मथुरा के गांवों के लिए बहुत कुछ करना चाहती हूं: हेमामालिनी

सांसद हेमामालिनी ने कहा कि वह मथुरा के गांवों के लिए बहुत कुछ करना चाहती हैं लेकिन देखती हैं कि सरकारी तंत्र ऐसा है कि छोटे-छोटे कामों के लिए निर्णय लेने में वर्षों निकल जाते हैं और काम समाप्त हो जाने की अवधि तक में शुरू भी नहीं हो पाते।

मथुरा। सांसद हेमामालिनी ने कहा कि वह मथुरा के गांवों के लिए बहुत कुछ करना चाहती हैं लेकिन देखती हैं कि सरकारी तंत्र ऐसा है कि छोटे-छोटे कामों के लिए निर्णय लेने में वर्षों निकल जाते हैं और काम समाप्त हो जाने की अवधि तक में शुरू भी नहीं हो पाते। भाजपा सरकार की तीसरी वषर्गांठ के मौके पर जिला विकास समन्वय एवं अनुश्रवण समिति की बैठक में भाग लेने के लिए पहुंची थीं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां के गांवों के लिए बहुत कुछ करना चाहती हूं, लेकिन मेरा हर प्रस्ताव लटक जाता है। कोई सीधा जवाब ही नहीं देता। मैं सांसद निधि तो क्या, निजी स्तर से भी लोगों से धन जुटाकर बहुत कुछ करना चाहती हूं कि लेकिन उसके लिए भी प्रस्ताव पर स्वीकृति अथवा अस्वीकृति प्राप्त होने में वर्षों से लग रहे हैं।’’ 

उन्होंने जनपद के मांट क्षेत्र में शुद्घ पेयजल के अभाव में 15 बच्चों मृत्यु का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘यहां पानी का साफ पानी न मिल पाने की वजह से सैंकड़ों बच्चे बीमार हैं। कई की मृत्यु हो चुकी है। मथुरा के गांवों में पानी खारा है। मैंने सौ आरओ (रिवर्स ओस्मोसिस) प्लाण्ट लगाने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन दो साल हो चुके हैं। सरकार ने पलट कर जवाब तक नहीं दिया।’’ उन्होंने ‘सांसद आदर्श गांव योजना’ में चयनित गांव रावल का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘मैंने सांसद निधि के अलावा भी कई कार्य कराए। कम्युनिटी हेल्थ सेण्टर बनवाया, आरओ प्लाण्ट, शौचालय, सोलर लाइट आदि दानदाताओं व मददकर्ताओं से जुटाए। बच्चियों के लिए कॉलेज बनवाना चाहती थी लेकिन सरकार के स्तर पर उसका भी कोई जवाब ही नहीं मिला।''

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