टायरों की बढ़ती मांग के कारण 2,000 करोड़ रुपये निवेश करेगी बालकृष्ण इंडस्ट्रीज

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Mar 8 2019 4:47PM
टायरों की बढ़ती मांग के कारण 2,000 करोड़ रुपये निवेश करेगी बालकृष्ण इंडस्ट्रीज
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कंपनी के इन कारखानों में बने टायर रेलर ट्रैक्टर, ट्रेलर और खेती के काम आने वाली अन्य मशीनों के अलावा खनन तथा निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनों (आफ- रोड) में इस्तेमाल होते हैं।

पेरिस। ट्रैक्टर, ट्रेलर एवं भारी निर्माण मशीनों आदि के लिये टायर बनाने वाली भारतीय कंपनी बालकृष्ण इंडस्ट्रीज लिमिटेड देश-विदेश के बाजारों में अपने टायरों की बढ़ती मांग को देखते हुए 2,000 करोड़ रुपये की विस्तार योजना पर काम कर रही है। इसमें कंपनी के गुजरात स्थित भुज कारखाना परिसर में कार्बन ब्लैक के उत्पादन का एक अत्याधुनिक कारखाना शुरू करना भी शामिल है। कंपनी बीकेटी ब्रांड नाम से ‘आफ-रोड’ टायरों का कारोबार करती है। कंपनी अपने उत्पादन का बड़ा हिस्सा मुख्यतः यूरोप, अमेरिका तथा आस्ट्रेलिया के बाजारों में निर्यात करती है। भारत में महाराष्ट्र के औरंगाबाद और डोंबीवली, राजस्थान के भिवाड़ी और चोपंकी और गुजरात के भुज में कंपनी के पांच कारखाने हैं। कंपनी के इन कारखानों में बने टायर रेलर ट्रैक्टर, ट्रेलर और खेती के काम आने वाली अन्य मशीनों के अलावा खनन तथा निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनों (आफ- रोड) में इस्तेमाल होते हैं।

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कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अरविंद पोद्दार ने यहां आयोजित कृषि मशाीनरी की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी ‘एसआईएमए’के दौरान भारत से आये संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘कंपनी इस समय करीब 2,000 करोड़ रुपये की विस्तार योजनाओं पर काम कर रही है। इनमें सयंत्रों का रख-रखाव और औरंगाबाद में स्थित कंपनी के सबसे पुराने कारखाने को नयी जगह स्थापित करने का काम भी शामिल है।’’ घरेलू बाजार की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर पोद्दार ने कहा,‘‘भारत में बदलाव आ रहा है। किसान बड़ी और अच्छी मशीनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सरकार भी कृषि क्षेत्र पर ध्यान दे रही है।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘कंपनी विदेशी बाजारों की अपनी प्रतिबद्धता के चलते भारतीय बाजार पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रही थी। लेकिन 2015 से हमने घरेलू बाजार पर भी ध्यान देना शुरू किया है और तीन साल में हम भारतीय बाजार में सात से आठ प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी हासिल कर चुके हैं। हमारे 312 एकड़ के भुज परिसर में क्षमता बढ़ाने की गुंजाइश है। वहां नयी मशीनें लगाने और उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ भारत के आफ-रोड टायर बाजार में हमारी हिस्सेदारी तीन साल में 15 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। इससे देश में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।’’ पोद्दार ने कहा, ‘‘चीन में प्रदूषण संबंधी चिंताओं के कारण कार्बन ब्लैक के कुछ कारखाने बंद कर दिए जाने की वजह से टायर उत्पादन में रबर के साथ मिलाए जाने वाले इस उत्पाद की दुनिया भर में कमी हो गयी। इसके कारण हमने अपना खुद का कारखाना लगाने का निर्णय किया। यह पूरी तरह आटोमैटिक और प्रदूषण रहित होगा। इससे हम अपनी जरूरत पूरी करने के साथ साथ 4-5 साल में कार्बन ब्लैक का निर्यात करने की स्थिति में होंगे।’’



पोद्दार ने कहा,‘‘ मार्च 2018 में समाप्त वित्त वर्ष में हमारा कारोबार 4,500 करोड़ रुपये का रहा। अनुमान है कि इस साल कारोबार 5,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगा। आने वाले समय में हम साल दर साल 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।’’ यूरोपीय बाजार को और बेहतर तरीके से सेवाएं देने के लिए कंपनी इटली में मिलान शहर के पास सेरेगनो में एक बड़े वेयर-हाउस, कार्यालय एवं प्रशिक्षण और सेवा केन्द्र का निर्माण कर रही हैं। यह केंद्र अप्रैल तक तैयार हो जाएगा और बीकेटी के यूरोपीय परिचालन की धूरी के रूप में काम करेगा। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि उसके टायरों का सबसे बड़ा बाजार यूरोप है। यूरोप के बाजार में वह 1995 से निर्यात कर रही है और अपने कुल उत्पादन का करीब 52 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय देशों को बेचती है। विभिन्न बाजारों में कंपनी के 160 से अधिक वितरक हैं जिनमें से 70 वितरक अकेले यूरोपीय देशों में हैं।

 

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