• माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला अब कंपनी के चेयरमैन, जानिए क्यों दी जाती है अतिरिक्त भूमिका?

आपको बता दें कि नडेला भी इस चूनिंदा ग्रुप में शामिल होने वाले भारतवंशी बन गए है। आईबीएम के अरविंद कृष्ण को भी साल 2020 के शुरूआत में ही कंपनी का सीईओ नियुक्त किया गया था और इस दौरान उन्होंने अध्यक्ष का भी पद संभाला हुआ था।

इंडियास्पोरा के अनुसार, भारतीय मूल के अधिकारियों के नेतृत्व में 1 बिलियन डॉलर से अधिक राजस्व वाली लगभग 60 विदेशी-मुख्यालय वाली कंपनियां एक गैर-लाभकारी संस्था में शामिल है। टीओआई की एक खबर के मुताबिक, इनमें से ऐसे कई अध्यक्ष और सीईओ के पद को एक-साथ जोड़ा जाता है और हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट ने भारतवंशी सीईओ सत्य नडेला को कंपनी का अध्यक्ष बनाया है, जोकि अतिरिक्त भूमिका में वह बोर्ड का एजेंडा निर्धारित करने में अगुवाई करेंगे। आपको बता दें कि नडेला भी इस चूनिंदा ग्रुप में शामिल होने वाले भारतवंशी बन गए है। आईबीएम के  अरविंद कृष्ण को भी साल 2020 के शुरूआत में ही कंपनी का सीईओ नियुक्त किया गया था और इस दौरान उन्होंने अध्यक्ष का भी पद संभाला हुआ था। वहीं बात करें फेयरफैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रेम वत्स की तो उन्होंने भी एक साथ दो पदों पर काम किया। 

क्या एक शख्स का दो पद एकसाथ संभालना सही? 

इसको लेकर हर किसी के अलग-अलग विचार है। विजय गोविंदराजन, कॉक्स प्रतिष्ठित प्रोफेसर, डार्टमाउथ में टक स्कूल ऑफ बिजनेस और कार्यकारी साथी, हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल ने कहा कि आमतौर पर हर बोर्ड के अध्यक्ष सीईओ से अलग होते हैं जिससे कॉर्पोरेट प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए शेयरधारकों की ओर से काम कर सके। सत्य नडेला को मिले अतिरिक्त भूमिका को लेकर विजय गोविंदराजन ने कहा कि, वह एक बुद्धिमान नेता हैं और उन्हें अध्यक्ष का पद संभालने से Microsoft शेयरधारकों को काफी अच्छा लाभ हो सकता है। हालांकि, सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी में मार्केटिंग के ली कोंग चियान प्रोफेसर और इनसीड इमर्जिंग मार्केट्स इंस्टीट्यूट में विशिष्ट फेलो निर्मल्या कुमार का मानना ​​है कि, एक साथ दो रोल को संभालना काफी बुरा विचार है। भूमिका के संयोजन से टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है जिससे तनाव बढ़ने के भी काफी आशाकांए है।