1. मांगलिक की शादी मांगलिक से ही हो सकती है

    मांगलिक की शादी मांगलिक से ही हो सकती है

    ज्योतिष के अनुसार यदि कोई व्यक्ति मांगलिक है तो उसकी शादी किसी मांगलिक से ही की जानी चाहिए, इसके पीछे कई धारणाएं बनाई गई हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में।

  2. जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए भगवान महावीर ने

    जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए भगवान महावीर ने

    भगवान महावीर ने दुनिया को जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए, जो हैं- अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य (अस्तेय) और ब्रह्मचर्य। सभी जैन मुनि, आर्यिका, श्रावक, श्राविका को इन पंचशील गुणों का पालन करना अनिवार्य है।

  3. हर दृष्टि से आदर्श हैं भगवान श्रीराम

    हर दृष्टि से आदर्श हैं भगवान श्रीराम

    भगवान श्रीराम महान पत्नी व्रता भी थे उन्होंने वनवास से लौटने के बाद माता सीता के साथ न रह कर भी कभी राजसी ठाठ में जीवन नहीं बिताया तथा न ही कभी उनके सिवा किसी अन्य की कल्पना की।

  4. माँ दुर्गा के सभी नौ रूपों का अलग अलग महत्व

    माँ दुर्गा के सभी नौ रूपों का अलग अलग महत्व

    माता के प्रथम रूप को शैलपुत्री, दूसरे को ब्रह्मचारिणी, तीसरे को चंद्रघण्टा, चौथे को कूष्माण्डा, पांचवें को स्कन्दमाता, छठे को कात्यायनी, सातवें को कालरात्रि, आठवें को महागौरी तथा नौवें रूप को सिद्धिदात्री कहा जाता है।

  5. अपहृत वेदों को वापस लाकर धर्म की रक्षा की माँ दुर्गा ने

    अपहृत वेदों को वापस लाकर धर्म की रक्षा की माँ दुर्गा ने

    देवताओं ने भगवती से कहा कि महामाये! जिस प्रकार आपने शुम्भ−निशुम्भ, चण्ड−मुण्ड, रक्तबीज, मधु−कैटभ आदि असुरों का वध करके हम सब की रक्षा की थी वैसे ही इस संसार को बचाने का प्रयत्न करें और दुर्गमासुर का संहार करें।

  6. भगवान विष्णु के दसवें अवतार माने जाते हैं श्रीराम

    भगवान विष्णु के दसवें अवतार माने जाते हैं श्रीराम

    हिन्दुओं के आराध्य देव श्रीराम भगवान विष्णु के दसवें अवतार माने जाते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में विख्यात श्रीराम का नाम हिन्दुओं के जन्म से लेकर मरण तक उनके साथ रहता है।

  7. महाभारत के महानायक हैं भगवान श्रीकृष्ण

    महाभारत के महानायक हैं भगवान श्रीकृष्ण

    श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के एक अवतार हैं। यह अवतार उन्होंने द्वापर में देवकी के गर्भ से मथुरा के कारागर में लिया था। उस समय चारों ओर पाप कृत्य हो रहे थे।

  8. प्रलय के समय काशी को त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं शिव

    प्रलय के समय काशी को त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं शिव

    श्री विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग काशी में स्थित है। इस नगरी का प्रलयकाल में भी लोप नहीं होता। उस समय भगवान अपनी वासभूमि इस पवित्र नगरी को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं।

  9. देवताओं के पुरोहित बृहस्पति करते हैं रक्षा भी

    देवताओं के पुरोहित बृहस्पति करते हैं रक्षा भी

    बृहस्पति महर्षि अंगिरा के पुत्र तथा देवताओं के पुरोहित हैं। ये अपने ज्ञान से देवताओं को उनका यज्ञ भाग प्राप्त करा देते हैं। देवगुरु मंत्रों का प्रयोग कर देवताओं की रक्षा करते हैं।

  10. संपूर्ण विश्व को सत्ता और स्फूर्ति देती हैं भगवती दुर्गा

    संपूर्ण विश्व को सत्ता और स्फूर्ति देती हैं भगवती दुर्गा

    भगवती दुर्गा संपूर्ण विश्व को सत्ता और स्फूर्ति प्रदान करती हैं। दुर्गा मैया को गोलोक में श्रीराधा, साकेत में श्रीसीता, क्षीरसागर में लक्ष्मी, दक्षकन्या सती और दुर्गितनाशिनी नाम से भी जाना जाता है।

  11. संपूर्ण विश्व भगवान श्रीविष्णु की शक्ति से संचालित है

    संपूर्ण विश्व भगवान श्रीविष्णु की शक्ति से संचालित है

    यह संपूर्ण विश्व भगवान श्रीविष्णु की शक्ति से ही संचालित है। वे निर्गुण भी हैं और सगुण भी। वे अपने चार हाथों में क्रमशः शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण करते हैं।

  12. हनुमान भक्तों पर खास प्रसन्न रहते हैं शनि देव

    हनुमान भक्तों पर खास प्रसन्न रहते हैं शनि देव

    पुराणों के मुताबिक शनिदेव हनुमान भक्तों पर खास प्रसन्न रहते हैं और उनकी मदद करते हैं क्योंकि एक बार हनुमानजी ने शनिदेव को रावण से बचाया था।