जब काशी में एक हजार महिलाओं ने गाया 'शिव तांडव स्रोत'

Shiva Tandava Stotra
आस्था की इस महानगरी का संबंध प्राचीन काल से है। वाराणसी या बनारस में कल-कल बहती मां गंगा की निर्मल धारा अनायास ही भक्तों को अपने पास बुलाती है। बनारस के घाट भारत के सुप्रसिद्ध घाटों में गिने जाते हैं।

वाराणसी को आध्यात्मिक नगरी होने के साथ ही बाबा भोलेनाथ की नगरी भी कहा जाता है। अगर आपको बनारस आने का सौभाग्य प्राप्त हो, तो आप देखेंगे कि यहां की प्रत्येक गली में आपको एक छोटा शिव मंदिर दिखाई दे जायेगा। 

आस्था की इस महानगरी का संबंध प्राचीन काल से है। वाराणसी या बनारस में कल-कल बहती मां गंगा की निर्मल धारा अनायास ही भक्तों को अपने पास बुलाती है। बनारस के घाट भारत के सुप्रसिद्ध घाटों में गिने जाते हैं। वहीं आप जब भी संध्या के समय बनारस के गंगा घाटों पर जाएंगे तो आपको भजन कीर्तन करते साधुओं की टोली नजर आ जाएगी।

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लेकिन आज हम बात कर रहे हैं वाराणसी में गंगा किनारे हुए एक भव्य आयोजन की। इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि नारी शक्ति को सम्मान देते हुए 1000 से अधिक महिलाओं द्वारा शिवजी को अत्यंत प्रिय 'शिव तांडव स्त्रोत' का पाठ कराया गया। इस आयोजन में हिस्सा लेने के लिए भारत के 14 राज्यों से महिलाएं शामिल हुई थीं।  बताया जा रहा है कि इस आयोजन को मुंबई की एक संस्था के द्वारा आयोजित किया गया था और महिलाओं को इसमें शामिल कराने का पूरा जिम्मा इस संस्था ने ही उठाया था। 

इस आयोजन में शामिल हुई महिलाएं जब वाराणसी के गंगा घाट पर लाल और हरे रंग की साड़ी में पहुंची तो नजारा बेहद अद्भुत लग रहा था। वहीं, जब 1000 से भी ज्यादा की संख्या में नारी शक्ति ने एक साथ 'शिव तांडव स्त्रोत' का पाठ शुरू किया तब गंगा घाट का नजारा शिवमय हो गया।

बता दें कि पाठ के दौरान सभी महिलाओं ने अपने हाथों में 'दीया' ले रखा था और एक सुर में शिव तांडव स्त्रोत का पाठ प्रारंभ किया।

आयोजकों का कहना है कि 'शिव तांडव स्त्रोत' जैसे कठिन मंत्र का अभ्यास इन महिलाओं द्वारा महीनों पहले शुरू कर दिया गया था। जैसा कि सभी जानते हैं कि शिव तांडव स्त्रोत जितना प्रभावकारी है उतना ही अनिष्टकारी भी, अगर इसका गलत पाठ किया गया तो! 

किन्तु इन महिलाओं ने शुद्ध उच्चारण से भी लोगों को हैरान कर दिया। हालाँकि कोरोना अभी देश से पूरी तरह से गया नहीं है, और कोरोना को दूर करने के लिए टीकाकरण बड़े तेजी से किया जा रहा है। बावजूद इसके सभी महिलाओं द्वारा कोरोना के गाइडलाइन का पूरी तरीके से पालन किया गया। 

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सभी महिलाएं जो आयोजन में शामिल हुई थीं, उन्होंने मास्क के साथ-साथ फेस कवर सील्ड से अपने चेहरे को पूरी तरीके से ढका हुआ था, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही से कोरोना का संक्रमण न फैले। वहीं इस महा आयोजन को देखने पहुंचे लोगों से भी कोरोना की गाइडलाइन का पूरी तरीके से पालन कराया गया और बिना मास्क के किसी को भी अंदर जाने की परमिशन नहीं दी गई थी।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस तरह के आयोजन सालों तक याद रखे जाते हैं।  

- विंध्यवासिनी सिंह

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