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जापान के टी उत्सव के दौरान मिलती हैं तरह तरह की चाय

By प्रीटी | Publish Date: Jun 19 2017 1:07PM
जापान के टी उत्सव के दौरान मिलती हैं तरह तरह की चाय

जापान के नागोया शहर की स्थापना लगभग 382 वर्ष पूर्व 1612 ईसवीं में राजा टोकूगावा लियासू के समय में हुई। इसी समय से यह शहर जापान के उद्योगों का केंद्र बिंदु माना जाता है। टोकूगावा उन तीन योद्धाओं में एक माने जाते हैं जिन्होंने 16वीं शताब्दी के गृहयुद्ध के बाद संपूर्ण जापान को एकत्रित कर एक बड़े साम्राज्य की स्थापना की। नागोया शहर पूर्वी और पश्चिमी जापान को मिलाता है तथा समुद्र एवं थल से जुड़ा होने के कारण व्यापार में सहायक भी है। धीरे−धीरे राजमहल के चारों और फैलता हुआ नागोया शहर उद्योग के हर क्षेत्र में आगे बढ़ता गया। आज इसका क्षेत्रफल 326.37 वर्ग किलोमीटर है।

यहां पर कई दर्शनीय स्थल हैं। इसमें शिमा और मिकाया बे के समुद्र तट तथा हिडा और जापानी आल्पस पहाड़ियां हैं। टोक्यो, ओसाका, और क्योटो शहर भी पास में ही हैं, जहां आप दो−तीन घंटों में पहुंच सकते हैं। यहां पर आजकल स्टील, मशीनें, गाड़ियां, हवाई जहाज आदि बनते हैं। इसके अतिरिक्त नागोया चीनी मिट्टी के बरतन और उनकी कारीगरी के लिए भी प्रसिद्ध है। बड़ी−बड़ी विश्व प्रसिद्ध कंपनियां जैसे टोयोटा, मित्सूबिशी, नौरीटके आदि यहीं पर स्थापित हैं।
 
वैसे अप्रैल माह यहां घूमने के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है। इस समय जापान में कई हजार चेरी वृक्षों पर छोटे−छोटे सुंदर फूल खिले होते हैं। दूर से सफेद और हल्के गुलाबी रंगों के इन फूलों को देखने पर ऐसा लगता है जैसे सारे पेड़ बर्फ से ढंक गए हों। पूरे महीने भर यहां पर तरह−तरह के आयोजन होते रहते हैं और यहां रहने वाले लोग पिकनिक का आनंद उठाते हैं। फूलों से लदे हुए पेड़ सचमुच नैसर्गिक आनंद की अनुभूति देते हैं।
 
जापान में टी उत्सव का अपना अलग महत्व है। चायघरों में चाय जापानी गीशा स्त्रियों द्वारा ही पेश की जाती है और किसी चायघर में जाने से पहले यह आवश्यक है कि आप अपने जूते−चप्पल उतार दें। यूराकू ऐन में चाय के कई कमरे हैं। चाय जमीन पर बैठ कर ही दी जाती है और आपको घुटने के बल बैठना भी जरूरी है। चाय से पहले एक विशेष प्रकार का लड्डू दिया जाता है जो राजमाह से बनाया जाता है। लड्डू खाने के बाद ही हरी चाय दी जाती है। इसमें चीनी और दूध नहीं होता।
 
आप टोक्यो टावर अवश्य देखने जाएं। इसकी ऊंचाई 333 मीटर है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा लोहे का टावर कहा जाता है। 1958 में बनने के बाद यह विश्व के सैलानियों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बन गया। कहा जाता है कि इसके ऊपर 28 हजार लीटर रंग पोता गया। सफेद और नारंगी रंग में लिपटा यह टावर दूर से ही हवाई जहाजों को आसानी से दिखाई देता है। इसका भार लगभग 4 हजार टन है। इसमें 164 फ्लड लाइट लगी हैं। सर्दियों में नारंगी रंग तथा गरमियों में सफेद रोशनियों में जगमगाता यह टावर बहुत ही सुंदर लगता है। यह टावर जापानी दूरदर्शन तथा रेडियो की तरंगों के लिए बनाया गया है।
 
इंपीरियल पैलेस प्लाजा भी देखने योग्य जगह है। यह महल लगभग 15 फुट चौड़ी खाइयों से घिरा है और 250 एकड क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे चारों ओर से चीड़ के वृक्षों ने घेर रखा है। आज भी जापान के राजा−रानी यहीं पर रहते हैं। कुछ ही भाग सैलानियों के लिए खुला है।
 
आसाकुसा कन्नोन मंदिर टोक्यो का सबसे बड़ा बौद्ध मंदिर है। सभी जापानी यहां पर श्रद्धा से जमीन पर बैठ कर पूजा करते हैं एवं सिर झुकाते हैं। मंदिर में महात्मा बुद्ध की बहुत बड़ी मूर्ति रखी हुई है। साथ ही टोक्यो में कई और भी देखने योग्य स्थल हैं जैसे− मेजी स्नाइन, काबुकी थिएटर आदि। खरीदारी के लिए गिंजा शापिंग सेंटर तथा नाकामिसे शापिंग स्ट्रीट जाया जा सकता है। यहां सस्ता और टिकाऊ इलेक्ट्रानिक सामान भी मिलता है।
 
जापान कृत्रिम मोतियों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। यहां पर विशेषज्ञ आपको मोतियों को बनाने की विधि समझाते हुए दिखाई पड़ेंगे। ये मोती समुद्र से लाई गई सीपियों से एक खास पद्धति द्वारा बनाए जाते हैं। किसी भी व्यक्ति का स्वागत जापानी बार−बार झुक कर करते हैं। अपने से बड़ों का वह बहुत ही सम्मान करते हैं और बहुत ही नम्र व्यवहार करते हैं।
 
टोक्यो एअरपोर्ट बहुत ही बड़ा और कई हिस्सों में बंटा है। एक भाग से दूसरे भाग में जाने के लिए बिजली की रेलें हैं। जब एअरपोर्ट का हिस्सा ही रेल से जुड़ कर चलने लगता है जो एक अजूबा जैसा ही लगता है। कुल मिला कर कहा जा सकता है कि जापान सचमुच परियों का सा देश है।
 
प्रीटी