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मधुमेह से आपको बचाएंगे ये आयुर्वेदिक उपाय और योगासन

By शुभा दुबे | Publish Date: Jan 14 2018 1:53PM
मधुमेह से आपको बचाएंगे ये आयुर्वेदिक उपाय और योगासन
Image Source: Google

मधुमेह तेजी से फैलती ऐसी बीमारी है जिसे धीमा जहर भी माना जाता है। अगर यह बीमारी किसी को हो गयी तो जिंदगी भर नहीं जाती। इसके साथ ही यह शरीर में अन्य रोगों को भी आमंत्रित कर लेती है। मधुमेह ऐसा रोग है जोकि एकदम से अपना असर नहीं दिखाता बल्कि धीरे-धीरे शरीर के विभिन्न अंगों को नुकसान पहुँचाता रहता है फिर जब एकदम से किसी को बहुत-सी शारीरिक परेशानियां घेर लेती हैं तब ज्यादा कुछ करने के लिए बचता नहीं है।

मधुमेह के इलाज के लिए तरह-तरह की दवाइयां भी उपलब्ध हैं और हर कोई अपनी दवा को रामबाण इलाज बताता है। लेकिन लोगों को चाहिए कि वह बाजार में उपलब्ध दवाइयों के दावों की हकीकत को परखने के बाद ही कोई फैसला करें। मधुमेह के रोगियों को लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए और अपने लिए निर्धारित खाद्य पदार्थों का ही उचित मात्रा में सेवन करना चाहिए। इसके अलावा आप कुछ ऐसी आयुर्वेदिक औषधियों या जड़ी बूटियों का भी सेवन कर सकते हैं जोकि प्राचीन काल से चली आ रही हैं। यही नहीं मधुमेह से बचाव के लिए कुछ विशेष योगासन भी होते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में-
 
आयुर्वेदिक उपाय
 
गुड़मार की पत्तीः गुड़मार की पत्तियों का उपयोग मुख्‍यत: मधुमेह-नियंत्रण औषधियों के निर्माण में किया जाता है। इसके सेवन से रक्‍तगत शर्करा की मात्रा कम हो जाती है। साथ ही पेशाब में शर्करा का आना स्‍वत: बन्‍द हो जाता है। सर्पविष में गुड़मार की जड़ को पीसकर या काढ़ा पिलाने से लाभ होता है। पत्‍ती या छाल का रस पेट के कीड़े मारने में उपयोग किया जाता है। गुड़मार यकृत को उत्‍तेजित करता है और अप्रत्‍यक्ष रूप से अग्‍नाशय की इन्‍सूलिन स्‍त्राव करने वाली ग्रंथियों की सहायता करता है। इसकी जड़ों का उपयोग खांसी, हृदय रोग, पुराने ज्‍वर, वात रोग तथा सफेद दाग में उपचार हेतु किया जाता है।
 
विश्‍व में पाये जाने वाले अनेकों बहुमूल्‍य औषधीय पौधों में गुड़मार एक बहुउपयोगी औषधीय पौधा है। यह एस्‍कलपिडेसी कुल का सदस्‍य है। इसका वानस्‍पतिक नाम जिमनिमा सिलवेस्‍ट्री है। इसे खाने के बाद गुड़ या चीनी की मिठास खत्म हो जाती है और वह खाने पर रेत के समान लगती है। इस विशेषता के कारण स्थानीय लोग इसे गुड़मार के नाम से पुकारते हैं।
 
गेहूं का पौधा- गेहूं के पौधों में रोगनाशक गुण होते हैं। गेहूं के छोटे-छोटे पौधों से रस निकालकर सेवन करने से मुधमेह नियंत्रण में रहता है।
 
डिल (सुवा भाजी) की पत्तियां- सुवा भाजी की पत्तियों से ब्लड शुगर का लेवल कंट्रोल करने में मदद मिलती है। सौंफ के पौधे जैसे दिखने वाले इस पौधे को शेपु या सुवा भाजी के नाम से भी जाना जाता है। ज्यादातर इसका इस्तेमाल मछली, अंडे और मशरूम बनाने के लिए एक मसाले के रूप में किया जाता है। इसमें 70 तरह के रसायन होते हैं, जिसके चलते ये डायबिटीज के इलाज के लिए प्रभावी जड़ी बूटी है। यह टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में सहायक है। 
 
हरा प्याज जड़ों के साथ- यह सर्दियों में ज्यादातर बाजार में उपलब्ध होता है। इसे कच्चा या सब्जी बनाकर खा सकते हैं। इसकी जड़ों और पत्तियों दोनों का ही सेवन कर सकते हैं। इसके साथ ही इस प्याज को जड़ों के साथ भिगो कर दूसरे दिन इस पानी को छान कर उसे पीने से भी लाभ होता है।
 
योगासन
 
मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए निम्न योगासन करना चाहिए। इससे लाभ मिलता है।
-कपालभाति प्राणायाम
-सुप्त मत्स्येन्द्रासन
-धनुरासन
-अर्धमत्स्येन्द्रासन
-शवासन
-पश्चिमोत्तानासन
 
-शुभा दुबे