मिलेगा नवरात्रि का पूरा फल अगर इस विधि से घर पर करेंगे हवन और कन्या पूजन

मिलेगा नवरात्रि का पूरा फल अगर इस विधि से घर पर करेंगे हवन और कन्या पूजन

नवरात्रि के आखरी दिन यानी नवमी के दिन हवन और कन्या पूजन के साथ व्रत का उद्यापन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार बिना उद्यापन किए नवरात्रि व्रत पूरा नहीं माना जाता है।

हिन्दू धर्म में नवरात्रि पर्व का खास महत्व है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के आखरी दिन यानी नवमी के दिन हवन और कन्या पूजन के साथ व्रत का उद्यापन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार बिना उद्यापन किए नवरात्रि व्रत पूरा नहीं माना जाता है। आज के इस लेख में हम आपको नवरात्रि में हवन और कन्या पूजन करने की सरल विधि बताने जा रहे हैं-

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शास्त्रों के अनुसार नवमी के दिन की पूजा में माता की पंचोपचार विधि से पाद्य, आर्घ्य, आचमन, स्नान, फूल, अक्षत, चंदन, सिंदूर,फल, मिठाई से पूजा की जाती है। माता के साथ उनके गणों, योगिनियों, गणेश, इद्र दसदिक्पाल नवग्रहों, ग्राम देवता, नगर देवता, कुलदेवी और देवता सहित लक्ष्मी, सरस्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है। माता की पूजा आरती के बाद हवन के साथ पान, सुपारी, नारियल और कुछ पैसे लेकर पूर्णाहुति दी जाती है।

हवन पूजा विधि

हवन करते समय सबसे पहले गंगाजल से सभी सामग्रियों को पवित्र कर लें। 

इसके बाद माता की मूर्ति या तस्वीर को पूजा स्थल पर स्थापित करें। 

माता पर श्रृंगार की चीजें, लाल चुनरी और माता के भोग का सामान भी चौकी के पास रखें।

अब एक मिट्टी का पात्र लें उसमें आम की सूखी लकड़ियां रखें और रूई में घी लगाकर लकड़ी के ऊपर रख दीजिए।

इसके बाद कपूर जलाकर पात्र को प्रज्जवलित कीजिए। इसके बाद 7 बार ‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डयै विच्चै नमः’ मंत्र का जाप करते हुए अग्नि में घी डालें। 

इसके बाद हवन की सामग्री से माता के नाम से आहुति दें और फिर सभी देवी-देवताओं से नाम से 3 या 5 बार आहुति देंगे। 

माता के मंत्र ‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डयै विच्चै नमः’ का हवन करते समय 108 बार जाप करें। 

अंत में हवन के बाद आरती करें और माता को भोग लगाने के बाद प्रसाद सभी में बाँटें।

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कन्या पूजन

सबसे पहले कन्याओं को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित करें। 

कन्याओं के आने के बाद सबसे पहले उनके पैर धोएं और इसके बाद उनके पैर साफ करके उनको आसान पर बैठाएं। 

इसके बाद आरती को थाली में कुमकुम, चावल, फूल, रक्षासूत्र और दीपक रखें। 

सभी कन्याओं को कुमकुम लगाएं और उनके हाथ पर रक्षासूत्र बांधें। सभी कन्याओं की आरती उतारने के बाद उन्हें भोजन परोसे। 

भोजन में पूरी, खीर, हलवा, काले चने की सब्जी परोसें। 

कन्याओं को दक्षिणा और कोई अन्य चीज़े भेट में दें। 

अंत में उनका आशीर्वाद लेकर उन्हें विदा करें।

- प्रिया मिश्रा