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बिटकॉइन के क्रेज को भुनाने में लगी हैं कुछ भारतीय कंपनियां, सतर्क रहें

By शुभा दुबे | Publish Date: Jan 28 2018 10:49AM
बिटकॉइन के क्रेज को भुनाने में लगी हैं कुछ भारतीय कंपनियां, सतर्क रहें
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आभासी मुद्रा बिटकॉइन में आए जोरदार उछाल ने न केवल निवेशकों को आकर्षित किया है, बल्कि बड़ी संख्या में भारतीयों को इस क्रिप्टोकरेंसी में कारोबार की संभावनायें नजर आ रही हैं। इसी के मद्देनजर लोग बड़ी संख्या में बिटकॉइन के ‘क्रेज’ को भुनाने लगे हैं और अपनी कंपनी के नाम के आगे पीछे बिटकॉइन जोड़ रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक पिछले कुछ सप्ताह में दर्जन भर कंपनियां दर्ज हुई हैं जिनके नाम में ‘बिटकॉइन’ जुड़ा हुआ है। इनमें से कुछ कंपनियों का पंजीकरण तो हाल ही में हुआ है। इसके अलावा कंपनी पंजीयक के पास बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं। ऐसी कंपनियों की संख्या कहीं अधिक हैं जिनके नाम के साथ ‘क्रिप्टो’ जुड़ा है।

बिटकॉइन की आलोचना के बावजूद बढ़ रहा है क्रेज
 
बिटकॉइन के भारतीय संस्करण के रूप में ‘इंडिकॉइन’ और भारतकॉइन’ के अलावा स्वच्छकॉइन नाम से कंपनियों के पंजीकरण के आवेदन मिले हैं। उद्यमियों और निवेशकों में बिटकॉइन को लेकर यह ‘क्रेज’ तमाम नियामकीय चेतावनियों के बावजूद जारी है। नियामकों ने बिटकॉइन और उसके अन्य विकल्पों में बिना नियमन के परिचालन को लेकर आगाह किया है।
 
अवैध गतिविधियों में उपयोग हो रहा बिटकॉइन?
 
बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी के तहत धन जुटाने में मनी लांड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण की आशंकाएं भी जुड़ी हुई हैं। नियामकीय एजेंसियों के बीच इस बात की भी चिंता है कि इनकी आड़ में कहीं अवैध रूप से धन जुटाने की गतिविधियां तो नहीं चल रहीं हैं। इस तरह की कुछ फर्जी कंपनियों को पकड़ा भी गया है। नियामक और सरकारी विभाग इस बारे में अपनी जांच को आगे बढ़ा रहे हैं। इन विभागों के अधिकारियों का कहना है कि वे इस नए आकर्षण को समझने का प्रयास कर रहे हैं।
 
कंपनियां बेपरवाह
 
इसके बावजूद उद्यमी इससे जुड़े जोखिमों को लेकर बेपरवाह हैं। गाजियाबाद से लेकर कानपुर तक और दार्जिलिंग से लेकर जयपुर तथा दिल्ली से अहमदाबाद, मुंबई तक क्रिप्टोकरेंसी का आकर्षण बढ़ रहा है। इन नामों के लिए आवेदन करने वाली कंपनियों ने अलग-अलग कारोबारी गतिविधियों के लिये प्रस्ताव किया है। इस तरह के नामों के साथ आने वाली कंपनियों में एक कंपनी ने खुदरा व्यापार-व्यक्तिगत और परिवार में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की मरम्मत का कारोबार करने की गतिविधि दिखाई है तो एक अन्य कंपनी ने वित्तीय मध्यस्थ इकाई के रूप में कारोबार करने की इच्छा जताई है। एक अन्य कंपनी का कहना है कि खोजी पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का आवेदन दिया है।
 
एक कंपनी ने दुनियाभर में दंत चिकित्सकों के लिए क्रिप्टो कॉइन का प्रस्ताव किया है। इस कंपनी ने बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने और बीमा दावों को सुगम बनाने का वादा किया है। इसी तरह एक कंपनी ने ‘सेक्स कॉइन’ का प्रस्ताव किया है, जो बालिगों के लिए मनोरंजन और सेक्स कारोबार में भुगतान के लिए इस्तेमाल हो सकता है। बड़ी संख्या में नई इकाइयां सीमित दायित्व भागीदारी माडल (एलएलपी) के तहत स्थापित की गई हैं। वहीं कई अन्य प्राइवेट कंपनियों के रूप में पंजीकृत हुई हैं। कई सूचीबद्ध कंपनियां अपने संविधान में बदलाव करने के बारे में सोच रही हैं जिससे उनके नाम के साथ बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी का नाम जुड़ सके। कई इकाइयां सिर्फ डिजिटल क्षेत्र में काम कर रही हैं और ये कंपनियां वेबसाइट या आनलाइन एक्सचेंज स्थापित कर रही हैं।
 
कंपनी पंजीयक के आंकड़ों के अनुसार पंजीकरण कराने वाली इकाइयों ने बिटकॉइन बाजार, बिटकॉइन एक्सचेंज, बिटकॉइन फिनकंसल्टेंट्स, बिटकॉइन इंडिया साफ्टवेयर सर्विसेज, बिटकॉइन सर्विसेज इंडिया, बिटकॉइनर्स इंडिया, बिटकॉइन इंडिया और बिट कॉइन इन्फोटेक के रूप में पंजीकरण कराया है। इसके अलावा क्रिप्टो एडवाइजर्स, क्रिप्टो फ्यूचरिस्टिक्स ट्रेड्स, क्रिप्टो इन्फोटेक, क्रिप्टो, आईटी सर्विसेज, क्रिप्टो लैब्स, क्रिप्टो माइनिंग, क्रिप्टो यो कॉइन इंडिया, क्रिप्टो कॉइन साल्यूशंस और क्रिप्टोमुद्रा डिजिटल सर्विसेज के रूप में भी पंजीकरण हुआ है।
 
सरकार की चिंता
 
दूसरी तरफ सरकार इस मुद्दे पर चिंतित है और हाल ही में सरकार द्वारा क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े मुद्दों की जांच के लिये पिछले साल बनायी गयी समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। समिति क्रिप्टोकरेंसी के फायदे एवं नुकसान समेत एक अपना क्रिप्टोकरेंसी पेश करने की भी परख कर रही है। सरकार इस बात की भी जांच कर रही है कि काला धन रखने वाले लोगों ने नोटबंदी के दौरान अपना कालाधन क्रिप्टोकरेंसी में लगा दिया था। ऐसी रिपोर्टें हैं कि नोटबंदी के दौरान लोगों ने बिटकॉइन में पैसा लगा दिया था और इसके दाम अचानक काफी बढ़ने की एक मुख्य वजह यही थी।
 
वित्तीय लेनदेन में शामिल करने की तैयारी?
 
यह भी खबर है कि बिटकॉइन की बढ़ती लोकप्र‍ियता को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस करंसी को लेकर इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) को ऑडिटिंग रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा है। सरकार इसे आपके वित्तीय लेनदेन में शामिल करने पर भी विचार कर रही है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने आईसीएआई को यह जिम्मेदारी सौंपी है और एक पैनल गठित कर दिया गया है जोकि 31 मार्च तक अपनी रिपोर्ट सौंप देगा।
 
आरबीआई की सतर्क निगाह
 
आरबीआई भी अपनी सतर्क निगाह इस आभासी मुद्रा पर बनाये हुए है और उसने बैंकों को लेटर भेजकर क्रिप्टोकरंसी से जुड़ी कंपनियों और एक्सचेंजों के वित्तीय लेनदेन को लेकर सावधानी बरतने और उन पर कड़ी नजर रखने के लिए कहा है। 
 
विश्व के देश विश्वास बढ़ाने में लगे
 
दूसरी ओर बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसीज में लोगों को विश्वास बढ़ाने के लिए दुनिया के कई देश तैयारी कर रहे हैं। हाल ही में संपन्न विश्व आर्थिक मंच बैठक में हिस्सा लेने वाले विशेषज्ञों ने यह अनुमान लगाते हुए कहा है कि नियम बनाने का काम शुरुआती दौर में हैं। यही नहीं स्वीडन तो अपनी खुद की डिजिटल करंसी लॉन्च करने की तैयारी में है।
 
वैसे बिटकॉइन है क्या?
 
बिटकॉइन एक विकेंद्रीकृत डिजिटल मुद्रा है। यह पहली विकेन्द्रीकृत डिजिटल मुद्रा है जिसका अर्थ है कि यह किसी केंद्रीय बैंक द्वारा नहीं संचालित होती। कंप्यूटर नेटवर्किंग पर आधारित भुगतान हेतु इसे निर्मित किया गया है। इसका विकास सातोशी नकामोतो नामक एक अभियंता ने किया है। सातोशी का यह छद्म नाम है।
 
इसे खरीदना तो आसान है लेकिन बेचना कठिन
 
बिटकॉइन को खरीदना भले आसान है लेकिन इसे बेचना काफी मुश्किल है। इसकी कीमत अगले घंटे क्या होगी इसका भी अनुमान नहीं लगाया जा सकता। अगर आप बिटकॉइन बेचना चाहते हैं तो जान लें कि बिटकॉइन का ट्रांजैक्शन टाइम बिटकॉइन माइनर्स से मिली मंजूरी के आधार पर तय होता है। हर ट्रांजैक्शन को छह माइनर्स की मंजूरी की जरूरत पड़ती है जिससे इस प्रक्रिया में देरी होती है। 
 
-शुभा दुबे