1. समस्या पैदा करने वाले नहीं न्यायप्रधान देवता हैं शनि

    समस्या पैदा करने वाले नहीं न्यायप्रधान देवता हैं शनि

    आमतौर पर धारणा है कि शनि समस्या प्रदान करने वाले देवता हैं जबकि वास्तविकता यह है कि शनि न्यायप्रधान देवता हैं। शनि सभी के साथ न्याय करते हैं।

  2. सृष्टि के सृजन में अहम योगदान रहा महर्षि कश्यप का

    सृष्टि के सृजन में अहम योगदान रहा महर्षि कश्यप का

    महर्षि कश्यप ने समाज को एक नई दिशा देने के लिए ‘स्मृति-ग्रन्थ’ जैसे महान् ग्रन्थ की रचना की। इसके अलावा महर्षि कश्यप ने ‘कश्यप-संहिता’ की रचना करके तीनों लोकों में अमरता हासिल की।

  3. जानिए वास्तु देव पूजन का क्या है महत्व

    जानिए वास्तु देव पूजन का क्या है महत्व

    यदि आपको लगता है कि किसी वास्तु दोष के कारण आपके घर में कलह, धन हानि व रोग आदि हो रहे हैं तो आपको नवग्रह शांति व वास्तु देव पूजन करवा लेना चाहिए।

  4. अक्षय तृतीया पर तप और दान का अक्षय फल मिलता है

    अक्षय तृतीया पर तप और दान का अक्षय फल मिलता है

    हिन्दू धर्म में अक्षय तृतीया के दिन को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यह पर्व महा फलदायक है। इस दिन किया हुआ तप और दान अक्षय फल प्रदान करता है।

  5. वास्तु दोष निवारक विध्न विनाशक श्वेतार्क का पौधा

    वास्तु दोष निवारक विध्न विनाशक श्वेतार्क का पौधा

    शास्त्रों के अनुसार श्वेतार्क गणपति जिस घर में होता है, उस घर में सभी वास्तु दोष नष्ट हो जाते हैं। और उस भवन में रहने वाले व्यक्ति को अपार धन सम्पदा प्राप्त होती है।

  6. उज्जैन का कुम्भ ‘सिंहस्थ कुम्भ महापर्व’ कहलाता है

    उज्जैन का कुम्भ ‘सिंहस्थ कुम्भ महापर्व’ कहलाता है

    भारत के चार कुम्भ पर्वों में उज्जैन का कुम्भ ‘सिंहस्थ कुम्भ महापर्व’ कहलाता है। यह नगरी अपनी विशिष्ट महानता के लिए भी प्रसिद्ध है। क्षिप्रा नदी ने उज्जैन के महत्व को और भी बढ़ा दिया है।

  7. कुंभ में स्नान... अंधविश्वास है या विज्ञान?

    कुंभ में स्नान... अंधविश्वास है या विज्ञान?

    आखिर बारह सालों में एक बार यहां नहाने का क्या महत्व है? इसका संबंध योग के एक मूलभूत पहलू से है, जिसे भूत शुद्धि कहा जाता है और जिसका अर्थ है अपने पंचतत्वों की सफाई करना।

  8. डराने वालों के झाँसे में न आयें, शनिदेव हैं कल्याणकारी

    डराने वालों के झाँसे में न आयें, शनिदेव हैं कल्याणकारी

    ज्योतिष एक पवित्र विद्या है परंतु कुछ लोग इस पवित्र विद्या को बदनाम कर रहे हैं। ज्योतिष मार्गदर्शन की विद्या है। लेकिन यह मार्ग दर्शन की विद्या न रहकर कुछ ज्योतिषियों के जीवनोपार्जन का साधन बन गया है।

  9. ललाट पर लगे तिलक से होती है पंथ की पहचान

    ललाट पर लगे तिलक से होती है पंथ की पहचान

    संतों के ललाट पर लगे तिलक से संतों के सम्प्रदाय एवं पंथ की पहचान होती है। इस समय सिंहस्थ महाकुंभ मेला क्षेत्र में अलग-अलग अखाड़ों के साधु-संतों के मस्तक पर आकर्षक तिलक सभी को आकर्षित कर रहे हैं।

  10. मांगलिक की शादी मांगलिक से ही हो सकती है

    मांगलिक की शादी मांगलिक से ही हो सकती है

    ज्योतिष के अनुसार यदि कोई व्यक्ति मांगलिक है तो उसकी शादी किसी मांगलिक से ही की जानी चाहिए, इसके पीछे कई धारणाएं बनाई गई हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में।

  11. जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए भगवान महावीर ने

    जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए भगवान महावीर ने

    भगवान महावीर ने दुनिया को जैन धर्म के पंचशील सिद्धांत बताए, जो हैं- अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य (अस्तेय) और ब्रह्मचर्य। सभी जैन मुनि, आर्यिका, श्रावक, श्राविका को इन पंचशील गुणों का पालन करना अनिवार्य है।

  12. हर दृष्टि से आदर्श हैं भगवान श्रीराम

    हर दृष्टि से आदर्श हैं भगवान श्रीराम

    भगवान श्रीराम महान पत्नी व्रता भी थे उन्होंने वनवास से लौटने के बाद माता सीता के साथ न रह कर भी कभी राजसी ठाठ में जीवन नहीं बिताया तथा न ही कभी उनके सिवा किसी अन्य की कल्पना की।

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