कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका नहीं, कीमत को लेकर चिंता जरूर: अधिकारी

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 25, 2022   07:45
कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका नहीं, कीमत को लेकर चिंता जरूर: अधिकारी
प्रतिरूप फोटो

सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने यह कहा। अधिकारी ने भरोसा जताया कि अगर लड़ाई तेज होती है, तो भी ईंधन आपूर्ति पर असर नहीं पड़ेगा। ग्राहकों के लिये वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम में तेजी का फिलहाल सीधा असर नहीं होगा।

नयी दिल्ली|  रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़कर सात साल के उच्चस्तर 103 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गयी। लेकिन भारत के लिये आपूर्ति व्यवस्था पर अभी कोई असर नहीं हुआ है।

सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने यह कहा। अधिकारी ने भरोसा जताया कि अगर लड़ाई तेज होती है, तो भी ईंधन आपूर्ति पर असर नहीं पड़ेगा। ग्राहकों के लिये वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम में तेजी का फिलहाल सीधा असर नहीं होगा।

क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र की खुदरा ईंधन कंपनियों ने पेट्रोल, डीजल और एलपीजी दरों को मौजूदा स्तर पर कायम रखा हुआ है। अधिकारी ने कहा, ‘‘आपूर्ति व्यवस्था बनी हुई है। रूस के हमले से इसपर कोई असर नहीं हुआ है। बाजार में अभी पर्याप्त आपूर्ति है।

हमारे आपूर्तिकर्ता पश्चिम एशिया, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका में हैं। उनपर इस हमले का कोई असर नहीं हैं और वे पहले की तरह तेल तथा गैस की आपूर्ति करते रहेंगे। अगर यूक्रेन संकट गहराता भी है, तो भी स्थिति जस-की-तस बनी रहने की उम्मीद है।’’

अधिकारी ने नाम देने से मना किया। हालांकि, मुद्रास्फीति पर पड़ने वाले असर को देखते हुए कीमतों में तेजी जरूर चिंता का विषय है। उसने कहा, ‘‘खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं की गयी है। लेकिन अंतत: इसे बढ़ाना ही पड़ेगा।’’ ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 103.78 डॉलर प्रति बैरल तक चली गयी। यह 14 अगस्त, 2014 के बाद सर्वाधिक है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी 85 प्रतिशत जरूरतों के लिये आयात पर निर्भर है। आयातित कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (रसोई गैस) में बदला जाता है।

कुल आयात में सऊदी अरब, इराक और अन्य पश्चिम एशियाई देशों की हिस्सेदारी 63.1 प्रतिशत है। अफ्रीका दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है और कुल आपूर्ति में उसकी 14 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं उत्तरी अमेरिका की हिस्सेदारी 13.2 प्रतिशत है। रूस यूरोप की एक-तिहाई प्राकृतिक गैस की जरूरतों को रूस पूरा करता है। जबकि वैश्विक तेल उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत है।

यूरोप को करीब एक-तिहाई गैस की आपूर्ति यूक्रेन से गुजरने वाली पाइपलाइन के जरिये होती है। हालांकि भारत, रूस से काफी कम तेल लेता है। देश ने 2021 में रूस से 43,400 बैरल प्रतिदिन तेल का आयात किया। यह उसके कुल आयात का करीब एक प्रतिशत है। अन्य ईंधनों में 2021 में कोयले का आयात 18 लाख टन रहा जो कुल कोयला आयात का 1.3 प्रतिशत है।

भारत, रूस की गाजप्रोम से सालाना 25 लाख टन एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) भी खरीदता है। देश की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘उपलब्धता को लेकर चिंता की कोई बात नहीं है।

हमें सामान्य आपूर्ति मिल रही है और किसी ने भी इसे टालने की बात नहीं कही है।’’ सरकारी अधिकारी ने कहा कि भारत स्थिति पर नजर रखे हुए है और अमेरिका तथा अन्य देशों के संपर्क में है।





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