1. आदर्श चुनाव आचार संहिता का मखौल उड़ाते हैं नेता

    आदर्श चुनाव आचार संहिता का मखौल उड़ाते हैं नेता

    सबसे बड़ी विडंबना तो यह है कि आचार संहिता लागू होते ही राजनीतिक अनाचार का दौर शुरू हो जाता है। दल−बदल, गाली−गलौज, कालेधन का चुनाव प्रचार में प्रयोग का प्रयास, यह सब धड़ल्ले से होने लगता है।

  2. सपा घोषणापत्र में वादे तो लोकलुभावन, पर पूरे कैसे होंगे?

    सपा घोषणापत्र में वादे तो लोकलुभावन, पर पूरे कैसे होंगे?

    सपा ने यह नहीं बताया है कि जो लोकलुभावन वायदे किये हैं आखिर वह उन्हें किस प्रकार से पूरा करेगी ? सपा सरकार ने विगत चुनावों से पहले जो वादे किये थे उनमें से अधिकांश आधे अधूरे हैं तथा कुछ में तो हाथ भी नहीं डाला गया है।

  3. गणतंत्र की सफलता हमारी एकजुटता पर निर्भर है

    गणतंत्र की सफलता हमारी एकजुटता पर निर्भर है

    26 जनवरी, 1950 के दिन भारत को गणतांत्रिक राष्ट्र घोषित किया गया था। इसी दिन स्वतंत्र भारत का नया संविधान लागू हुआ था जिसके माध्यम से नागरिकों को कई अधिकार मिले।

  4. गठबंधन को आकार देकर राजनीति में आ ही गयीं प्रियंका!

    गठबंधन को आकार देकर राजनीति में आ ही गयीं प्रियंका!

    जिस तरह अहमद पटेल ने गठबंधन के मामले में प्रियंका का नाम लेकर ट्वीट किया उससे भी साफ जाहिर है कि प्रियंका विधिवत रूप से सक्रिय राजनीति में आ चुकी हैं।

  5. क्या कश्मीर मसला हल कर पाएगा अमेरिकी फार्मूला

    क्या कश्मीर मसला हल कर पाएगा अमेरिकी फार्मूला

    बताया जाता है कि कश्मीर समस्या के इस प्रकार के हल के लिए सभी पक्ष ‘राजी’ हैं। बस इसकी औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं जिसके लिए सर्वदलीय हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं की बातचीत भारतीय सरकार से होनी बाकी है।

  6. मनमोहन वैद्ध के बयान पर हंगामा क्यों है बरपा?

    मनमोहन वैद्ध के बयान पर हंगामा क्यों है बरपा?

    मनमोहन वैद्य के बयान में ऐसा कुछ नहीं था, जिस पर इतना हंगामा किया जाए। उनके बयान में तो भीमराव अंबेडकर का सम्मान निहित था। वैद्य के बयान में तीन प्रमुख बिन्दु थे।

  7. निराश कामकाजी वर्ग की आशा बन गये डोनाल्ड ट्रम्प

    निराश कामकाजी वर्ग की आशा बन गये डोनाल्ड ट्रम्प

    ट्रम्प ने आव्रजन-विरोधी अपने बयानों के माध्यम से एक ओर जहां कामकाजी वर्ग की निराशा को अपने पक्ष में मोड़ा तो वहीं मुसलमानों के खिलाफ की गयी विभिन्न टिप्पणियों के जरिए उन्होंने दक्षिणपंथी सोच रखने वालों को अपने साथ कर लिया।

  8. सिद्धू के आने से पंजाब कांग्रेस में बढ़ सकती है कलह

    सिद्धू के आने से पंजाब कांग्रेस में बढ़ सकती है कलह

    अमरिन्दर को कांग्रेस हाईकमान का दबाव या हस्तक्षेप मंजूर नहीं है। वहीं सिद्धू को राहुल गांधी ने कांग्रेस में शामिल किया है। इसलिए पंजाब कांग्रेस में इन्हें हाईकमान का प्रतिनिधि माना जायेगा।

  9. पार्टी हित में राहुल की कम सक्रियता चाहते हैं कांग्रेस क्षत्रप

    पार्टी हित में राहुल की कम सक्रियता चाहते हैं कांग्रेस क्षत्रप

    बताया जा रहा है कि अमरिन्दर सिंह अपनी मर्जी से पंजाब चुनाव का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने पहले ही यह कह दिया था कि राहुल गांधी पंजाब में ज्यादा हस्तक्षेप न करें। वह जितने सक्रिय होंगे पार्टी को उतना ही नुकसान होगा।

  10. तस्वीर की जगह गांधी विचार पर बहस होनी चाहिए

    तस्वीर की जगह गांधी विचार पर बहस होनी चाहिए

    हंगामा खड़ा कर रहे राजनीतिक दलों और बुद्धिजीवियों से एक प्रश्न यह जरूर पूछा जाना चाहिए कि उन्होंने खादी और गांधी के विचार के लिए अब तक क्या किया है?

  11. आरोप निराधार नहीं पर समूची सेना पर प्रश्नचिह्न गलत

    आरोप निराधार नहीं पर समूची सेना पर प्रश्नचिह्न गलत

    शिकायतों में रत्ती भर भी झूठ नहीं है, इस बात को सभी जानते हैं, किन्तु सवाल वही है कि क्या कुछ अधिकारियों द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार के लिए समस्त सेना पर प्रश्नचिन्ह उठाया जाना न्यायसंगत है।

  12. सेना की साख में किसी भी तरह का सुराख होना चिन्तनीय

    सेना की साख में किसी भी तरह का सुराख होना चिन्तनीय

    सेना की साख में यह पहला सुराख नहीं है। समय−समय पर अनेक सुराख कभी भ्रष्टाचार के नाम पर, कभी सेवाओं में धांधली के नाम पर, कभी घटिया साधन−सामग्री के नाम पर, कभी राजनीतिक स्वार्थों के नाम पर होते रहे हैं।

वीडियो