कैसे करें 'करवा चौथ' की पूजा और कैसे सजाएँ 'थाली'

Karva Chauth
हिंदू महिलाएं यह व्रत अपने पति की लंबी आयु की कामना के लिए करती हैं तथा साथ ही यह व्रत वह कन्याए भी करती हैं जिनका विवाह सुनिश्चित हुआ है या फिर वह विवाह के योग्य हैं। सुयोग्य पति की कामना में कुंवारी कन्याएं करवा चौथ का व्रत बड़े उत्साह व श्रद्धा से करती हैं।

भारतवर्ष में सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु की कामना के लिए तमाम तरह के व्रत और त्यौहार करती ही हैं, लेकिन इन सभी त्यौहारों में करवा चौथ का अपना अलग ही महत्व है। 

हालांकि यह पंजाब राज्य का मुख्य त्यौहार माना जाता है लेकिन करवा चौथ का क्रेज कुछ ऐसा है कि भारत के लगभग सभी राज्यों में इस त्यौहार को बड़े ही धूमधाम से शहरी तथा ग्रामीण महिलाएं मनाने लगी हैं। इस साल करवा चौथ 4 नवंबर 2020 को पड़ रहा है और हम आपको बताएंगे कि करवा चौथ सुहागिन महिलाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है और इस व्रत के क्या नियम हैं तथा करवा चौथ में थाली सजाने का आखिर महत्व क्या है?

क्यों करते हैं 'करवा चौथ'?

हिंदू महिलाएं यह व्रत अपने पति की लंबी आयु की कामना के लिए करती हैं तथा साथ ही यह व्रत वह कन्याए भी करती हैं जिनका विवाह सुनिश्चित हुआ है या फिर वह विवाह के योग्य हैं। सुयोग्य पति की कामना में कुंवारी कन्याएं करवा चौथ का व्रत बड़े उत्साह व श्रद्धा से करती हैं। 

यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष के चतुर्थी के दिन मनाया जाता है। इस दिन सौभाग्यवती महिलाएं निर्जल व्रत का पालन करते हुए भगवान शंकर, माता पार्वती और चंद्रदेव से अपने लिए अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।

करवा चौथ व्रत के नियम

करवा चौथ वाले दिन सूर्योदय के साथ ही व्रत की शुरुआत हो जाती है और चंद्रोदय के साथ चंद्र दर्शन के पश्चात यह व्रत समाप्त होता है। महिलाएं सुबह से निर्जल व्रत करती हैं और चांद दर्शन और पूजा अर्चना के बाद अपने व्रत को खोलती हैं। इस दिन व्रत करने वाली महिलाओं को सबसे पहले सुबह उठकर स्नान कर अपने शरीर को स्वच्छ करना चाहिए तथा साथ ही अपने घर की विधिवत साफ सफाई करनी चाहिए। इसके साथ ही शुद्ध शरीर और शुद्ध मन से करवा चौथ व्रत का संकल्प लेकर व्रत की शुरुआत करें।

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करवा चौथ में थाली का महत्व

करवा चौथ के दिन सजने वाली थाली का बेहद महत्व है। कहा जाता है कि जिस थाली से भगवान की पूजा की जाती है, उस थाली को इतना सुंदर होना चाहिए, जिससे सकारात्मकता झलके और देखने वाले को खुशी प्राप्त हो। इसीलिए करवा चौथ के दिन थाल सजाने का बेहद महत्वपूर्ण प्रचलन है। करवा चौथ के दिन सजने वाली थाली के लिए सबसे पहले मिट्टी के करवे को जल भरकर, करवा के ऊपर एक ढक्कन में चीनी पूरा भर कर रख दें। इस ढक्कन में आप एक चांदी का सिक्का भी रख सकते हैं। इसके अलावा दूसरी महत्वपूर्ण चीज जिसे थाली में स्थान मिलता है, वह है 'छलनी', जिससे आप चांद के दर्शन करेंगी और उसके पश्चात अपने पति के चेहरे को देखकर व्रत खोलेंगी। वहीं करवा चौथ के पूजा में प्रयोग की जाने वाली थाली में दीपक, अक्षत, सिंदूर, कुमकुम, रोली, पान की पत्ती और सफेद रंग की मिठाई अवश्य रखें। इसके साथ ही आप अपनी थाली में सुहाग के सामान को स्थान दें, जिसमें मेहंदी, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर हो। 

करवा चौथ की पूजा-विधि

करवा चौथ के दिन भगवान शंकर और माता पार्वती के साथ ही गौरी पुत्र गणेश और कार्तिकेय की पूजा भी की जाती है। आप करवा चौथ के दिन करवा माता की एक तस्वीर ले आना ना भूलेें और करवा माता की तस्वीर के साथ ही गौरी, गणेश, भगवान शंकर और कार्तिकेय की तस्वीरें को रखकर पूजा की शुरुआत करें। करवा माता की फोटो के साथ ही पीली मिट्टी से गौरी बनाएं और उनकी गोदी में गणेश भगवान को बैठाकर, चुनरी ओढ़ाकर, बिंदी और सभी सुहाग के सामानों से उनका श्रृंगार करें। उसके बाद पूजा के स्थान पर जल से भरा हुआ एक लोटा रखें और एक करवे में गेहूं भरकर उसके ढक्कन पर शक्कर रख दें। 

फिर आप करवे पर रोली से स्वास्तिक का चिन्ह बनायें और करवे पर 13 बिंदी अवश्य लगाएं। इसके बाद दीप जलाकर सुहाग का सारा सामान आप करवा माता के समक्ष रख दें और संकल्प लेकर व्रत की शुरुआत करें।

शाम के समय आप चांद पूजा के लिए सजाई हुई थाली को लेकर छत पर जाएं और चांद निकलते ही चंद्रमा की पूजा के उपरांत छलनी से चांद को देखें और पति का चेहरा देखने के बाद पति के हाथों से पानी पीकर अपने व्रत को खोलें। ध्यान रहे, शाम के समय करवा चौथ के दिन सुने जाने वाली कथा के दौरान आप अपने हाथों में गेहूं या चावल के 13 दाने लेना ना भूलें और इन दानों को अपने हाथों में रखकर ही करवा चौथ की कथा का श्रवण करें। 

- विंध्यवासिनी सिंह

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