1. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विकास का मुद्दा पीछे छूट रहा

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विकास का मुद्दा पीछे छूट रहा

    इस बार के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विचार और विकास के मुद्दे पीछे छूट रहे हैं। गठबंधन और दूसरों के विभाजन में राजनीतिक दलों द्वारा अपने लिए कोई उम्मीद तलाशी जा रही है।

  2. जिम्मेदारी का जवाब जातिवाद से देना चाहती हैं मायावती

    जिम्मेदारी का जवाब जातिवाद से देना चाहती हैं मायावती

    मायावती ने सत्ता में रहते हुए अपनी जिम्मेदारियों का उचित निर्वाह किया होता, तो अगले ही चुनाव में उन्हें बाहर का रास्ता न देखना पड़ता और न ही आज यह बताना पड़ता कि किस जाति के कितने प्रत्याशी उतार रही हैं।

  3. सपाई दंगल में कौन जीता, कौन हारा का फैसला करना मुश्किल

    सपाई दंगल में कौन जीता, कौन हारा का फैसला करना मुश्किल

    किसी की छवि में उतार−चढ़ाव हुआ करता है लेकिन रिश्ते नहीं बदला करते। अखिलेश के पिता मुलायम सिंह हैं, तो सगे चाचा शिवपाल ने भी उन्हें गोद में खिलाया है। कैसे कहा जाए कौन जीता कौन हारा।

  4. कश्मीर का भविष्य राजनीतिक इच्छाशक्ति और सोच पर

    कश्मीर का भविष्य राजनीतिक इच्छाशक्ति और सोच पर

    पचास सालों ने कश्मीर शब्द को बच्चे-बच्चे की जुबान पर चढ़ाने में इतनी भूमिका नहीं निभाई जितनी उन 27 सालों के अरसे ने निभाई है जिनके दौरान कश्मीर में आतंकवाद फैला।

  5. विपक्ष बर्बादी का अलाप करता रहा, हक़ीक़त कुछ और थी

    विपक्ष बर्बादी का अलाप करता रहा, हक़ीक़त कुछ और थी

    नोटबन्दी ने एक ही झटके में नकली नोटों का जखीरा निष्प्रभावी कर दिया। विपक्ष जिस बर्बादी का अलाप कर रहा था, उसमें भी सच्चाई नहीं थी। इसके विपरीत नोटबन्दी की अवधि में रबी की बोआई बढ़ी, वहीं कर संग्रह व आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि हुई है।

  6. 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में नोटबंदी ही है अहम मुद्दा

    5 राज्यों के विधानसभा चुनावों में नोटबंदी ही है अहम मुद्दा

    इस बार के चुनावी नतीजों में जहां केन्द्र सरकार द्वारा खेले गए नोटबंदी के जुए का असर साफ दिखाई देगा, वहीं चुनाव आयोग के नए निर्देश और हाल ही में सर्वोच्च अदालत द्वारा दिए गए निर्णय से भी चुनाव प्रभावित होंगे।

  7. शांति की बयार के बीच बर्फबारी से कश्मीर फिर बना स्वर्ग

    शांति की बयार के बीच बर्फबारी से कश्मीर फिर बना स्वर्ग

    शांति की बयार के बीच होने वाली बर्फबारी ने एक बार फिर कश्मीर को धरती का स्वर्ग बना दिया है। दो साल पहले तो यह धरती का नर्क बन गया था इसी बर्फबारी के कारण।

  8. इस लड़ाई का नुकसान बाप, बेटे दोनों को ही होगा

    इस लड़ाई का नुकसान बाप, बेटे दोनों को ही होगा

    आखिरी राजनीतिक बाजी बाप बेटे में किसके हाथ लगेगी यह तो अभी कह पाना थोड़ा मुश्किल है पर हालात गवाही दे रहे हैं कि अंतत: इस जंग में बाप बेटे दोनों ही मात खाने को मजबूर होंगे।

  9. आज भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में है कल्याण सिंह की धमक

    आज भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में है कल्याण सिंह की धमक

    राजस्थान का राज्यपाल रहते हुए भी कल्याण सिंह का दखल उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब तक है। 2017 के विधानसभा चुनावों से पूर्व टिकट के दावेदार कल्याण सिंह से अपनी सिफारिश के लिए पहुँच रहे हैं।

  10. द्वितीय विश्वयुद्ध में बमबारी से नोटबंदी की तुलना गलत

    द्वितीय विश्वयुद्ध में बमबारी से नोटबंदी की तुलना गलत

    राहुल गांधी ने विमुद्रीकरण की तुलना द्वितीय विश्वयुद्ध की बमबारी से की, क्या माना जाए कि उन्हें द्वितीय विश्वयुद्ध की पर्याप्त जानकारी है। परमाणु बम के प्रयोग से लेकर लाखों लोगों की मौत को विमुद्रीकरण से जोड़ना क्या दर्शाता है?

  11. देश के नाम प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के निहितार्थ

    देश के नाम प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के निहितार्थ

    जहां तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 31 दिसंबर को देश के नाम संबोधन में की गई घोषणाओं का प्रश्न है तो कहा जा सकता है कि कमोबेश घोषित योजनाएं पहले से हैं केवल और केवल इन्हें परिवर्तित किया गया है।

  12. धर्म, जाति के आधार पर वोट माँगना अब पड़ेगा महँगा

    धर्म, जाति के आधार पर वोट माँगना अब पड़ेगा महँगा

    सुप्रीम कोर्ट ने 21वीं शताब्दी के भारत में चुनाव सुधारों को एक नई गति प्रदान की है जिसमें धर्म, संप्रदाय, जाति, भाषा इत्यादि का वोट माँगने में अवश्य ही कोई आधार नहीं होना चाहिए।

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