1. कुशल शासक और समाजवाद के अग्रदूत थे महाराजा अग्रसेन

    कुशल शासक और समाजवाद के अग्रदूत थे महाराजा अग्रसेन

    उन्होंने नियम बनाया था कि उनके नगर में बाहर से आकर बसने वाले व्यक्ति की सहायता के लिए नगर का प्रत्येक निवासी उसे एक रुपया व एक ईंट देगा, जिससे आसानी से उसके लिए निवास स्थान व व्यापार का प्रबंध हो जाए।

  2. सबकुछ दिलाता है 16 दिवसीय महालक्ष्मी पूजन

    सबकुछ दिलाता है 16 दिवसीय महालक्ष्मी पूजन

    सोलह ब्राह्मणियों को भोजन कराकर पूजा की सभी वस्तुएं उन्हें दे दी जाती हैं और डोरे को सिरा दिया जाता है। पूजा के बाद प्रतिदिन कथा भी कही और सुनी जाती है।

  3. पितरों की तृप्ति का अवसर माना जाता है पितृ पक्ष

    पितरों की तृप्ति का अवसर माना जाता है पितृ पक्ष

    पितृपक्ष को महालय या कनागत भी कहा जाता है। हिंदू धर्म मान्यता अनुसार, सूर्य के कन्या राशि में आने पर पितर परलोक से उतर कर कुछ समय के लिए पृथ्वी पर अपने पुत्र पौत्रों के यहां आते हैं।

  4. निर्माण एवं सृजन के देवता हैं भगवान विश्वकर्मा

    निर्माण एवं सृजन के देवता हैं भगवान विश्वकर्मा

    विश्वकर्मा शिल्प एवं वास्तु विद्या के अधिष्ठाता तथा निर्माण एवं सृजन के देवता हैं। विश्वकर्मा वैदिक देवताओं में से एक हैं। उन्हें पृथ्वी, जल, प्राणी आदि का निर्माता कहा जाता है।

  5. श्रद्धा के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखें

    श्रद्धा के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखें

    गणेशोत्सव की सार्थकता को समझें और इन आयोजनों के माध्यम से अपनी श्रद्धा को पोषित करने के साथ पर्यावरण संरक्षण की स्वस्थ परम्पराएँ चल पड़ें, ऐसे कुछ प्रयास किये जायें।

  6. जैन समाज का महाकुंभ पर्व है पर्युषण

    जैन समाज का महाकुंभ पर्व है पर्युषण

    सम्पूर्ण जैन समाज का यह महाकुंभ पर्व है, यह जैन एकता का प्रतीक पर्व है। जैन लोग इसे सर्वाधिक महत्व देते हैं। संपूर्ण जैन समाज इस पर्व के अवसर पर जागृत एवं साधनारत हो जाता है।

  7. सद्बुद्धि चाहिए तो करें गणेश-गायत्री का स्मरण

    सद्बुद्धि चाहिए तो करें गणेश-गायत्री का स्मरण

    गणेश पूजन के शुभ अवसर पर सद्बुद्धि जगाने का प्रयत्न सभी गणेश पूजक को करना चाहिए। जो गणेश-गायत्री का नियमित स्मरण करेगा, उसे अवश्य सद्बुद्धि प्राप्त होगी।

  8. ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य देने वाले हैं भगवान श्रीगणेश

    ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य देने वाले हैं भगवान श्रीगणेश

    भगवान श्रीगणेश का हमारे जीवन में कितना धार्मिक महत्व है यह इसी बात से समझा जा सकता है कि किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में उनका स्मरण किया जाता है।

  9. जीवन को प्रभावित करती हैं दिशाएँ, इसलिए रखें खास ध्यान

    जीवन को प्रभावित करती हैं दिशाएँ, इसलिए रखें खास ध्यान

    वास्तु शास्त्र में दिशाएं हमारे जीवन को किस तरह प्रभावित करती हैं इसे इस बात से समझा जा सकता है कि जो कुछ भी आपके जीवन में घटित हो रहा है उसका संबंध किसी न किसी दिशा से है।

  10. खुशहाली के लिए सभी चीजों का सही दिशा में होना जरूरी

    खुशहाली के लिए सभी चीजों का सही दिशा में होना जरूरी

    वास्तु शास्त्र में दिशाओं के अनुसार सफलता और उन्नति सुनिश्चित की जा सकती है। इसी आधार पर वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करते हुए भवनों को डिजाइन किया जाता है।

  11. भवन का वास्तु खराब हो तो जीवन पर पड़ता है असर

    भवन का वास्तु खराब हो तो जीवन पर पड़ता है असर

    वास्तु का अर्थ है निवास के लिए सही भवन और शास्त्र का अर्थ है अध्ययन। वास्तु का अर्थ वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन की डिजाइनिंग या उसे सही करना है।

  12. श्रावण माह में भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं शिव

    श्रावण माह में भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं शिव

    सावन के महीने में भगवान शिव की अपने भक्तों पर विशेष कृपादृष्टि होती है। इस माह शिव के भक्तगण अपनी सभी प्रकार की समस्याओं का हल भगवान शिव की उपासना व विभिन्न प्रकार के उपायों के माध्यम से कर सकते हैं।

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