसे मिलेगी।

  10. आत्मसम्मान की बलि देकर परदेस में रहने से अच्छा है...

    आत्मसम्मान की बलि देकर परदेस में रहने से अच्छा है...

    अमरीका अब उतना सुरक्षित नहीं रह गया है। नस्लवादियों की आंखों में भारतीय या ऐसे ही दूसरे मुल्कों के लोग खटकने लगे हैं। उनके कथित राष्ट्रवाद को भड़काने में ट्रम्प ने आहूति देने में कसर बाकी नहीं रखी।

  11. राष्ट्रीय एकता और अखण्डता का प्रतीक है होली का त्योहार

    राष्ट्रीय एकता और अखण्डता का प्रतीक है होली का त्योहार

    इस दिन हर तरफ लोग मस्ती में झूमते व एक दूसरे पर अबीर−गुलाल लगाते व रंगों की वर्षा करते दिखाई देते हैं। यह त्योहार सामाजिक समानता, राष्ट्रीय एकता और अखण्डता तथा विभिन्नता में एकता का साक्षात प्रतीक है।

  12. विधानसभा चुनावों में सिर चढ़कर बोला मोदी का जादू

    विधानसभा चुनावों में सिर चढ़कर बोला मोदी का जादू

    यूपी में मोदी का जादू जमकर चला। मोदी की सुनामी के आगे उनके विरोधी ढेर हो गए। यह भी पूरी तरह साफ हो गया कि यूपी में जातीय दावे फेल हो गए और मतदाताओं ने जातीय भंवर से निकल कर साफ सुथरी सरकार के लिए अपना मत दिया।

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