1. वैशाखी पर पंजाब में होती है धूम, जगह-जगह लंगर और ढोल

    वैशाखी पर पंजाब में होती है धूम, जगह-जगह लंगर और ढोल

    वैशाखी के दिन ही सिख गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी और आनंदपुर साहब के गुरुद्वारे में पांच प्यारों से वैशाखी पर्व पर ही बलिदान का आह्वान किया था।

  2. आज भी प्रासंगिक है भगवान महावीर की विचारधारा

    आज भी प्रासंगिक है भगवान महावीर की विचारधारा

    विभिन्न संस्कृति और धर्म वाले देश में जैन धर्म कितना प्राचीन है, यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता है। यद्यपि जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान महावीर को जैन धर्म का संस्थापक कहा जाता है।

  3. भगवान श्रीराम के जन्म का महोत्सव है रामनवमी

    भगवान श्रीराम के जन्म का महोत्सव है रामनवमी

    चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था। इस दिन पूरे देश भर में श्रीराम जन्मोत्सवों की धूम रहती है साथ ही हिंदुओं के लिए यह दिन अंतिम नवरात्र होने के कारण भी काफी महत्वपूर्ण होता है।

  4. राजस्थान में धूमधाम से मनाया जाता है सुहागिनों का पर्व गणगौर

    राजस्थान में धूमधाम से मनाया जाता है सुहागिनों का पर्व गणगौर

    गणगौर का उत्सव भी ऐसा ही लोकोत्सव है, जिसकी पृष्ठ भूमि पौराणिक है। काल प्रभाव से उनमें शास्त्राचार के स्थान पर लोकाचार हावी हो गया है परन्तु भाव भंगिमा में कोई कमी नहीं आई है।

  5. माँ दुर्गा के नौ रूपों के पूजन की विधि एवं माहात्म्य

    माँ दुर्गा के नौ रूपों के पूजन की विधि एवं माहात्म्य

    इस पर्व में प्रत्येक दिन मां दुर्गा के नौ रूपों- श्री शैलपुत्री, श्री ब्रह्मचारिणी, श्री चंद्रघंटा, श्री कूष्मांडा, श्री स्कंदमाता, श्री कात्यायनी, श्री कालरात्रि, श्री महागौरी और श्री सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

  6. अधिकतर जगहों पर दो दिन मनाया जाता है होली का त्योहार

    अधिकतर जगहों पर दो दिन मनाया जाता है होली का त्योहार

    होली पर्व वैसे तो नौ दिनों का त्योहार है लेकिन अधिकांश जगहों पर इसे पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। इसके तहत पहले दिन होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते हैं।

  7. आदि और अंत न होने से अनंत हैं भगवान शिव

    आदि और अंत न होने से अनंत हैं भगवान शिव

    ज्ञान, बल, इच्छा और क्रिया शक्ति में भगवान शिव के जैसा कोई नहीं है। वे सभी के मूल कारण, रक्षक, पालक तथा नियन्ता होने के कारण महेश्वर कहे जाते हैं। उनका आदि और अंत न होने से वे अनंत हैं।

  8. मनोकामना पूरी करने का व्रत है महाशिवरात्रि

    मनोकामना पूरी करने का व्रत है महाशिवरात्रि

    जहाँ तक प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थशी के शिवरात्रि कहलाने की बात है, वे सभी शिवरात्रि ही कहलाती हैं और पंचांगों में उन्हें इसी नाम से लिखा जाता है, परंतु फाल्गुन की शिवरात्रि महाशिव रात्रि के नाम से पुकारी जाती है।

  9. वसंत पंचमी माँ सरस्वती का जन्मदिवस भी है

    वसंत पंचमी माँ सरस्वती का जन्मदिवस भी है

    माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को ही संगीत, काव्य, कला, शिल्प, रस, छंद, शब्द शक्ति जिह्वा को प्राप्त हुई थी। वसंत पंचमी पर पीले वस्त्र पहनने, हल्दी से सरस्वती की पूजा और हल्दी का ही तिलक लगाने का भी विधान है।

  10. मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान कर दान पुण्य की परम्परा

    मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान कर दान पुण्य की परम्परा

    जाड़े के मौसम के समापन और फसलों की कटाई की शुरुआत का प्रतीक समझे जाने वाले मकर संक्रांति पर्व को देश भर में धूमधाम से मनाया जाता है और इस अवसर पर लाखों लोग देश भर में पवित्र नदियों में स्नान कर पूजा अर्चना करते हैं।

  11. भारत में अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है मकर संक्रान्ति पर्व

    भारत में अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है मकर संक्रान्ति पर्व

    मकर संक्रान्ति पूरे भारत में अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तब इस त्यौहार को मनाया जाता है।

  12. उत्तर भारत में धूमधाम से मनाया जाता है लोहड़ी का पर्व

    उत्तर भारत में धूमधाम से मनाया जाता है लोहड़ी का पर्व

    जाति बंधनों से मुक्त होकर यह पर्व समूचे उत्तर भारत खासकर पंजाब और हरियाणा में काफी धूमधाम से मनाया जाता है। राजधानी दिल्ली में भी इस पर्व की धूम खूब रहती है।

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